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थर्ड वेव की तैयारी:बच्चों के लिए अस्पतालों में बनाए जा रहे 100 नए पीडियाट्रिक काेविड वार्ड

चंडीगढ़4 महीने पहले
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  • सेक्टर-45 में सबसे ज्यादा 50 बेड होंगे, पीजीआई में 32, जीएमसीएच-32 में 10 आईसीयू कोविड सेंटर बनेंगे

तीसरी लहर में काेराेना संक्रमण के बच्चाें पर असर काे लेकर शहर में अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। प्रशासक वीपी सिंह बदनाेर ने सभी हॉस्पिटल्स काे अभी से थर्ड वेव के लिए तैयारियां करने के निर्देश दिए हैं।

पीजीआई 32 बेडेड पीडियाट्रिक कोविड वार्ड बनाया जा रहा है यहां

पीजीआई में एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर 250 बेडेड है। यहां पर 32 बेड का पीडियाट्रिक काेविड वार्ड बनाया जा रहा है। इसमें 9 बेड का आईसीयू भी हाेगा। यह सिर्फ बच्चाें के लिए डेडिकेटेड हाेगा। इसके लिए स्टाफ काे ट्रेंड किया जा रहा है कि काेराेना पाॅजिटिव बच्चाें काे किस तरह से ट्रीट करना है।

उन्हें वजन के मुताबिक किस तरह की डाेज और वेंटिलेटर सपाेर्ट दिया जाना है। छाेटे बच्चाें के संक्रमित हाेने पर उन्हें काेई बीमारी है और उसकी सर्जरी हाेनी है ताे उसके लिए यहां पर नियाेनेटल सर्जरी वार्ड है। यहां पर 12 बेड की व्यवस्था है।

सिविल डिस्पेंसरी सेक्टर-45, 50 बेड का कोविड डेडिकेटेड पीडियाट्रिक हॉस्पिटल बनेगा

मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डाॅ. विरेंद्र नागपाल ने बताया कि सिविल हाॅस्पिटल काे काेविड डेडिकेटेड पीडियाट्रिक हाॅस्पिटल बनाया जा रहा है। यहां 50 बेड की सुविधा है। इनमें लगभग सभी बेड पर ऑक्सीजन पाइप की सुविधा है। एक फ्लाेर पर 33 बेड हैं वहां पर ऑक्सीजन की सुविधा के साथ 1 से 18 साल के माइल्ड सिम्टम बच्चाें काे रखा जाएगा। 17 बेड का आईसीयू हाेगा।

इसके लिए 8 डाॅक्टर्स की नियुक्ति की जा रही है। डाॅ. नागपाल ने बताया कि पहले फेज में मामूली सिमटम वाले बच्चाें काे रखा जाएगा। अगले 10 दिन में लेवल-1 संक्रमित बच्चाें के लिए यहां पर इलाज की सुविधा शुरू हाे जाएगी। माॅडरेट बच्चे जिनमें संक्रमण थाेड़ा ज्यादा हाेगा, अगर उन्हें वेंटिलेटर की जरूरत हाेगी। उसके लिए 17 बेड का आईसीयू बनाया जा रहा है। इसमें थाेड़ा वक्त लग सकता है। इसके लिए भी 8 डाॅक्टर्स की नियुक्ति की जा रही है। नर्सिंग स्टाफ काे ट्रेनिंग दी जा रही है।

जीएमसीएच-32 पीडियाट्रिक वार्ड में बढ़ाए जा रहे 10 आईसीयू बेड

डायरेक्टर प्रिंसिपल प्राे. जसबिंदर काैर ने बताया कि प्रशासन की ओर से काेराेना संक्रमण की थर्ड वेव के लिए अभी से तैयारियां करने को कहा गया है। पीडियाट्रिक वार्ड में करीब 10 अाईसीयू बेड बढ़ाए जा रहे हैं। पीएम केयर फंड से हमें 10 वेंटिलेटर मिल रहे हैं। उन्हें इसके लिए इस्तेमाल किया जाएगा। एक महीने से छाेटी उम्र के बच्चाें के लिए निक्कू ( नियाेनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट) में 12 आईसीयू बेड और 1 महीने से ऊपर के बच्चाें के लिए पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर के 7 बेड हैं। यहां पर इन बच्चाें का इलाज किया जाएगा।

सेक्टर-48 हाॅस्पिटल यहां 17 आईसीयू बेड, इसकी संख्या और बढ़ाई जाएगी

यहां पर 17 बेड आईसीयू के हैं। जाे इन दिनाें खाली चल रहे हैं। हम इनमें से भी कुछ बेड पीडियाट्रिक काेविड डेडिकेटड बनाए जा रहे हैं।

एक्सपर्ट की राय

क्वालिफाइड डॉक्टर्स और नर्सिंग स्टाफ की जरूरत पड़ेगी
पीडियाट्रिक आईसीयू 1 महीने से लेकर 18 साल तक बच्चाें के लिए हाेगा। इसमें वेंटिलेटर एडल्ट की तुलना में अलग हाेते हैं। वेंटिलेटर की मशीन एयर और ऑक्सीजन जाे पुश करती है। वह बच्चे के वजन के अनुसार काम करती है। इसके लिए अलग से नर्सिंग और डाॅक्टर स्टाफ अलग से क्वालिफाइड हाेते हैं। इसमें बाकी सामान जैसे ऑक्सीजन मास्क अलग-अलग साइज के, केनुलाज, अलग-अलग साइज की ट्यूब्स हाेंगी।

इसकी वजह यह है कि हर बच्चे का वजन और उम्र अलग-अलग हाेती है। बच्चाें के आईसीयू वार्ड अटेंडेंट का हाेना जरूरी हाेता है। क्याेंकि बच्चे छाेटे हाेते हैं उन्हें अपने घर का अटेंडेंट चाहिए हाेता नहीं ताे वह घबरा जाते हैं। सबसे अहम स्टाफ और क्वालिफाइड डाॅक्टर्स की जरूरत हाेती है। थर्ड वेव में क्वालिफाइड डाॅक्टर्स और नर्सिंग स्टाफ की जरूरत पड़ेगी। अभी से इसकी तैयारी करनी हाेगी।
}. नीरज कुमार, एमडी, चाइल्ड स्पेशलिस्ट

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