हाईकोर्ट पहुंचा चंडीगढ़ मेयर की कुर्सी का झगड़ा:AAP उम्मीदवार अंजू कत्याल सहित 3 पार्षदों ने दायर की याचिका, 19 जनवरी को सुनवाई

चंडीगढ़5 महीने पहले
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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट। - Dainik Bhaskar
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट।

चंडीगढ़ नगर निगम चुनावों में सबसे ज्यादा सीटें जीतने के बाद भी अपना मेयर न बना पाने का दर्द आम आदमी पार्टी के पार्षदों में अभी तक बना हुआ है। मेयर पद की दावेदार पार्टी पार्षद अंजू कात्याल समेत तीन पार्षद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। मांग की गई है कि मेयर के चुनावों को गैर कानूनी घोषित किया जाए। इसके अलावा राज्य चुनाव अधिकारी, नगर निगम और अन्य प्रतिवादियों को मेयर पद के ताजा चुनाव करवाए जाने के आदेश दिए जाएं। याचिका दायर करने वालों में कात्याल के अलावा प्रेम लता और राम चंद्र यादव शामिल हैं। 19 जनवरी को इस मामले में हाईकोर्ट सुनवाई करेगा।

राजनीतिक षडयंत्र रचने के आरोप

याचिका में आरोप लगाया गया है कि मौजूदा रुलिंग पार्टी के बड़े प्रभावशाली नेताओं ने निगम चुनावों में कई प्रकार के राजनीतिक षडयंत्र किए। कहा गया कि आप ने सब से ज्यादा 14 सीटें हासिल की थी और सबसे बड़ी पार्टी बन कर आई थी। दावा किया गया है कि भाजपा अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई और पार्षदों की खरीद-फिरोख्त में लग गई। हालांकि आप के किसी भी पार्षद को खरीद नहीं पाई। तिलमिलाहट में भाजपा ने और तरीकों से नतीजों को अपने हक में करने की कोशिशें शुरू कर दी, जिसमें प्रशासन की अथॉरिटी पर दबाव पाना भी शामिल था।

याचिका में कहा गया है कि कांउटिंग के दौरान पाया था कि एक बैलेट स्लिप बाईं तरफ नीचे से फटी हुई थी। इसकी जानकारी तुरंत आप द्वारा प्रेजाइडिंग अफसर को दी गई थी जो भाजपा का चुना हुआ पार्षद था। कुछ 28 पोल की हुई वोटों की गिनती के दौरान 8 वोटों में त्रुटि के चलते एक तरफ रख दिया गया था। आप साफ तौर पर 2 वोटों के फर्क से जीत गई थी। 11 वोट अंजू कात्याल और 9 भाजपा के कैंडिडेट को पड़ी थी।

भाजपा और अफसरों की ट्रिक के चलते बनी भाजपा की मेयर

आप पार्षदों ने कहा कि सारी प्रकिया की वीडियोग्राफी हुई थी और जिससे साफ देखा जा सकता है कि पहले संबंधित अथॉरिटी ने वैद्य 28 वोटों को लिया था और खराब वोटों को एक तरफ रख दिया था जो 8 थे और जिन्हें लेकर आप और भाजपा के प्रतिनिधि पहले ही विरोध जता चुके थे। प्रेजाइडिंग अफसर और डिविजनल कमिश्नर ने एक और ट्रिक चलते हुए तानाशाही तरीके से उन 8 वोट्स पर विचार करना शुरू कर दिया। इस दौरान प्रेजाइडिंग अफसर ने फटी हुई वोटर स्लिप को भी भाजपा को दिया हुआ बता उसे कांउटिंग में जोड़ दिया।

इसके बाद 14-14 पर टाई हो गया। इसके बाद पेटिशनर के हक में दिए गए एक वोट पर कहा कि उसके पीछे एक निशान बनाया हुआ है जो दिखाया नहीं गया। इसे तुरंत खारिज कर दिया गया और भाजपा कैंडिडेट को एक वोट के अंतर से विजेता ऐलान कर दिया।

कुर्सी से उठाने की पूरी कोशिशें की थी आप ने

बीते 8 जनवरी को हुए निगम चुनावों में जब भाजपा कैंडिडेट सरबजीत कौर को मेयर ऐलान किया गया था तो आप पार्षदों ने इसका पुरजोर विरोध कर सरबजीत को मेयर की कुर्सी से उठाने की कोशिशें तक की थी। हाउस में तनाव को लेकर मौके पर पुलिस को बुला लिया गया था। यहां तक की नौबत हाथापाई तक पहुंचने वाली थी। भारी हंगामें के बीच सरबजीत कौर ने कुर्सी संभाले रखी थी।