पीजीआई स्टाफ नर्स की आत्महत्या का मामला / पुलिस ने कैंसिल की एफआईआर पति बोला- आरोपियों को बचाया

X

  • नयागांव थाने में चार सीनियर्स पर दर्ज किया था आत्महत्या के लिए उकसाने का केस

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

मोहाली. पुलिस किसी को बचाने के लिए कुछ भी कर सकती है। आत्महत्या के लिए उकसाने (आईपीसी 306) धारा के तहत दर्ज एफआईआर में यह साफ देखने को मिला। पुलिस ने 10 मई को नयागांव कमाऊ काॅलोनी निवासी अमित के बयान पर उनकी पत्नी दविंदर कौर को आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा के तहत केस दर्ज किया था। दविंदर कौर पीजीआई में 23 साल से जॉब कर रही थी और उसे चार सीनियर्स नर्सें जसपाल कौर, नवनीत धालीवाल, नीलम चांद आैर सुनीता तंग कर रही थी। परेशान होकर दविंदर कौर ने 9 मई की रात को घर में कोई जहरीला इंजेक्शन लगाकर खुदखुशी कर ली। सुसाइड नोट में उसने चोरों के नाम लिखे थे। इसी के आधार पर पुलिस ने उनके खिलाफ केस दर्ज कर लिया।

इधर, परिजन इस गंभीर मामले में पुलिस ने उचित कार्रवाई की उम्मीद लगाए थे, लेकिन 9 दिन बाद पुलिस ने एफआईआर ही कैंसिल कर दी। इससे न केवल परिजनों को आघात पहुंचा है, बल्कि अब मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि एक गंभीर मामले में पुलिस का इस तरह का रवैया मिलीभगत की ओर साफ इशारा कर रहा है। दूसरी ओर पति अमित का आरोप है कि नर्सों की प्रताड़ना के कारण उनकी पत्नी ने सुसाइड कर लिया और उनका घर बर्बाद हो गया, लेकिन पुलिस ने एफआईआर कैंसिल कर आरोपियों को बचाने का काम किया। एसएचओ अशोक कुमार ने बताया कि केस में जांच की गई और उसमें टेक्निकली एफआईआर नहीं बनती थी। इस कारण 18 मई को एफआईआर कैंसिल कर दी।

एफआईआर कैंसिल करने के पुलिस ने बताए ये कारण...

1. एसएचओ नयागांव ने बताया कि नर्स दविंदर कौर ने 9 मई रात को कोई जहरीला इंजेक्शन खुद को लगाया, लेकिन उसके पर्स से जो सुसाइड नोट मिला उस पर तारीख 22 अप्रैल लिखी है। मौत से इतने दिनों पहले कैसे कोई सुसाइड नोट लिख सकता है। 
2. जिनके नाम सुसाइड नोट में लिखे हैं वे नर्स की सीनियर्स थी, स्टाफ ट्रांसफर करने की जिम्मेदारी उनकी नहीं थी। स्टाफ की ट्रांसफर के मामले में तीन मेंबर कमेटी बैठती है और फाइनल अप्रूवल डॉयरेक्टर देते हैं। डायरेक्टर की ओके के बाद ट्रांसफर होती है।
3. फीमेल वार्ड में ट्रांसफर के बाद 23 अप्रैल को दविंदर कौर को उसकी पुरानी जगह ट्रांसफर कर दिया था। कौर ने सुसाइड 9 मई को किया। पुरानी जगह के आॅर्डर 6 मई को हो गए थे। जब आॅर्डर हो गए तो नर्स ने क्यों सुसाइड किया।

जो कारण पुलिस ने बताए हैं, वे सब झूठे

दविंदर के पति अमित ने बताया कि चारों सीनियर्स ने उसकी पत्नी को इतना परेशान कर दिया था कि उसने 22 अप्रैल को घर में कलाई की नसें काट सुसाइड करने का प्रयास किया था। नसें काटने से पहले ही सुसाइड नोट लिखा था। जिस पर वह तुरंत खून में लथपथ पत्नी को पीजीआई की ले आए। सीनियर्स ने पत्नी की ट्रासंफर फिर से स्टाफ ओपीडी में कर दी थी। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी के आॅर्डर उक्त सीनियर्स ने पुरानी जगह कर दिए थे वह ठीक है। लेकिन बीच में दो महीने डिप्रेशन के कारण पत्नी ड्यूटी पर नहीं गई। उसने जो छुटि्टयां की थी उसके लिए लॉकडाऊन में ही मेडिकल जमा करवाने का दवाब बनाया जा रहा था। कहा कि कमेटी ट्रांसफर के लिए सिफारिश करती है और फिर डॉयरेक्टर अप्रूवल देते हैं, यह गलत है। मात्र आरोपियों को बचाने के लिए ड्रामा रचा जा रहा है।

एक्सपर्ट व्यू

 यह एक गंभीर मामला है। लेकिन पुलिस ने इसे हल्के में लिया है। पुलिस अपने आप एफआईआर कैंसिल नहीं कर सकती है। एफआईआर कैंसिल कर पुलिस ने गलत किया है। अगर इस केस में कोई त्रृटि पाई गई थी तो सीनियर ऑफिसर्स की निगरानी में इस मामले को कोर्ट ले जाना चाहिए था। कोर्ट के आदेश के बाद ही कोई कदम उठाना चाहिए था। -एडवाकेट परमिंदर सिंह, डिस्ट्रिक्ट कोर्ट 

नर्स दविंदर कौर ने कोई जहरीला इंजेक्शन लगाकर सुसाइड किया था। पुलिस ने पति के बयान और सुसाइड नोट को आधार बनाकर उसकी चार सीनियर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। लेकिन इन्क्वायरी में कई टेक्निकल खामियां पाई गईं। इसी कारण एफआईआर कैंसिल की गई है। -अशोक कुमार, एसएचओ नयागांव 

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना