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DAV कॉलेज में एतिहासिक जश्न:यहीं से पढ़े हैं स्टार जेवेलिन थ्रोअर नीरज,NIS पटियाला और आर्मी में सूबेदार के लिए भी यहीं से हुआ था सिलेक्शन,पंचकूला में कोच को उठाया गोद में

चंडीगढ़2 महीने पहले
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कॉलेज के स्टूडेंट्स, टीचर्स तो इकट्‌ठा हुए ही, वरिष्ठ भाजपा नेता संजय टंडन और ओलिंपिक खेलकर लौटीं अंजुम मोदगिल भी खुद ही कॉल करके इस सेलिब्रेशन का हिस्सा बनने पहुंच गए। - Dainik Bhaskar
कॉलेज के स्टूडेंट्स, टीचर्स तो इकट्‌ठा हुए ही, वरिष्ठ भाजपा नेता संजय टंडन और ओलिंपिक खेलकर लौटीं अंजुम मोदगिल भी खुद ही कॉल करके इस सेलिब्रेशन का हिस्सा बनने पहुंच गए।

जेवेलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने जैसे ही गोल्ड भारत के नाम किया, DAV सेक्टर 10 में जश्न का माहोल बन गया। कॉलेज के स्टूडेंट्स, टीचर्स तो इकट्‌ठा हुए ही, वरिष्ठ भाजपा नेता संजय टंडन और ओलिंपिक खेलकर लौटीं अंजुम मोदगिल भी खुद ही कॉल करके इस सेलिब्रेशन का हिस्सा बनने पहुंच गए। हो भी क्यों न, नीरज के गोल्ड जीतने की सभी को खुशी ही इतनी थी। कॉलेज के प्रो. अमन मान के मुताबिक यूं तो नीरज 1 साल ही इस कॉलेज के स्टूडेंट रहे हैं। पर इसी दौरान सूबेदार के तौर पर उनका सिलेक्शन आर्मी में हुआ। NIS पटियाला के लिए भी वे यहीं से सिलेक्ट हुए थे और उसके बाद कॉलेज छोड़ पटियाला रहने लगे।

कॉलेज में सेलिब्रेशन।
कॉलेज में सेलिब्रेशन।

शनिवार शाम कॉलेज का नजारा देखने लायक था। ढोल की थाप और पंजाबी बोलियों पर सब भंगड़ा डालते नजर आए। भाजपा नेता संजय टंडन ने भी भंगड़ा डाला। भंगड़ा डालने से पहले बोले-हालांकि भाजपा की जीत पर मैंने कभी भंगड़ा नहीं डाला लेकिन आज डाल देता हूं। चूंकी अंजुम भी इसी कॉलेज की स्टूडेंट रही हैं, उन्होंने कहा- उनकी नीरज से कई बार मुलाकात हुई है। टोक्यो में भी दो बार वे उनसे मिली लेकिन शेड्यूल अलग-अलग होते थे तो ज्यादा बात नहीं हुई। वे बहुत अच्छे इंसान है और उनकी जीत पर पूरे देश को गर्व है। अंजुम ने कहा कि नीरज के गोल्ड के बाद देश में स्पोर्ट्स के प्रति लोगों का नजरिया बदलेगा। मैं खुद उनसे काफी इंस्पायर हुई हूं।

फाइनली जब गोल्ड भारत की झोली में आया तो वहां मौजूद खिलाड़ियों ने कोच नसीम को अपनी गोद में उठा लिया।
फाइनली जब गोल्ड भारत की झोली में आया तो वहां मौजूद खिलाड़ियों ने कोच नसीम को अपनी गोद में उठा लिया।

कोच को उठाया गोद में

वहीं पंचकूला के ताऊ देवी लाल स्टेडियम में भी जश्न मना। नीरज चोपड़ा ने 6 साल यहीं से कोच नसीम अहमद से ट्रेनिंग ली थी। इसलिए दूसरे खिलाड़ियों के लिए यहां बड़ी स्क्रीन लगाई गई थी। पूरे मैच के दौरान यहां तिरंगा हाथ में लेकर हूटिंग होती रही और सब शुरुआत से ही एक दूसरे को मुबारकबाद देने लगे। लेकिन फाइनली जब गोल्ड भारत की झोली में आया तो वहां मौजूद खिलाड़ियों ने कोच नसीम को अपनी गोद में उठा लिया और उनके गले में फूलों के हार डाल दिए। इसके बाद सभी ने एक दूसरे का मुंह भी मीठा करवाया। कोच नसीम ने कहा कि नीरज का मेडल दूसरों को इंस्पायर करेगा। ये हमारे लिए गर्व की बात है कि उसने पंचकूला से ट्रेनिंग की है। उसकी और हमारी मेहनत का रंग ही है जो हमें गोल्ड मिला। उसने अपना द बेस्ट दिया और यही वो करने गया था।

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