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साइबर क्राइम:क्रेडिट कार्ड से 35000 की ठगी, पुलिस ने नहीं सुनी तो जांच कर पीड़ित एक दिन में ही पहुंचा ठगों तक, पैसे भी लिए वापस

चंडीगढ़15 दिन पहलेलेखक: रवि अटवाल
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  • लक्की की जुबानी... बैंककर्मी बनकर एक लड़की ने फोन किया, मैं उसकी बातों में आ गया...
  • पुलिस पर भारी आम आदमी की इन्वेस्टिगेशन...

27 मई को सेक्टर-32 के रहने वाले लक्की के साथ 35 हजार रुपए का साइबर फ्रॉड हुआ था। उनके क्रेडिट कार्ड से किसी ने 35 हजार रुपए की ट्रांजक्शन कर ली। लक्की ने पुलिस को बताया, लेकिन तुरंत कोई एक्शन नहीं हुआ।

किसी ने उनके केस में दिलचस्पी नहीं ली। ऐसे में लक्की ने केस की छानबीन खुद ही शुरू कर दी और महज एक दिन में ठगी करने वाले के ठिकाने तक पहुंच गया। आरोपियों ने लक्की को 35910 रुपए भी वापस भी कर दिए।

सीन-1: ओटीपी नंबर बताते ही हो गई 35910 की ट्रांजेक्शन

27 मई को मेरे फोन पर एक कॉल आई। कॉलर लड़की थी, उसने मुझे बातों में फंसा लिया। मुझे लगा कि बैंक से ही कॉल आई है। उसने मुझसे ओटीपी मांगा जो मैंने दे दिया। उसी वक्त क्रेडिट कार्ड से 35910 की ट्रांजक्शन हो गई। मैंने साइबर सेल को शिकायत दी, पर किसी ने मेरे केस में दिलचस्पी नहीं दिखाई। मैं, निराश होकर घर आ गया। मैंने मोबाइन चेक किया तो उस पर ट्रांजेक्शन का मैसेज तो था, पूरी डिटेल नहीं थी। मैसेज में सिर्फ पंजाब-एसटीए लिखा हुआ था।

सीन-2 : स्वर्ण सिंह का बिजली बिल भरा गया मेरे कार्ड से

मैंने पंजाब-एसटीए शब्द को इंटरनेट पर सर्च किया। सर्च करते-करते मुझे पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) की वेबसाइट मिली। मुझे लगा पंजाब-एसटीए शब्द का पीएसपीसीएल से कुछ न कुछ लिंक हो सकता है। मैंने फौरन क्रेडिट कार्ड की मोबाइल एप पर जाकर पे-इलेक्ट्रिसिटी बिल के ऑप्शन पर क्लिक किया। यहां से पता चला कि मेरे कार्ड से स्वर्ण सिंह नाम के व्यक्ति का बिजली का बिल भरा गया था।

सीन-3 : मीटर मालिक का पता लोहगढ़ का निकला

ट्रांजक्शन डिटेल में स्वर्ण सिंह के बिजली के बिल का नंबर मिल गया। पीएसपीसीएल की वेबसाइट पर जाकर स्वर्ण सिंह के बिल की कॉपी निकाली। वहां मुझे स्वर्ण सिंह का एड्रेस नहीं मिला, लेकिन इतना जरूर पता चल गया कि वह लोहगढ़, जीरकपुर का रहने वाला है।

सीन-4 : गलियों में धक्के खाए, कई स्वर्ण मिले, बाद में असली मालिक तक पहुंचा

मैं अपने दोस्तों के साथ जीरकपुर में स्वर्ण सिंह की खोज में निकल गया। यह आसान नहीं था। मुझे लोहगढ़ में कई स्वर्ण सिंह मिले, लेकिन वह शख्स नहीं मिला, जिसकी मुझे तलाश थी। आखिर में मेरी सही स्वर्ण सिंह से मुलाकात हो गई। उन्होंने बताया कि उसने 22 हजार रुपए का बिल किसी लड़के को भेजकर एक शॉप से ऑनलाइन भरवाया था। इसके बाद मैं स्वर्ण सिंह के घर से उस लड़के को साथ लेकर उस दुकान पर पहुंचा।

सीन-5 : पुलिस की धमकी दी तो आरोपी लड़कों ने पैसे वापस कर दिए

यह दुकान बिजली डिपार्टमेंट के पास ही थी। मुझे पता लगा कि उस दुकान पर किसी ने स्वर्ण सिंह से बिल के 22 हजार लेकर अपने पास रख लिए और उनका बिल मेरे क्रेडिट कार्ड से भर दिया। मैंने दुकान पर बैठे लड़कों को बताया कि उनके यहां से किसी ने मेरे कार्ड से इनका बिजली बिल भरा है। पहले तो वे माने नहीं, मैंने उन्हें पुलिस की धमकी दी और फिर वे मान गए। उन्होंने पैसे मुझे वापस किए और माफी मांगी और पुलिस में शिकायत न देने के लिए कहा।

साइबर सेल जांच करे, कितनों को ठग चुके हैं आरोपी...

पैसे लेने के बाद लक्की चंडीगढ़ साइबर पहुंचा और बताया कि उसने अपने पैसे वापस ले लिए हैं। आगे से जवाब मिला कि मामले में जांच अधिकारी आपको काॅल करेगा। हालत ये है कि लक्की के पास कोई कॉल नहीं आई। लक्की ने कहा कि मैंने इस रैकेट के बारे में साइबर सेल को जानकारी दे दी है, लेकिन उन्होंने फिर कोई एक्शन नहीं लिया। जांच होनी चाहिए कि मेरे क्रेडिट कार्ड की डिटेल इन लड़कों तक कैसे पहुंची? इस तरीके से इन्होंने कितनों को ठगा है?

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