आईजीआई एयरपोर्ट दिल्ली के बाद रीजन का दूसरा बड़ा कार्गाे:14,000 वर्ग मीटर का कार्गो 1 नवंबर से शुरू होगा चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर

चंडीगढ़4 महीने पहलेलेखक: मनाेज अपरेजा
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कार्गो सेंटर बनाने में 12.10 करोड़ रुपए खर्च हुए। - Dainik Bhaskar
कार्गो सेंटर बनाने में 12.10 करोड़ रुपए खर्च हुए।

चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर नई दिल्ली के बाद इस रीजन का दूसरा सबसे बड़ा कार्गाे सेंटर होगा, जिसमें पेरिशेबल गुड्स भी ज्यादा समय तक स्टोर किए जा सकेंगे। इसकी बदौलत यहां से जनरल और पेरिशेबल गुड्स दूसरे शहरों और इंटरनेशनल डेस्टिनेशन पर भेजना आसान होगा। स्टोरेज की सुविधा कारोबारियों के लिए भी फायदेमंद होगी।

अभी तक 500 स्क्वेयर मीटर का ही कार्गो था, अब इसे 20 गुना बड़ा करके- 10,000 स्क्वेयर मीटर का कर दिया गया है। यह कार्गो 1 नवंबर से शुरू हो जाएगा। पहले स्टोरेज की सुविधा न होने से कारोबारियों को सामान भेजने और मंगवाने में असुविधा हाेती थी। सब्जियों जैसे पेरिशेबल आइटम दूसरे डेस्टिनेशन पर भेजने के लिए प्राेड्यूसर को फ्लाइट के समय पर ही एयरपोर्ट आना पड़ता था।

फ्लाइट में जितनी जगह हाेती था उतना ही सामान वह दूसरे डेस्टिनेशन पर भेज पाता था, अब इस दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा। नवंबर से कार्गो से सामान की आवाजाही शुरू करने के लिए यहां पर करीब 20 अतिरिक्त कर्मचारी तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा यहां पर कस्टम का स्टाफ भी तैनात रहेगा।

04 कार्गाे शेड मैनेजर सिविल मनजीत सिंह ने बताया
दाे डाेमेस्टिक गुड्स, दो इंटरनेशल गुड्स के लिए। इन शेड्स की खास बात यह है कि यहां से सामान का अराइवल और डिपार्चर अलग-अलग रास्ते से होगा। एक तरफ प्राेड्यूसर अपना सामान शेड में लाएगा, यह सामान एक्सरे हाेने के बाद, जाे भी डेस्टिनेशन और एयरलाइंस है, उस तक पहुंचा दिया जाएगा। अगर फ्लाइट में पैसेंजर लाेड कम है ताे बचे हुए स्पेस काे एयरलाइंस कार्गाे में कन्वर्ट कर सकती है।

आधुनिक इक्विपमेंट्स से लैस हाेगा कार्गाे सेंटर
एयरपोर्ट पर तैयार हाे रहे कार्गाें सेंटर में आधुनिक इक्विपमेंट लगाए जा रहे हैं। इसमें फाेर्क लिफ्ट हैवी लाेड काे भी आसानी से एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचा देगा। मैनुअल पैलेट ट्रक से सामान काे फ्लाइट में लाेड करवाना आसान हाेगा।

10 टन लीची, 8 टन चेरी, 4 टन दवाएं रोज भेजी जाती हैं बाहर
विस्तारा के मैनेजर मनाेज कुमार सिंह कहते हैं- पठानकाेट से राेजाना 10 टन लीची चंडीगढ़ से होकर बेंगलुरू, हैदराबाद और मुंबई जाती है। हिमाचल से 5 से 8 टन चेरी भी मुंबई और बेंगलुरू भेजी जाती है। जहां तक किन्नौरी सेब का सवाल है ताे यह ज्यादा नहीं जाता, क्याेंकि सेब जल्दी खराब नहीं हाेता। कभी-कभी 3 से चार टन का कन्साइनमेंट आता है। बद्दी और हिमाचल प्रदेश के अन्य डेस्टिनेशन पर बनने वाली 3 से चार टन दवाएं राेजाना यहां से देश के दूसरे हिस्सों के लिए जाती हैं।

स्टाेरेज के लिए प्राेड्यूसर से मात्र 75 से 80 पैसे प्रति किलाे चार्ज लिया जाएगा
पेरिशेबल आइटम एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए 50 से 60 रुपए किलाे के हिसाब से चार्ज करते हैं। कार्गाे सेंटर बनने के बाद अब प्लान है कि चंडीगढ़ से मिडिल ईस्ट और यूराेप काे यहां से सीधे सामान भेजा जा सके। इसके अलावा यहां के ऐसे, यलाे और रेड चिली, ब्राेकली और स्थानीय स्तर पर तैयार हाे रहे ऑर्गेनिक फूड्स को भी विदेश भेजने का प्लान है। कार्गाे पूरी तरह तैयार होने के बाद हर साल 80 हजार टन सामान भेजने का लक्ष्य है। इसके अलावा हर महीने 7 से 10 हजार टन सामान भेजा जा सकेगा। यहां पर स्टाेरेज के लिए प्राेड्यूसर से मात्र 75 से 80 पैसे प्रति किलाे चार्ज लिया जाएगा। हमारा लक्ष्य कमाना नहीं है, काराेबारियाें काे सुविधा मुहैया करवाना है।
अजय कुमार, सीईओ, चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट

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