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व्यवस्था:पानी की सप्लाई अपने हाथ में लेगा नगर निगम, ताकि मेयर ले सके सभी फैसले

मोहालीएक महीने पहले
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  • मोहाली शहर में 38 ट्यूबवेल से होती है पानी की सप्लाई, 10 एमजीडी पानी कजौली से आता है

शहर में पीने के पानी की व्यवस्था वाॅटर सप्लाई एंड सेनिटेशन विभाग की ओर से देखी जा रही है। करीब 50 साल से यह काम नगर निगम के एरिया में इस विभाग की ओर से देखा जा रहा है। जबकि जो एरिया गमाडा के पास होता है उसमें गमाडा ही पीने के पानी की व्यवस्था देखता है। अब नगर निगम बनने के बाद इस विभाग को भी निगम के अंडर लाने की तैयारी कर ली गई है।

नगर निगम के मेयर अमरजीत सिंह जीती सिद्धू और डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह बेदी प्रिंसिपल सेक्रटरी लोकल बाॅडीज से मिलकर इस व्यवस्था को अपने हाथ में लेने के लिए इच्छा जता कर आए हैं। जिसके बाद विभाग की ओर से उन्हें इसका एक प्रपोजल तैयार करने को कहा है, ताकि आने वाली हाउस की मीटिंग में इस प्रस्ताव पर भी चर्चा के बाद पूरी हाउस की सहमति लेकर सरकार को प्रस्ताव भेजा जा सके।

ऐसा करने से जहां काम में तेजी आएगी। वहीं, निगम को पता होगा कि कौन सा काम कैसे, किस समय और किस एरिया में पहल के आधार पर करवाया जाना है। इस समय पूरी व्यवस्था वाॅटर सप्लाई विभाग पर निर्भर है। जबकि टेंडर्स के लिए नगर निगम ही पैसे अदा कर रहा है।

निगम पैसे लगाने के बावजूद अपने अनुसार काम नहीं करवा पाता: डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह बेदी ने बताया कि लंबे समय से जो व्यवस्था पीने के पानी को लेकर चल रही थी उसके अनुसार शहर में वाॅटर सप्लाई विभाग की ओर से प्लानिंग की जाती थी। जो भी प्लानिंग होती थी उसका एस्टीमेट तैयार किया जाता था।

इसका टेंडर भी विभाग ही लगाता था, लेकिन पैसे नगर निगम की ओर से अदा किए जाते थे। इस व्यवस्था के चलते 2 विभागों में काम के फंसे होने के कारण एक तो निगम अपने अनुसार काम नहीं करवा पाता था और दूसरा काम में भी देरी कई जगह पर देखी गई थी और जवाबदेही के लिए भी कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं थी। इसलिए अब नगर निगम ने यह काम अपने हाथ में लेने का प्लान तैयार किया है।

गमाडा अपने सेक्टरों में खुद देखता है वाॅटर सप्लाई की व्यवस्था

शहर में सेक्टरों का निर्माण गमाडा की ओर से किया जाता है। जब सेक्टर विकसित हो जाते हैं तो उनमें पीने के पानी की व्यवस्था भी गमाडा का पब्लिक हेल्थ विभाग ही चलाता है। लेकिन जब यह सेक्टर नगर निगम को ट्रांसफर किया जाता है तो फिर पीने के पानी की व्यवस्था निगम के तहत वाॅटर एंड सेनिटेशन विभाग की ओर से देखी जाती है। लेकिन अब इसे नगर निगम गमाडा की तरह खुद देखना चाहता है। ताकि हर समस्या को मेयर के स्तर पर हाउस में ही हल किया जा सके।

पानी के बिल की राशि से निकलती है कर्मियों की सैलरी

वाॅटर सप्लाई विभाग की ओर से इस व्यवस्था को पूरे शहर में मॉनिटर किया जाता है और जो भी पीने के पानी की सप्लाई है उसको लेकर जो बिल आते हैं उनकी राशि वे इक्ठ्‌ठा करते हैं। इस राशि से वे अपने कर्मचारियों का वेतन अदा करते हैं। ऐसी व्यवस्था लंबे समय से चल रही थी। इसके लिए वाॅटर सप्लाई विभाग के शहर में अनेक जगह पर बिल कलेक्शन सेंटर भी बनाए हुए हैं और किसी भी इमरजेंसी के लिए शहर में ये ही विभाग अब तक काम करता आया है।

इंडस्ट्रियल एरिया और रिहायशी क्षेत्र भी निगम अपने पास लेगा

शहर के अधिकतर इंडस्ट्रियल एरिया की व्यवस्था नगर निगम की ओर से ही देखी जा रही है। लेकिन इंडस्ट्रियल एरिया फेज-8ए, 8बी और यहां का सेक्टर-74 जो रिहायशी और इंडस्ट्रियल एरिया हैं इसे भी अब नगर निगम अपने अधिकार क्षेत्र में लेने की तैयारी कर रहा है। जिसको लेकर यहां के लोग लंबे समय से गुहार लगा रहे थे। इस समय यहां की व्यवस्था पंजाब स्माल इंडस्ट्रीज एक्पोर्ट कॉर्पोरेशन की ओर से देखी जा रही है। इसका प्रस्ताव भी हाउस में लाया जाएगा।

कर्मचारियों को अडॉप्ट करने पर होगा विचार

शहर में इस समय वाॅटर सप्लाई विभाग में करीब 100 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी तैनात हैं जो पूरे शहर में पीने के पानी की व्यवस्था को संभाले हुए हैं। जब नगर निगम वाॅटर एंड सेनिटेशन विभाग को नगर निगम के अधीन लाएगा तो उसमें काम करने वाले इन कर्मचारियों को भी साथ लेगा, नहीं लेगा या फिर कितने कर्मचारी हों इसपर भी विचार किया जा रहा है। इस काम के लिए निगम और विभाग दोनों के अधिकारी बैठ कर रूप रेखा तैयार करेंगे। उसके बाद ही आगे कदम बढ़ाया जाएगा।

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