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स्टडी:मकानों के लेवल से सड़कें डेढ़ फुट ऊंची, इसलिए 800 घरों में घुसता है पानी

मोहालीएक महीने पहले
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  • आईआईटी रुड़की के साइंटिस्ट्स और पेक इंजीनियर्स की रिपोर्ट की स्टडी फिर शुरू
  • गड्‌ढे होने पर सड़क के ऊपर डाल दी जाती है प्रिमिक्स की लेयर

मॉनसून की पहली बारिश से लोगों के घरों में पानी भरा तो 5 साल पुरानी आईआईटी रुड़की के साइंटिस्ट्स की ओर से बरसाती पानी की निकासी को लेकर तैयार की गई रिपोर्ट और पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज  (पेक) के इंजीनियर्स की रिपोर्ट दोबारा थैले से बाहर आ गई। एक बार फिर इस रिपोर्ट की फाइलों का अध्ययन शुरू हुआ है। पिछले 5 साल में राजनीतिक खींचतान के चलते इसपर कोई काम नहीं हो सका कि पानी कि निकासी कैसे हो।

हर साल बरसात होती है और पानी भरता है। करीब 800 घर इससे प्रभावित होते हैं। लोगों के घरों में पानी जाता है और फिर अधिकारी आते हैं और शुरू हो जाती है अगले साल के लिए प्लानिंग। शहर के फेज-1, 2, 4, 5, 3बी2, 3बी1, 7, सेक्टर-70, 71 औैर इंडस्ट्रियल एरिया के कुछ क्षेत्रों में पानी भरता है। यह वो एरिया है जहां पिछले 2 दशकों में या सड़कें चौड़ी हुई हैं या नई बनाई गई हैं। जो भी सड़क बनाई गई है वो मकानों के लेवल से डेढ़ फुट ऊंची है। इनमें पीटीएल से लेकर फेज-7 तक का शॉपिंग स्ट्रीट मार्ग, बलौंगी पुल से लेकर कुभड़ा चौक तक का मार्ग और एयरपोर्ट रोड का एरिया शामिल है।

यह सभी सड़कें पूरे शहर की चंडीगढ़ की ओर से आने वाली सड़कों को क्रॉस करती हैं। यह सड़कें अपने पुराने लेवल से ऊंची हो गई हैं। जिस कारण पानी जब तक इन सड़कों को क्रॉस कर आगे जाना होता है तब तक बी व सी रोड एरिया में 2 से 3 फुट पानी भर जाता है। यह भरा हुआ पानी लोगों के घरों में घुसता है।

इतना पानी भरने के बाद सड़कों के ऊपर से निकला शुरू होता है। सड़कें मकानों के लेवल से डेढ़ फुट ऊंची हैं। फेज-7 के लोगों ने अपने एरिया में सड़क को तोड़ कर रैंप बनवाया हुआ है ताकि पानी कि निकासी हो सके। यह रैंप करीब पोने 2 फुट डाउन कर बनाया गया है। इस रैंप का लोगों को फायदा है। गमाडा ने जब नई सड़कें बनाई तो उन्होंने मकानों के प्लिंथ लेवल का कोई ध्यान नहीं रखा। सड़कों पर प्रिमिक्स की लेयर दर लेयर डाली जाती रही है। जो नहीं हटाई गई। जिस कारण मेन सड़कें ऊंची हो गई। जिनका लेवल सी और बी मार्गों से डाउन होना चाहिए था।

सर्वे में ये कहा गया था

गमाडा की ओर से शहर में पानी को लेकर आईआईटी मुंबई और फिर आईआईटी रुकड़ी के साइंटिस्ट से सर्वे करवाया। इसपर लाखों रुपए खर्च हुए। उसके बाद नगर निगम ने पेक के इंजीनियर्स से सर्वे करवाया। सभी ने एक ही बात कही थी कि सड़कों का लेवल ऊंचा हो गया है। जो निकासी के लिए स्टॉर्म वाटर लाइन के पाइप हैं वो छोटे हैं उन्हें बड़ा किया जाए। सड़कों का लेवल ऐसा रखा जाए कि पानी सड़कों से होकर ही गुजर जाए। उसके रास्ते में कहीं भी रूकावट पैदा न हो।

स्टॉर्म वाॅटर लाइन के पाइप छोटे

इंजीनियर एनएस कलसी ने फीता लेकर दिखाया कि जहां काॅज-वे बना हुआ है वो एरिया पोने 2 फुट तक डाउन किया गाय है। जिससे साफ होता है कि सड़क पोने 2 फुट तक ऊंची थी जिसे डाउन होना चाहिए था। उन्होंने बताया कि रोड मैप हर एक एरिया का ऐसा है कि मकानों के प्लिंथ लेवल से करीब एक से डेढ़ फुट तक अदरुनी सी-रोड डाउन होती है उससे करीब 6 इंच बी रोड डाउन होती है और उससे 6 इंच मेन रोड जिसे ए रोड और सेक्टर डिवाइडिंग रोड कहते हैं, डाउन होती है।

निगम को करना होगा काम

बरसाती पानी की निकासी को लेकर प्लान पर चर्चा की जा रही है। जो मेरे आने से पहले पिछले वर्षों में बने हुए थे। पेक और आईआईटी रुकड़ी की जो रिपोर्ट है उनपर भी अध्ययन किया जाएगा और जो भी काम करना होगा निगम करेगी। फिलहाल जहां पानी भरने की आशंका है वहां पर अतिरिक्त पानी निकालने के पंप लगा दिए गए हैं। ताकि लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके लिए काम किया जा रहा है। -कमल कुमार गर्ग, कमिनर नगर निगम

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