आशा नियुक्ति में फर्जीवाड़ा,:निवर्तमान पीएचसी प्रभारी ने फर्जी ज्वॉइनिंग लेटर देकर राघोपुर में आशा की बहाली की

राघोपुर2 महीने पहले
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फर्जीवाड़े की शिकार हुई महिला और पीएचसी प्रभारी द्वारा जारी नियुक्तिपत्र। - Dainik Bhaskar
फर्जीवाड़े की शिकार हुई महिला और पीएचसी प्रभारी द्वारा जारी नियुक्तिपत्र।
  • अश्विन पोर्टल से कोड एवं पासवर्ड भी फर्जी जेनरेट कर थमा दिया गया

वैशाली जिले के राघोपुर प्रखण्ड में सब संभव है। सरकारी सेवकों द्वारा हो या आम आदमी द्वारा। कहावत है सैया भय कोतवाल तो डर काहे का। मामला मेडिकल विभाग में आशा के फर्जीवाड़े नियुक्ति का है, जहां स्वयं निवर्तमान चिकित्सा पदाधिकारी ने अपने मातहतों एव बिचौलियों के साथ स्कैम को अंजाम दिया। इतना ही नहीं चिकित्सा प्रभारी ने आशा कार्यकर्ताओं को आई कार्ड एव ज्वॉइनिंग लेटर भी दे दिया। फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब आशा को एक वर्ष बीतने के बावजूद मानदेय न मिलने पर शिकायत सीएस तक गई। लेकिन फर्जी नियुक्ति जैसे गम्भीर मामले सामने आने के बावजूद अभी तक कोई ठोस करवाई नहीं की गई। जानकारी के अनुसार 241 आशा कार्यकर्ता की नियुक्ति के लिए 2019 में जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा पीएचसी प्रभारी को निर्देश दिया गया था।

जिसके बाद तत्कालीन पीएचसी प्रभारी ने अपने मातहत अकॉउंटेन्ट, बीसीएम, हेल्थ मैनेजर एवं बिचौलियों की मदद से नियुक्ति में पैसे का खेल शुरू कर दिया। इस दौरान पैसे में अंधे हो चुके इन लोगों ने नौकरी की चाह वाले लोगों से 35 हजार से लेकर 50 हजार तक पैसे की वसूली शुरु कर दिया। पीएचसी प्रभारी एवं अन्य ने पैसे को लेकर सीट से 275 सीट पर नियुक्ति कर दिया। पैसे के लोभ में पीएचसी प्रभारी, अकॉउंटेन्ट, हेल्थ मैनेजर एवं बीसीएम की मिलीभगत से सभी को ज्वॉइनिंग लेटर एवं परिचय पत्र भी जारी कर दिया। इतना ही नहीं फर्जीवाड़े में अश्विन पोर्टल से कोड एवं पासवर्ड भी जेनरेट कर थमा दिया गया। कुछ मामलों में जिन्होंने कुछ पैसे नही दिए उनका आशा कोड एवं पासवर्ड वापस छीन लिया गया एवं दूसरे को ज्यादा पैसे लेकर कोड पासवर्ड थमा दिया गया।

मामले का ऐसे हुआ खुलासा
मामले का खुलासा तब हुआ जब जिला की टीम निरीक्षण के लिए आई थी। इसी दौरान किसी ने टीम को आशा कार्यकर्ता के चयन में गड़बड़ी की जानकारी दे दी।जिसके बाद टीम मेम्बरों ने तत्कालीन सीएस इंद्रदेव रंजन को मामले की जानकारी दी। लेकिन सीएस ने भी मामले से आंख मूंद लिया और कोई करवाई नही की। वहीं इस संबंध में सूत्रों ने बताया कि अगर सही तरीके से जांच हो तो आधा दर्जन से अधिक गड़बड़ी के मामले सामने आएंगे।

वैसी महिला जो हुई फर्जीवाड़े की शिकार हुईं
चंदा देवी, काजल कुमारी, रजनी कुमारी, गीता कुमारी, खुशबू कुमारी, रिंकू कुमारी, कविता कुमारी, सुमन कुमारी, ममता कुमारी, दिव्या भारती, आरती कुमारी, कंचन कुमारी, सोनी कुमारी, अनिता कुमारी, सिंधु कुमारी, निभा कुमारी, गनिता कुमारी सहित अन्य महिलाएं है।

इस मामले में क्या कहना है पीड़ित आशा का
इस संबंध में फर्जीवाड़े की शिकार हुई वीरपुर की महिला गीता देवी ने बताया कि आशा कार्यकर्ता की नौकरी के लिए उससे सुशीला मैडम ने 38 हजार रुपए मांगे थे।जिसे उसने दे दिया। उसके बाद कोड वेरिफाई के लिए अकाउंटेंट राजेन्द्र नाथ एवं बीसीएम ने दस हजार रुपए मांगे। जिस पर उसने पैसे देने से इंकार किया तो उसका आशा कोड 186 एवं पासवर्ड दूसरे को दे दिया गया। वहीं फर्जीवाड़े की शिकार जुड़ावनपुर बरारी की महिला खुशबू देवी ने कहा कि आशा फैसिलेटर संख्या 236 के लिए उससे 35 हजार रुपए लिए गए। जिसके बाद उसके मोबाइल पर आशा कोड एवं पासवर्ड आया। फिर उससे कोड वेरिफाई के नाम पर 15 हजार रुपए अकाउंटेंट एवं बीसीएम द्वारा मांगा गया। जिसे न देने पर कोड दूसरे के हाथ बेच दिया गया। वहीं रजनी देवी ने बताया कि आशा फैसिलेटर संख्या 238 पर उसकी नियुक्ति हुई। पैसे की डिमांड पूरी न करने पर कोड नही दिया गया।

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