क्रिएटिविटी:लाॅकडाउन में पहचानी अपने अंदर छिपी प्रतिभा; पेशे से ड्राइवर बलजिंदर सिंह ने पद्मश्री नेकचंद से प्रेरित हो बनाई हुबहु मूर्तियां

चंडीगढ़ (अश्विनी राणा) ​​​​​​​एक वर्ष पहले
बलजिंदर सिंह ने बताया कि वे पद्मश्री स्वर्गीय नेकचंद से बेहद प्रेरित थे। बचपन में जब भी वे राॅक गार्डन जाते तो इसी तरह की मूर्तियां बनाने के बारे में सोचा करते थे।(अश्विनी राणा).

कोरोना काल में लगे लॉकडाउन के दौरान लोगों की जिंदगियों में तो कई तरह के बदलाव आए ही, उनके अंदर छिपी प्रतिभाएं भी बाहर आईं। यहां हम बात कर रहे हैं सेक्टर 43 चंडीगढ़ निवासी बलजिंदर सिंह की जो पेशे से तो ड्राइवर हैं, लेकिन लॉकडाउन के दौरान ये अपनी उस प्रतिभा से मुखातिब हुए जिसके बारे में खुद इन्हें भी नहीं पता था।

बलजिंदर सिंह ने बताया कि वे पद्मश्री स्वर्गीय नेकचंद से बेहद प्रेरित थे। बचपन में जब भी वे राॅक गार्डन जाते तो इसी तरह की मूर्तियां बनाने के बारे में सोचा करते थे। ये तमन्ना अभी तक बरकरार थी लेकिन समय न मिल पाने के कारण बना नहीं पाते थे। लेकिन जब लॉकडाउन लगा और सभी लोग अपने घरों में कैद हो गए तो उन्होंने खुद भी अपने अंदर छिपी इस प्रतिभा पर काम किया।

नतीजतन हूबहू सवर्गीय नेकचंद जैसी ही मूर्तियां बना डालीं। इसके साथ ही घर की साजो सजावट का सामान भी बना डाला। यह सब उन्होंने वेस्ट मटीरियल से बनाया है। बलजिंदर सिंह ने बताया कि जब उन्होंने अपनी इस प्रतिभा को मूर्तियों के रूप में उकेरा तो उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। बलजिंदर कहते हैं कि प्रशासन और सरकार को उन जैसे सभी कलाकारों की कला को प्रमोट करना चाहिए। इसके साथ ही पूरे भारत में नेकचंद के नाम पर एक अवाॅर्ड भी दिया जाना चाहिए ताकि उन जैसे कलाकारों का मनोबल और बढ़ सके।