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मूल की लड़ाई:कृषि कानूनों को रद्द और चंडीगढ़ में पंजाबी भाषा को पहला दर्जा दिलाने के लिए हुआ बड़ा आंदोलन

चंडीगढ़5 महीने पहले
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इस दौरान किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा- कृषि कानूनों में कुछ भी सफेद नहीं, काला ही काला है। - Dainik Bhaskar
इस दौरान किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा- कृषि कानूनों में कुछ भी सफेद नहीं, काला ही काला है।
  • सेक्टर 30 के मक्खन शाह लोबाना भवन से रोष मार्च की हुई शुुरुआत
  • शहर के अलग-अलग भागों से होता हुआ पहुंचा सेक्टर 22 के गुरुद्वारा

कृषि बिलों के विरोध और चंडीगढ़ में पंजाबी भाषा को पहला दर्जा दिलाने के लिए शनिवार को एक रोष मार्च निकाला गया। यह रोष मार्च सेक्टर 30 के मक्खन शाह लोबाना भवन से शुरू होकर शहर के अलग-अलग भागों से होता हुआ सेक्टर 22 के गुरुद्वारा साहिब पहुंचा। इसमें चंडीगढ़ समूह गुरुद्वारा प्रबंधक संगठन, पेंडू संघर्ष कमेटी चंडीगढ़, पंजाबी लेखक सभा चंडीगढ़, ट्रेड यूनियन, नौजवान सभा, बुद्धिजीवी, लेखक, कवि और वकील शामिल थे।

UT के तौर पर चंडीगढ़ का गठन एक नवंबर को हुआ था। तब बिना किसी नोटिफिकेशन या नियम के पंजाबी भाषा को चंडीगढ़ की भाषाओं से हटा दिया गया था। तभी से चंडीगढ़ पंजाबी मंच और करीब 8 अलग-अलग साहित्य संगठन इस भाषा को इसकी मूल पहचान दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसे लेकर समय-समय पर प्रोटेस्ट किए गए हैं और आज एक बड़ा आंदोलन था।

चंडीगढ़ में पंजाबी भाषा लागू करने के पोस्टर लेकर खड़ी युवतियां।
चंडीगढ़ में पंजाबी भाषा लागू करने के पोस्टर लेकर खड़ी युवतियां।

चंडीगढ़ पंजाबी मंच के प्रधान सुखजीत सिंह सुक्खा के मुताबिक जिस तरह भारत की केंद्र सरकार देश के लोगों को आर्थिक तौर पर लूट रही है, उसी तरह सामाजिक और सभ्याचारक तौर पर भी यहां रहने वाली माइनाॅरिटी कौमों को भी लूट रही है।इसी लूट का एक नतीजा है कि किसी राज्य से उसकी राजधानी छीनकर वहां लोगों की भाषा को बेदखल कर देना। ऐसा ही चंडीगढ़ में देखने को मिल रहा है जहां चंडीगढ़ भाषा को पहले प्रशासन से और फिर स्कूलों से भी खत्म किया जा रहा है। वे आगे बोले, यह सब चंडीगढ़ में काम करने वाले अफसरों का किया धरा है। उन्होंने अपनी सहूलियत के लिए अंग्रेजी भाषा को नंबर एक पर रख लिया और पंजाबी भाषा का नामो निशान मिटा दिया। जबकि चंडीगढ़ पंजाब का ही हिस्सा था और पंजाब की राजधानी भी है।

इस दौरान किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा- कृषि कानूनों में कुछ भी सफेद नहीं,काला ही काला है। यह सिर्फ किसानों का ही नहीं रोटी खाने वालों का संघर्ष भी है। इस कानून से कॉरपोरेट का कब्जा हो जाएगा। PDS सिस्टम खत्म हो जाएगा। प्राइवेट मंडी सरकारी मंडी को फेल कर देगी। सरकारी मंडी फेल होने पर MSP भी खत्म हो जाएगी।

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