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यूनिवर्सिटी के 100 साल:पूर्व पीएम इंदिरा गांधी के कत्ल के समय पीयू के हॉस्टल में फंसे रहे 4 दिन

चंडीगढ़15 दिन पहले
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हाल ही में एडिशनल सेक्रेटरी धर्मपाल को डिजिटल इंडिया अवाॅर्ड दिया गया। - Dainik Bhaskar
हाल ही में एडिशनल सेक्रेटरी धर्मपाल को डिजिटल इंडिया अवाॅर्ड दिया गया।

ननु जोगिंदर सिंह, पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी के 100 साल नवंबर 2021 को पूरे होने जा रहे हैं। 100 सप्ताह तक दैनिक भास्कर में पेक के सफर की कहानी। इसमें हमसफर बने एल्युमनाइज की दास्तां, दिलचस्प किस्से और कहानियां। एल्युमनाइज कैनेडा, ऑस्ट्रेलिया, यूएसए से यहां आते हैं। अपनी यादें ताजा करने के लिए

1984 की बात है जब पीयू के हॉस्टल नंबर एक में लॉ के कुछ स्टूडेंट्स दोस्त थे, जिनको मिलने के लिए गए थे। पता लगा कि प्रधानमंत्री (तत्कालीन) इंदिरा गांधी की हत्या हो गई है और कर्फ्यू लग गया। अपने कॉलेज लौटना संभव नहीं था इसलिए उसी हॉस्टल में चार दिन तक फंसे रहे। दोस्त के पास ही गेस्ट चार्जेज पर खाना खाया और चूंकि स्टूडेंट ही थे इसलिए कोई परेशानी नहीं हुई।

ये याद करते हैं पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी (पेक) से 1985 के पास आउट और इन दिनों एडिशनल सेक्रेटरी केमिकल एंड फर्टिलाइजर धर्मपाल। मूलरूप से बंगा के रहने वाले धर्मपाल ने पहले गुरु नानक इंजीनियरिंग कॉलेज लुधियाना में एडमिशन ले लिया लेकिन बाद में पेक में सीट मिलने पर इसे छोड़ दिया क्योंकि चंडीगढ़ शहर अच्छा था और उनके घर से नजदीक भी।

हाल ही में केंद्र सरकार ने उनकी अध्यक्षता में डीबीटी की टीम को डिजिटल इंडिया अवाॅर्ड 2020 दिया है। उनके कार्यकाल में फर्टिलाइजर में डिजिटल गवर्नेंस लागू की गई है। धर्मपाल बताते हैं कि एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में उनका ज्यादा ध्यान नहीं था लेकिन पढ़ाई को लेकर फोकस थे।

पेक फेस्ट में हर बार वह लोक गीत गाते हालांकि स्पोर्ट्स में उन्होंने हमेशा पार्टिसिपेट किया। पांच हजार, दस हजार मीटर रेस में हर बार विजेता रहते। रेस में उन्होंने कॉलेज और पंजाब यूनिवर्सिटी को भी रिप्रेंजेंट किया। उस समय कॉलेज पीयू से एफिलिएटेड था। उन्होंने अपनी डिग्री के दौरान एक ऐसा रोबोटिक हैंड बनाया था जिसका रिमोट कंट्रोल लेजर के जरिए किया जाना था।

उस समय ये टेक्नोलॉजी बिल्कुल नई थी। इस प्रोजेक्ट के कारण उनको अच्छे अंक मिले। कैंपस में रहते हुए ही आईआईटी के लिए एग्जाम दिया और आईआईटी दिल्ली में एमटेक की।

कुछ साल गवर्नमेंट टेलीकॉम सेक्टर में जॉब के बाद यूपीएससी क्लियर हो गया और 1988 में उन्होंने आईएएस के तौर पर जॉइन किया। कॉलेज के दिनों को बताते हुए कहते हैं कि बंक तो कॉलेज के दिनों में सभी मारते हैं लेकिन इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स इस बारे में ज्यादा रिस्क नहीं ले सकते।

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