कैप्टन ने शुरू किए सियासी दांव:भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्‌डा से मिलने शनिवार दिल्ली जाएंगे अमरिंदर; सीट शेयरिंग पर होगी बात

चंडीगढ़6 महीने पहले
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कृषि कानूनों की वापसी होते ही पूर्व CM कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सियासी दांव खेलने शुरू कर दिए हैं। शनिवार को वह दिल्ली जा रहे हैं। वहां उनकी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा से मुलाकात होगी। इस दौरान वे भाजपा के साथ पंजाब में 117 सीटों के बंटवारे पर चर्चा करेंगे।

खास बात यह है कि कैप्टन का दौरा उसी दिन है, जब दिल्ली में किसान आंदोलन को खत्म करने पर संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) अंतिम फैसला लेगा। कैप्टन की बढ़ी सियासी गतिविधि से किसान आंदोलन के खत्म होने के भी संकेत मिल रहे हैं।

CM रहते अमरिंदर कई बार पीएम मोदी को मिल चुके हैं।
CM रहते अमरिंदर कई बार पीएम मोदी को मिल चुके हैं।

नड्‌डा से पहली मुलाकात
कैप्टन अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री रहते दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलते रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल से भी उनकी मुलाकात होती रही। हालांकि वह कभी भाजपा के संगठन नेताओं से नहीं मिले। इस वजह से भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्‌डा से उनकी पहली मुलाकात होगी। हालांकि PM और गृह मंत्री से मुलाकात में भी उन पर कांग्रेस ने आरोप लगाए कि वह भाजपा से मिले हुए थे।

BJP से नजदीकी बढ़ाते हुए कैप्टन हरियाणा के CM मनोहर लाल से मिले।
BJP से नजदीकी बढ़ाते हुए कैप्टन हरियाणा के CM मनोहर लाल से मिले।

कैप्टन ने कहा- मैं CM चेहरा नहीं
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि वह BJP और अकाली दल से अलग हुए नेताओं से गठबंधन कर रहे हैं। वह इस गठबंधन का CM चेहरा नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि गठबंधन का पहला फोकस जीत पर होगा। उसके बाद आगे की बातें होंगी।

कैप्टन ने यह भी कहा कि कई कांग्रेसी उनके साथ आने वाले हैं, लेकिन चुनाव आचार संहिता के बाद वह उनकी पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस में शामिल होंगे। ताकि सरकार विकास कार्य न रोके और उनके खिलाफ राजनीतिक बदलाखोरी की कार्रवाई न करे।

बागी अकाली भी आएंगे साथ
कैप्टन अमरिंदर सिंह और भाजपा के साथ बागी अकाली नेता भी आ सकते हैं। सुखदेव सिंह ढींढसा ने कहा कि पंजाब में सियासत लगातार बदल रही है। यह अच्छी बात है कि केंद्र ने किसानों की बात सुनी और कृषि कानून वापस ले लिए। वह प्रधानमंत्री का धन्यवाद करते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र को किसानों की बाकी मांगे भी सुननी चाहिए।

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