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बीपी-शुगर बढ़ने से बेहोश हुए बुजुर्ग / घरवाले अस्पताल ले गए, 15 मिनट बीपी चेक करने में लग गए, शुगर चेक करने को स्ट्रिप नहीं थी, पीजीआई रेफर किया तो एंबुलेंस ही नहीं दी

The family members were taken to the hospital, it took 15 minutes to do BP check, there was no strip to check sugar, PGI was referred and no ambulance was given.
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The family members were taken to the hospital, it took 15 minutes to do BP check, there was no strip to check sugar, PGI was referred and no ambulance was given.

  • हेल्थ मिनिस्टर के हलके का सरकारी अस्पताल, कोरोना संकट में जहां अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं होनी चाहिए थी, वहां पर ये लापरवाही पड़ेगी भारी

दैनिक भास्कर

Jun 02, 2020, 05:00 AM IST

मोहाली. समय रात 9:30 बजे। जगह सिविल अस्पताल खरड़ की इमरजेंसी। बुजुर्ग गुरसेव सिंह को बीपी और शुगर की बीमारी है। रविवार रात उनकी शुगर इतनी बढ़ गई कि वे अचेत होकर घर में गिर गए। बेटे मिंटू ने पड़ोसी सतिंदर सिंह की मदद से उन्हें गाड़ी में अस्पताल पहुंचाया। सतिंदर सिंह ने बताया कि वे सीधे इमरजेंसी में गए, वहां पर तीन स्टाफ नर्सें थी। यहां कोई डॉक्टर नहीं था। सतिंदर ने स्टाफ नर्स को बुजुर्ग का बीपी चेक करने के लिए कहा।

पहले तो बोलने लगी कि बीपी मशीन ठीक नहीं है। फिर मशीन ले आई और चेक करने लगी तो बीपी की रिपोर्ट सही नहीं आ रही थी। 15 मिनट  बीपी चेक करने में लगे। बुजुर्ग अचेत अवस्था में थे। सतिंदर ने नर्स से उनका शुगर लेवल चेक करने को कहा। नर्स ने जवाब दिया कि शुगर स्ट्रिप खत्म है। सतिंदर ने कहा कि इतना बड़ा सरकारी अस्पताल, ऊपर से कोरोना फैला हुआ है। ऐसे कैसे हो सकता है कि शुगर स्ट्रिप ही न हो। जैसे तैसे कर नर्स कहीं से निडल लेकर आई और फिर खून निकाल चेक किया।
ईसीजी मशीन नहीं है, बाहर से करवा लो
गुरसेव सिंह की हालत बिगड़ रही थी। बेटा मिंटू रो रहा था। नर्स ने कहा कि इनकी ईसीजी करनी होगी। जब सतिंदर ने कहा कि इंतजार किसका का कर रहे हैं फिर, आप जल्दी ईसीजी कीजिए। इतना कहते ही नर्स ने जवाब दिया कि ईसीजी मशीन नहीं है। ईसीजी आपको बाहर से करवानी पड़ेगी। नर्स ने कहा कि आप बिना समय व्यर्थ किए इनको पीजीआई ले जाइए। सतिंदर ने कहा कि पीजीआई जाने को समय लगेगा और रास्ते में कुछ हो गया तो। कम से कम इन्हें फर्स्ट एड तो दो। नर्स ने एक इंजेक्शन लगाकर उनको पीजीआई ले जाने के लिए कहा।
सतिंदर ने नर्स से पीजीआई जाने के लिए अस्पताल की एंबुलेंस भेजने को कहा तो नर्स ने जवाब दिया कि अभी एंबुलेंस यहां नहीं है। जब तक यहां आएगी समय लग जाएगा। आप बुजुर्ग को अपनी पर्सनल गाड़ी में ही ले जाओ। एक गाड़ी में चार लोग नहीं जा सकते थे तो सतिंदर ने एक पड़ोसी को बाइक पर आगे भेज दिया और कहा कि आगे पीजीआई तक जितने भी नाके आए उनको पेशेंट की हालत के बारे मंे बताते रहना तब नहीं रोकेंगे। सतिंदर ने बताया कि रात साढ़े 10 बजे पीजीआई इमरजेंसी पहुंचे और बुजुर्ग का इलाज शुरू हुआ।

पीजीआई के डॉक्टर बोले-10 मिनट और देरी होती तो कुछ भी हो सकता था
कोरोना काल में कई जगह प्राइवेट संस्थानों को क्वारेंटाइन सेंटर बनाया गया है। कहीं पेशेंट्स को स्कूलों में रखा जा रहा है वहीं, जिले में एक सरकारी अस्पताल का हाल ऐसा है, जहां न तो एंबुलेंस समय पर मिलती, न ही ईसीजी होती है। डिपार्टमेंट की यह लापरवाही किसी दिन जान पर भारी पड़ सकती है। खरड़ के गुरुतेग बहादुर नगर के 69 साल के बुजुर्ग गुरसेव सिंह जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे थे।

उन्हें इलाज के लिए खरड़ अस्पताल पहुंचाया गया, मगर यहां उन्हें परेशानी के अलावा कुछ नहीं मिला। सिविल सेक्रेटेरिएट में तैनात सतिंदर सिंह बुजुर्ग के बेटे मिंटू व अन्य दो पड़ोसियों की सहायता से समय रहते उन्हें पीजीआई पहुंचा पाए। यहां इमरजेंसी में डॉक्टरों ने गुरसेव सिंह का इलाज शुरू कर दिया। डॉक्टरों ने यहां तक कह दिया था कि यदि आने में 10 मिनट और देरी हो जाती तो कुछ भी हो सकता था।

  • इमरजेंसी में हर समय डॉक्टर मौजूद होते हैं। इसके साथ ही बीपी, शुगर स्ट्रिप ,ईसीजी सारी मशीनरी मौजूद हैं। ऐसा नहीं हो सकता कि पेशेंट आया हो और बिना फर्स्ट एड भेज दिया गया हो। उन्होंने बताया कि अगर लापरवाही बरती गई है तो इसे चेक किया जाएगा। -डॉ. तरसेम सिंह, एसएमओ सिविल अस्पताल खरड़

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