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जिंदगी से हारा, चला दुनिया जीतने:3 बार सुसाइड की कोशिश के बाद इंडिया टूर पर साइकिल पर निकला 23 साल का नौजवान, रास्ते में चाय बेचकर करता है गुजारा

चंडीगढ़4 महीने पहलेलेखक: आरती एम अग्निहोत्री
केरला से कश्मीर मिशन के अंतर्गत निथिन 4 हजार किमी का सफर तय कर चंडीगढ़ पहुंचे हैं। इसके बाद वह मनाली और फिर लेह लद्याख होते हुए मिशन के 100वें दिन श्रीनगर पहुंचेंगे। 

देश के एक कोने से दूसरे कोने तक साइकिल का सफर करने वाले तो कई होंगे। लेकिन, साइकिल पर चाय की दुकान लेकर एक कोने से दूसरे कोने तक जाने वाले चायवाले से शायद ही कोई रूबरू हुआ होगा। हम यहां जिस चायवाले की बात कर रहे हैं वह किसी शौक के चलते नहीं बल्कि अपना खर्च निकालने के लिए ही सफर के दौरान अपनी दुकान लगाकर चाय बेचता है और फिर अगले सफर पर निकल जाता है। ये हैं 23 साल के निथिन जो चाय बेचते-बेचते ही गियरलेस साइकिल पर देश के दौरे पर निकले हैं। केरला से कश्मीर मिशन के अंतर्गत वह 4 हजार किमी का सफर तय कर चंडीगढ़ पहुंचे हैं। इसके बाद वह मनाली और फिर लेह लद्याख होते हुए मिशन के 100वें दिन श्रीनगर पहुंचेंगे।

सेक्टर 7 स्थित साइकलवर्क्स कैफे में पहुंचे निथिन ने अपने एक्सपीरियंसेस को शेयर किया। उन्होंने बताया कि वह केरल के थिरिस्सुर के रहने वाले हैं। एक रेस्टोरेंट में चाय और जूस मेकर के तौर पर काम करते थे। लेकिन, कोविड लॉकडाउन के दौरान उनकी जॉब चली गई। 10 महीने घर बैठने के बाद साइकिल पर चाय बेचने के साथ देश भ्रमण का विचार मन में आया। अपनी सेविंग से खरीदे कैमरा को बेचकर जो 10 हजार रुपए हाथ में आए, उनसे अपने भाई का आउटडेटिड साइकिल रिपेयर करवाया। एक पोर्टेबल स्टोव खरीदा। कुछ जरूरी सामान व सिर्फ 170 रुपए जेब में लेकर इस साल की पहली जनवरी को जीवन की एक नई शुरुआत की। शनिवार को उनके सफर का 51वां दिन था।

यहां यह जिक्रयोग है कि निथिन जब 6 महीने के थे तो उनके पेरेंट्स सेपरेट हो गए थे, फिर नानी ने ही निथिन को पाला। हालांकि आज वह सभी के साथ टच में हैं लेकिन कहीं-न-कहीं उनके प्यार से वंचित तो रहे ही हैं। इस बीच इनकी प्रेमिका भी साथ छोड़ गई। जिस वह इन्हें एक इमोशनल सेटबैक लगा। लगा कि कोई मुझसे प्यार नहीं करता और किसी को मेरी जरूरत भी नहीं है। ये बात साल 2017 की है। फिर निथिन ने तीन बार जहर पीकर सुसाइड करने की कोशिश भी की। लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। वे बच गए।

अस्पताल में इलाज के दौरान जब डॉक्टर ने निथिन को कैंसर पेशेंट्स से मिलवाया या हैंडीकैप्ड पेशेंट्स से मिलवाया तो इन्हें एहसास हुआ कि मेरे पास तो सब कुछ है। मैं ये काम क्यों कर रहा हूं। इसके बाद जीवन बदल गया। निथिन बताते हैं कि जब मैं ट्रैवलिंग पर निकला तो मुझे पता चला कि लोग मुझे कितना प्यार करते हैं। मेरा हर जगह स्वागत हो रहा है। मैं एक हीरो बन गया हूं। इसलिए अब लगता है कि क्या बेवकूफी मैं तब करने चला था।

पेट्रोल पंप, मंदिर या स्कूल में करते हैं सोने का इंतजाम

निथिन ने बताया कि वह फ्लो के साथ चलते हैं। सुबह 6 बजे अपने सफर की शुरुआत करते हैं और 100 किमी का सफर करने के बाद शाम 4 बजे इसे समाप्त कर देते हैं। वह एक पेट्रोल पंप, मंदिर या स्कूल को रात रहने का ठिकाना बनाते हैं और वहीं टेंट लगाकर सो जाते हैं। वहीं चाय की दुकान लगाकर दो घंटे में 10 रुपए के हिसाब से 50 चाय के कप बेच देते हैं। बताते हैं कि इस दौरान उन्हें ऐसे कुछ लोग भी मिले जो भले ही उनसे चाय नहीं पीते। लेकिन उन्हें कुछ-न-कुछ गिफ्ट कर देते हैं। सफर के दौरान ही उन्हें लोगों ने ग्लव्स, हेल्मेट, कपड़े, शूज गिफ्ट किए हैं। कुछ ने तो उन्हें रात को अपने घर भी ठहराया है।

भांगड़ा है पसंद

निथिन बताते हैं कि जब वे हरियाणा के बाद पंजाब में एंटर हुए तो एक अलग तरह की एनर्जी मिली। यहां पढ़े लिखे लोग मिले और खाना भी मजेदार लगा। निथिन ने इतना कहा ही था कि कैफे में पंजाबी गाना प्ले हुआ और निथिन उठकर भांगड़ा करने लगे। इसके बाद कैफे में मौजूद लोग भी उनके साथ नाचे।

साइकल वर्क्स कैफे में भांगड़ा करते निथिन और अन्य।
साइकल वर्क्स कैफे में भांगड़ा करते निथिन और अन्य।
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