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आत्महत्या:आईसीआईसीआई बैंक के पूर्व कर्मचारी ने खुदकुशी की, नौकरी जाने से थे परेशान; सुसाइड नोट में लिखे कई अफसरों के नाम

चंडीगढ़8 महीने पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • डेढ़ करोड़ की ट्रांजेक्शन को लेकर 10 महीने पहले बैंक ने कर दिया था टर्मिनेट, 3 दिन से घर से थे गायब

(अमित शर्मा) ​ मनीमाजारा स्थित आईसीआईसीआई बैंक की ब्रांच के डिप्टी ब्रांच मैनेजर रहे लवकेश शर्मा ने पंचकूला सेक्टर-10 स्थित शिराज होटल में सुसाइड कर लिया। लवकेश ने जहरीला पदार्थ खाकर सुसाइड किया। कई दिनों से गायब लवकेश की तलाश कर रहे परिवार वाले जब चंडीगढ़ पुलिस के साथ होटल में गए, तो कमरा अंदर से बंद था। लॉक तोड़ा गया तो पता चला कि लवकेश ने सुसाइड कर लिया है।

मौके से एक डायरी मिली है, जिसमें लिखे सुसाइड नोट में लवकेश ने बैंक के कई अधिकारियों को सुसाइड करने का जिम्मेदार बताया है। बैंक के कई अधिकारियों पर सेक्टर-5 पुलिस थाने में आईपीसी की धारा 306, 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है। लवकेश चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एरिया के रहने वाले थे। करीब 10 महीने पहले आईसीआईसीआई बैंक में डीबीएम पद पर जॉब करते थे। वे इस बैंक में पिछले 14 साल से नौकरी कर रहे थे। 10 महीने पहले ही उन्हें टर्मिनेट कर दिया गया था, जिसके बाद से वे डिप्रेशन में थे। 10 अक्तूबर को लवकेश अपने घर पर यह कहकर निकले थे कि नई नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जा रहा हूं।

डायरी में रखा था नोट...

इस दाग के साथ नहीं जी सकता, अब पापा से मिलने का समय हो चुका है...

मेरी मां और बेटी मुझसे बहुत प्यार करते हैं। मैं आईसीआईसीआई बैंक लिमिटेड में काम करता था, जहां मेरे सीनियर मुझ पर बहुत प्रेशर डालते थे। मेरे सीनियर ने मुझे जॉब से निकालने का प्लान बनाया था। आरपीसी की एक ट्रांजेक्शन करवाई, जो गलत थी। जो डेढ़ करोड़ अमाउंट की ट्रांजेक्शन थी, उसकी वेरीफिकेशन राकेश बंसल ने की थी।

2006 से बैंक में हूं, लेकिन अब इतना ज्यादा प्रेशर डाला गया कि मैं नींद की दवाई लेता था। इन सभी ने मिलकर मेरे से गलत ट्रांजेक्शन करवाई है। अमित धालीवाल पर ब्लाइंड ट्रस्ट किया था, क्योंकि वह इतने सालों से साथ था। दोस्त था। उसके कहने पर ही ये ट्रांजेक्शन की थी। उसने ही कहा था कि ये ट्रांजेक्शन करने के बाद वर्क प्लेस छोड़कर तुम घर चले जाओ।

इस दौरान मेरी गलती है कि मैंने ट्रांजेक्शन चेक नहीं की। मैंने मौके पर कुछ लोन और कार्ड की पेमेंट कर दी थी। मेरे सीनियर को कोई मौका चाहिए था। उसने ही सारा फ्रॉड करवाया था, क्योंकि वह पहले भी ऐसे मौके में रहता था। जब फ्रॉड का बैंक को पता चला तो मैं अगले दिन छुट्टी पर था। इसके बाद जब मैं ऑफिस पहुंचा तो लेटर लिखने के लिए कहा गया।

उस दौरान अमित ने कहा था कि ये इंटरनल चेक के लिए था। तुम मेरा नाम भी लिख देना। लेकिन उसके बाद वह मुकर गया कि ऐसा कुछ भी नहीं था। इस वजह से मुझ पर और राकेश पर सवाल खड़े हुए। इसके बाद मुझे जबरदस्ती टर्मिनेट किया गया। बैंक से निकाला गया, जबकि बैंक की पॉलिसी है कि अगर ऐसा कुछ होता है तो वेरीफिकेशन करने वाले पर एक्शन होता है।

राकेश पर एक्शन नहीं लिया गया। वह अभी भी बैंक में जॉब कर रहा है। राणा ने मुझे जबरदस्ती टर्मिनेशन लेटर पकड़ाया था। 14 सालों से यहां काम किया, अब 10 महीनों से जॉब लेस हूं। मेरे परिवार वाले, मेरे रिश्तेदार भी यही सोचते थे कि मैंने ये गलत काम किया है। अब मैं इस धब्बे के साथ जी रहा था। मैं ऐसी जिंदगी नहीं जी सकता हूं। इसलिए मम्मी मैं चला, मेरा पापा से मिलने का समय हो चुका है। मेरी चिता को मेरी तीनों बेटियां अग्नि दें।

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