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शहर में लगातार बढ़ रहे साइबर ठगी के मामले:क्रेडिट कार्ड की फीस को माफ करने के नाम पर 25 हजार ठगे

चंडीगढ़23 दिन पहले
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साइबर फ्रॉड के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कभी क्रेडिट कार्ड ब्लॉक करने तो कभी क्रेडिट कार्ड की फीस माफ करने के नाम पर। गत दिवस हरिओम नाम के व्यक्ति को ठगों ने ठगा था और अब उनके दोस्त मंगतराम के साथ ठगी हुई है। पीड़ित मंगतराम ने चंडीगढ़ साइबर सेल में इसको लेकर शिकायत दी है।

पीड़ित मंगतराम ने बताया कि साइबर ठगों ने इंडस बैंक कर्मी बनकर उनके क्रेडिट कार्ड की साल की फीस (4999 रुपए) को माफ करने के लिए उन्हें कॉल की। उन्होंने बैंक से क्रेडिट कार्ड बना रखा है, लेकिन कभी यूज नहीं किया। कार्ड जैसा बैंक से आया था, वैसे ही पैक करके रखा है। उन्हें फोन आया कि कार्ड की जो साल की फीस है उसे माफ करने के लिए ऑफर आया हुआ है। पीड़ित ने जवाब दिया कि वे तो अपना कार्ड बंद करवाने जा रहे हैं क्योंकि आज तक उन्होंने एक बार भी इसे यूज नहीं किया। ठग ने जवाब दिया कि आप कार्ड मत बंद करो, आपकी साल की फीस माफ कर देंगे उसके लिए कुछ औपचारिकताएं हैं तो आपको पूरी करनी होंगी।

लिंक पर क्लिक करते ही आने लगे पैसे निकलने के मैसेज...

आरोपी ने कार्ड की डिटेल मांगी तो उनको शक भी हुआ और उन्हें उससे पूछा कि यदि आप बैंक में है तो कार्ड की डिटेल तो आपके पास होगी। ठग ने बड़ी चालाकी से जवाब देते हुए कहा कि बैंक में बहुत सा काम होता है इसलिए कार्ड की डिटेल दूसरे डिपार्टमेंट के पास है आप कार्ड के पीछे लिखा नंबर बता दीजिए। पीड़ित ने बताया कि वह क्योंकि उस समय ऑफिस में थे इसलिए कार्ड उनके पास नहीं घर पर था तो उन्होंने अपने घर पर फोन करके अपनी बेटी से कार्ड की डिटेल मंगवाई और आरोपी को बता दी।

डिटेल लेने के बाद आरोपी ने कहा कि आपके नंबर पर बैंक की तरफ से लिंक आएगा, जिसको वह क्लिक कर दें तो उनकी साल की फीस माफ हो जाएगी। पीड़ित ने बताया कि उसी समय उनके मोबाइल पर लिंक आ गया जिसको उन्होंने क्लिक किया और उसके बाद अकाउंट से पैसे निकलने के मैसेज आने शुरू हो गए। आरोपी ने पहले 100 रुपए निकाले, उसके बाद 12 हजार, 10 हजार और अंत में 5000 रुपए। पीड़ित ने बताया कि उनके अकाउंट में 27030 थे, इसमें 25 हजार आरोपी ने निकाल लिए।

लिंक क्लिक नहीं करना चाहिए था: एक्सपर्ट

साइबर एक्सपर्ट डीएसपी रुपिंदर कौर सोही ने बताया कि मंगतराम को उनकी फोन पर भेजा गया लिंक क्लिक नहीं करना चाहिए था। जैसे ही मंगतराम ने लिंक को क्लिक किया तो उनके फोन का एक्सेस ठग के हाथ में चला गया, इस कारण उनको ओटीपी नंबर नहीं आया, क्योंकि उनके मोबाइल को ठग ऑपरेट कर रहा था। कभी भी बैंक कर्मी ग्राहक को फोन नहीं करता। हमेशा ध्यान रखें आपको आने वाले कॉल बैंक कर्मचारियों के नहीं, बल्कि ठगों के होते हैं।

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