लापरवाही / सीट पर ट्रेन में एक साथ 3 लोग बैठेंगे तो कैसे होगा दो गज दूरी का पालन

If 3 people sit together in the train on the seat, how will it follow two yards
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If 3 people sit together in the train on the seat, how will it follow two yards

  • प्रशासन की ओर से चलाई जा रही स्पेशल ट्रेन में नहीं रखा जा रहा ध्यान

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

मोहाली. कोरोना महामारी के चलते जिले में फंसे हुए बाहरी राज्यों के लोगों को वापस उनके राज्यों में भेजने के लिए जिला प्रशासन की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं और प्रवासियों को वापस भेजने के लिए मोहाली रेलवे स्टेशन से स्पेशल ट्रेन चला कर उन्हें यूपी-बिहार भेजा रहा है। हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से प्रवासियों को भेजने को लेकर कोरोना महामारी से बचने के लिए जो भी गाइड लाइंस हैं, उन्हें पूरी तरह से फॉलो करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन ग्राउंड लेवल की तस्वीरें कुछ और ही बयान कर रही हैं। गत दिवस मोहाली रेलवे स्टेशन से बिहार के कतियार के लिए जो स्पेशल ट्रेन रवाना की गई, उसमें प्रवासियों को बिना सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए बैठाया गया था। ट्रेन के डिब्बे में तीन लोगों की सीट पर तीन लोगों को ही बैठा कर रवाना किया गया। जो की सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों के बिलकुल खिलाफ है।
1560 प्रवासियों को बिहार के कतियार के लिए किया गया था रवाना

गत दिवस जो स्पेशल ट्रेन मोहाली के रेलवे स्टेशन से रवाना की गई उसमें 1560 प्रवासियों को बैठा कर भेजा गया था। प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से दावा किया गया था जिन प्रवासियों को स्पेशल ट्रेन के जरिए भेजा गया है, उनके लिए हर प्रकार की सुविधा का इंतजाम किया गया था। जैसे की उनके लिए खाना, पानी की बोटल्स, बिस्किट आदि। इसके अलावा अधिकारियों की ओर से यह भी कहा जा रहा है कि प्रवासियों को भेजने के पहले गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार उनका प्रॉपर मेडिकल चेकअप करवा कर उन्हें रवाना किया गया। लेकिन इन प्रवासियों को भेजते हुए जो तस्वीरें सामने आई हैं वो कुछ ही बयान करती हैं।
कार में ड्राइवर के अलावा दो, बाइक पर एक व्यक्ति कर सकता है ट्रेवल

जिला प्रशासन की ओर से जो आदेश जारी किए हैं, उसके अनुसार कार में ट्रेवल, बाइक पर ट्रेवल करते हुए सोशल डिस्टेंसिंग का विशेष ध्यान रखने को कहा गया है। कार में ट्रेवल करते हुए ड्राइवर के अलावा दो लोगों को ट्रेवल करने की अनुमति है जबकि बाइक या स्कूटर पर मात्र एक ही व्यक्ति ट्रेवल कर सकता है। अब जब प्रशासन की ओर से कार व बाइक के लिए सोशल डिस्टेंसिंग के नियम बनाए गए हैं तो प्रशासन की ओर से जो स्पेशल ट्रेन चलाई जा रही हैं उनके सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान क्यों नहीं रखा जा रहा है।
मैसेज आने के बाद भी प्रवासियों को ट्रेन में नहीं बैठाया जा रहा: प्रशासन की ओर से कहा गया है कि जिन प्रवासियों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया है उनके पास एक मैसेज भेजे जा रहे हैं और मैसेज के जरिए उन्हें उनकी ट्रेनों की जानकारी मुहैया करवाई जा रही है। लेकिन देखने को मिल रहा है कि जिन प्रवासियों के पास मैसेज भेजे जा रहे हैं उन्हें भी ट्रेनों में नहीं बिठाया जा रहा है। हाल ही  में बलौंगी के हेल्थ स्क्रिनिंग कैंप में यह देखने को मिला था। जिन लोगों के पास उस दिन ट्रेन में जाने के लिए मैसेज भी आए थे उन्हें भी ट्रेनों में नहीं बैठाया गया था। जिसके बाद उन प्रवासियों के हाथ मात्र निराशा ही लगी थी।

हेल्थ स्क्रीनिंग के नाम पर भी मात्र कागज पर लगती है मोहर...
प्रवासियों को वापस भेजने के लिए जो प्रशासन की ओर से हेल्थ स्क्रीनिंंग कैंप लगाए गए हैं, वहां पर भी कोई पुख्ता प्रबंध नहीं किए गए हैं। तपती धूप में लोगों को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। इस दौरान कैंप में ना तो कोई अधिकारी मौजूद होते हैं और ना ही कोई किसी प्रवासी की बात सुनने वाला। ऐसे में जो मेडिकल टीम भी कैंप में जांच करती है वो भी मात्र प्रवासियों का पूछ कर उनके नाम की हेल्थ सर्टीफिकेट की पर्ची बना कर उस पर मोहर लगा कर उन्हें थमा देती है। उसके बाद बसों में बैठा कर प्रवासियों का टेंपरेचर एक हैल्थ कर्मचारी की ओर से मात्र खाना पूर्ती के लिए चेक किया जाता है। उसका भी कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता।

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