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श्मशान घाट में शव का आंकडा:पिछले एक महीने में 246 कोविड और 270 नॉन कोविड मरीजों के शव श्मशान घाट पहुंचे

मोहालीएक महीने पहलेलेखक: मोहित शंकर
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  • पहले एक महीने में 10 से 15 संस्कार ही होते थे
  • आशंका- कई मौत कोरोना से, लेकिन संस्कार आम शवों की तरह

जिस तरह से कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप हर तरफ दिखाई दे रहा है उसका एक आंकड़ा श्मशान घाट से भी सामने आ रहा है। पिछले महीने अप्रैल से लेकर अब तक करीब 516 शवों का अंतिम संस्कार मोहाली के इंडस्ट्रियल एरिया फेज-6 स्थित नगर निगम के श्मशान घाट में किया गया है। जो कोरोना काल से पहले एक महीने में मात्र 10 से 15 शव तक ही रहता था।

जब तक कोई बड़ी दुर्घटना ना हुई हो। लेकिन पिछले महीने में मौतों का आंकड़ा इस कदर बड़ा कि श्मशान में काम करने वाले कर्मचारी भी परेशान हो गए हैं। आलम यह है कि कोविड की लाशों का संस्कार करने के लिए नॉन कोविड लाशों के संस्कार की तरह अलग से 12 चिताओं के लिए व्यवस्था करनी पड़ी है।

पिछले साल कोविड से जो मौतें हो रही थी उनका संस्कार इलेक्ट्रिकल क्रिम्यूनेटर से ही हो जाता था। लेकिन इस बार लाशों का आंकड़ा बढ़ने के चलते कोविड मरीज की लाशों भी चिता पर आग से जलानी पड़ रही है। उसके बावजूद एक दिन की वेटिंग श्मशान घाट में चल रही है।

अगर पिछले एक महीने की बात की जाए तो मोहाली के श्मशान घाट में पिछले एक महीने में कोविड मरीजों की 246 लाशें पहुंची है। जिसका अंतिम संस्कार किया गया है। वहीं इस समय के दौरान संस्कार के लिए 270 लाशें आई थी जिन्हें कोविड नहीं था। इन लाशों के आंकड़े को देखकर हर कोई हैरान है।

यहां तक की श्मशान में काम करने वाले कर्मचारी भी कहते हैं कि पिछले साल कोरोना के दौरान ऐसी हालत नहीं थी। लाशें ज्यादा हैं इसलिए इलेक्ट्रिकल क्रिम्यूनेटर में मात्र एक दिन में चार लाशें की संस्कार की जा सकती है। इसलिए अब शेष कोविड लाशों को भी नॉन कोविड की तरह अलग यार्ड में चिता पर जलाया जा रहा है और इसके लिए शैड भी डाले जा रहे हैं।

कोरोना के चलते सभी मेडिकल संस्थाएं इसको कंट्राेल करने में जुटी हुई हैं। जिसके चलते अस्पतालों में ओपीडी बंद हैं। इसका असर अन्य बीमारियों के मरीजों पर पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है, क्योंकि अस्पतालों के हर वार्ड कोविड मरीजों के ही रख दिए गए हैं। यह कहना है सिविल मेडिकल सर्विसेज स्पेशलिस्ट डॉक्टर एसोसिएशन पंजाब के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुरिंदर पाल भगत का।

जांच होगी इतनी मौतें क्यों हो रही

डॉ. सुरिंदर पाल भगत का कहना है कि अन्य बीमारियों के मरीजों को इस कोरोना के चलते कम तवज्जो मिल रही है या कुछ गंभीर बिमारियों के लोग कोरोना के डर के कारण अस्पतालों में ही नहीं जा रहे हैं। नॉन कोविड डेथ का आंकड़ा बढ़ने का यह एक बड़ा कारण है। मगर इसका ऑडिट जरूर किया जाना चाहिए कि यह मौतें ज्यादा क्यों हो रही हैं। अगर अन्य बीमारियों के मरीज नॉन कोविड डेथ में शामिल हैं तो उनके लिए भी स्पेशल व्यवस्था की जानी चाहिए।

कोविड पेशंट्स से ज्यादा अगर नॉन कोविड मरीजों की मौतें हो रही हैं इसको लेकर ऑडिट करवाया जाएगा कि इनमें भी कहीं कोरोना के मरीज तो नहीं हैं। यह गंभीर विषय है। इसकी जानकारी नहीं थी।
डीसी गरीश दयालन

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