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  • Bangkok Police Arrested Shubham Due To Travel Company's Mistake, Spent 18 Hours In Jail, Treated Like Animals, Did Not Even Get Water; Commission Imposed 50 Thousand Damages On The Company.

भयावह था वो मंजर:ट्रैवल कंपनी की गलती से शुभम को बैंकॉक पुलिस ने किया अरेस्ट, जेल में 18 घंटे बिताए, पानी तक नहीं मिला; कंपनी पर कमीशन ने लगाया 50 हजार हर्जाना

चंडीगढ़4 महीने पहले
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शुभम की तरफ से एडवोकेट मिनाल गर्ग और राहुल अग्रवाल ने केस फाइल किया। - Dainik Bhaskar
शुभम की तरफ से एडवोकेट मिनाल गर्ग और राहुल अग्रवाल ने केस फाइल किया।

23 साल के शुभम ने थाईलैंड जाने से पहले पूरी प्लानिंग कर रखी थी। पूरा शेड्यूल था कि वह चार दिन पूरा एन्जॉय करेंगे, लेकिन ये नहीं पता था कि वहां उन्हें जेल में एक कैदी की तरह रहना पड़ेगा। शुभम को 2019 में बैंकॉक पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था और उन्हें 18 घंटे तक एयरपोर्ट जेल में कैद रखा। वहां उनके साथ जानवरों सा सलूक हुआ था। आखिर में उन्होंने इंडिया कॉल कर अगले दिन रिटर्न फ्लाइट टिकट करवाई और फिर उन्हें जेल से छोड़ा गया।

जेल में रखने के लिए भी उनसे पुलिस ने 1070 थाई बाठ यानी लगभग 2500 रुपए लिए गए थे। हालांकि शुभम की इसमें कोई गलती नहीं थी। उन्हें केवल होटल की रिजर्वेशन न होने के कारण अरेस्ट किया गया था। जाने से पहले उन्होंने मेक माई ट्रिप कंपनी की वेबसाइट से बुकिंग करवा रखी थी। इंडिया आकर उन्होंने कंपनी के खिलाफ स्टेट कंज्यूमर कमीशन में केस फाइल किया और अब वे केस जीत गए हैं। कमीशन ने कंपनी पर 50 हजार रुपए हर्जाना लगाया है और उन्हें जेल, फ्लाइट और अन्य जगहों पर खर्च हुए 42 हजार 308 रुपए रिफंड करने के भी निर्देश दिए हैं।

शुभम की तरफ से एडवोकेट मिनाल गर्ग और राहुल अग्रवाल ने केस फाइल किया। उन्होंने बताया कि ये सब ट्रैवल कंपनी की गलती से हुआ था। उन्होंने शुभम से पैसे तो ले लिए लेकिन उसकी होटल रिजर्वेशन कन्फर्म नहीं की। बैंकॉक में वीजा ऑन अराइवल के लिए ट्रैवलर को रिटर्न फ्लाइट टिकट और होटल की रिजर्वेशन दिखानी जरूरी थी। वहां इमिग्रेशन ऑफिसर ने उस होटल में कॉल कर पूछा तो आगे से जवाब मिला कि शुभम की तो बुकिंग हुई ही नहीं थी।

शुभम की आपबीती...मैं इतना कभी जिंदगी में नहीं रोया था

15 नवंबर 2019 को सुबह सवा 8 बजे दिल्ली से मेरी फ्लाइट थी। थाईलैंड टाइमिंग के मुताबिक मैं दोपहर 3 बजे बैंकॉक एयरपोर्ट पहुंचा। वहां मुझे इमिग्रेशन ऑफिसर ने रोका और रिटर्न टिकट और होटल रिजर्वेशन चेक करवाने को कहा। मैं ये सब बुकिंग पहले से करवा कर गया था। लेकिन मुझे तब झटका लगा जब मुझे पता चला कि होटल रिजर्वेशन तो हुई ही नहीं है।

इमिग्रेशन ऑफिसर ने मुझे पकड़ा और एयरपोर्ट जेल भेज दिया। जेल बहुत ही भयानक थी, वहां काफी गंदगी थी। वहां कई देशों के लोगों को कैद किया गया था। मेरे लिए वहां एक मिनट भी गुजारना मुश्किल था। मुझे पहले तो पानी तक नहीं दिया गया था। मेरा फोन भी स्विच ऑफ हो गया। मैंने किसी से चार्जर मांगा लेकिन वहां हर चीज डॉलर में बिक रही थी।

वाईफाई पासवर्ड 2 डॉलर, साबुन 5 डॉलर और अन्य चीजें भी इसी तरह जेल के अंदर के लोग ही बेच रहे थे। वहां एक इंडियन ने मेरी मदद की और मुझे वाईफाई का पासवर्ड दिया। जिसके बाद मैंने इंडिया में अपने घरवालों को पूरी घटना के बारे में बताया। मैं उस रात खूब रोया। इतना मैं जिंदगी में भी कभी रोया नहीं था। मैंने 18 घंटे तक उस नर्क में बिताए। एक हॉल में 25-30 कैदियों को रखा हुआ था।

मैंने सारी रात कुछ नहीं खाया और जमीन पर ही सोया। अगले दिन मेरी वापसी की टिकट जब कनफर्म हुई तो मुझे जेल से बाहर निकाला गया। जेल से निकालकर मुझे फ्लाइट तक भी जानवर की तरह पकड़ कर ले जाया गया। सभी पैसेंजर्स के बाद में मुझे फ्लाइट में बिठाया गया। मैं घर आकर सदमे में चला गया था। तीन दिन तक मैंने खुद को कमरे में बंद रखा। किसी से बात नहीं की। बड़ी मुश्किल से मैं नॉर्मल हुआ था।