रामलाल पर एक और केस दर्ज:आरोप-एफआईआर से नाम निकालने के लिए तहसीलदार से 6 करोड़ ठगे; न नाम निकला और न ही पैसे मिले

चंडीगढ़7 महीने पहलेलेखक: विनीत राणा
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प्रॉपर्टी डीलर और फाइनेंसर रामलाल के मुश्किलें लगातार बढ़ी जा रही हैं। - Dainik Bhaskar
प्रॉपर्टी डीलर और फाइनेंसर रामलाल के मुश्किलें लगातार बढ़ी जा रही हैं।

प्रॉपर्टी डीलर और फाइनेंसर के खिलाफ सेक्टर-34 पुलिस थाने में धोखाधड़ी व षड्यंत्र रचने की धाराओं के तहत एक और एफआईआर दर्ज हो गई है। यह एफआईआर रिटायर्ड तहसीलदार कम डिस्ट्रिक्ट रेवेन्यू ऑफिसर पंचकूला निवासी नरेश कुमार की शिकायत पर दर्ज हुई है। एसएसपी कुलदीप चहल ने बताया कि पुलिस को रिटायर्ड डीआरओ ऑफिसर ने शिकायत दी थी। जिस पर केस दर्ज किया गया है। शिकायत में नरेश कुमार ने बताया कि विजिलेंस में दर्ज एफआईआर के बाद घरवालों का नाम न उछले, इसलिए अपने बचाव में हाथ-पैर मारने लगा।

रेवाड़ी में रहने वाले एक दोस्त सतीश यादव ने आगे अपने दोस्त भूप सिंह से मिलवाया। भूप सिंह चंडीगढ़ निवासी रामलाल को जानते थे। फोन पर दोस्तों ने चंडीगढ़ निवासी रामलाल से बात करवाई। रामलाल ने अपने घर पर बुलाया और कहा कि विजिलेंस पंचकूला में दर्ज एफआईआर से उनका नाम निकलवा देंगे। लेकिन इसके लिए 6 करोड़ रुपए लगेंगे। पीड़ित ने शिकायत में बताया कि गुड़गांव के गांव सैनीखेदा में उनकी मां के नाम पर दो कनाल का प्लॉट था।

इसे उन्होंने सस्ते दाम में 3 करोड़ में बेच दिया। 3 करोड़ की पहली किस्त देने के बाद भी उनका नाम एफआईआर में स्टैंड कर रहा था। इस पर रामलाल ने कहा कि अमाउंट पूरी देने पर एफआईआर से नाम हटेगा। इसके बाद पत्नी के नाम पर फेज-2 गुड़गांव में 215 स्क्वेयर यार्ड का प्लॉट बेच। इसके बाद बाकी तीन करोड़ भी अपने दोनों दोस्तों के सामने रामलाल को सौंप दिए।

रामलाल की अवमानना याचिका पर एसएचओ को नोटिस जारी
5 करोड़ की ठगी के आरोपी रामलाल की अदालत की अवमानना याचिका पर बुधवार को हाईकोर्ट ने एसएचओ को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जस्टिस हरिंदर सिंह सिद्धू ने मामले पर 20 दिसंबर के लिए अगली सुनवाई तय की है। रामलाल ने याचिका में एसएसपी कुलदीप सिंह चहल और एसएचओ नरिंदर पटियाल के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई किए जाने की मांग की है। कहा था कि पुलिस ने गैरकानूनी तरीके से उसे गिरफ्तार किया है।

इधर, रिमांड से बचने के लिए आरोपी ने दी याचिका, जज ने की खारिज
रामलाल ने डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में रिवीजन पिटीशन दायर की थी। लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। रामलाल ने कोर्ट में दलील दी कि उसे गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तार किया गया था और फिर ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने भी 7 दिनों का रिमांड दे दिया। रामलाल ने मजिस्ट्रेट के रिमांड ऑर्डर को खारिज करते हुए ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजने की मांग की थी। पुलिस ने कोर्ट में जवाब दिया कि रामलाल से करोड़ों की प्रॉपर्टी के कागजात मिले हैं, जिनकी जांच चल रही है। उससे इस बारे में पूछताछ जरूरी है।

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