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हरियाणा में निकाय चुनाव की तैयारी:भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओपी धनखड़ ने ली पार्टी पदाधिकारियों की बैठक, 15 दिसंबर तक देना होगी सर्वे रिपोर्ट

चंडीगढ़2 महीने पहले
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भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओपी धनखड़ पार्टी पदाधिकारियों से चुनाव को लेकर चर्चा करते हुए। - Dainik Bhaskar
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओपी धनखड़ पार्टी पदाधिकारियों से चुनाव को लेकर चर्चा करते हुए।

तीन कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा होने के बाद अब हरियाणा में भाजपा ने निकाय चुनाव के लिए कमर कसना शुरू कर दी है। बुधवार को नगर परिषद व नगर पालिकाओं के चुनाव को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ओपी धनखड़ ने स्थानीय निकाय प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों की बैठक ली। यह बैठक परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा के आवास पर हुई।

पार्टी पदाधिकारियों को 15 दिसंबर तक पूरा करना होगा सर्वे

बैठक में ओपी धनखड़ ने पार्टी पदाधिकारियों को निर्देश दिए कि नगर परिषद व नगर पालिका चुनावों को लेकर कमर कस लें। हर जिले के लिए दो पदाधिकारियों की एक टीम बनाई जाएगी। यह टीम चुनाव को लेकर सर्वे करेगी। चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों का सर्वे करेंगी और चुनावी माहौल के संबंध में अपनी रिपोर्ट देंगी। पार्टी पदाधिकारियों द्वारा यह सर्वे 15 दिसंबर से पहले पूरा किया जाएगा। इसके बाद पार्टी पदाधिकारियों की 15 दिसंबर को दोबारा मीटिंग होगी, जिसमें सर्वे रिपोर्ट के आधार पर मंथन होगा। बैठक में पार्टी पदाधिकारियों को अपने क्षेत्र में जाकर लोगों को सरकार द्वारा विकास कार्यों की जानकारी देने के निर्देश दिए।

हरियाणा में 19 नगर परिषद व 58 नगर पालिकाएं

प्रदेश में 19 नगर परिषद व करीब 58 नगर पालिकाएं है। इसमें से कुछ को छोड़कर सभी का कार्यकाल पूरा हो चुका है। कार्यकाल पूरा हुए करीब 6 महीने हो गए, लेकिन हरियाणा सरकार ने किसान आंदोलन के चलते माहौल सकारात्मक न होने के कारण चुनाव करवाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। कार्यकाल खत्म होने के बाद संबंधित एसडीएम को नगर परिषद व नगर पालिकाओं का प्रशासक नियुक्त किया गया है।

अबकी बार होगा अध्यक्ष का सीधा चुनाव

हरियाणा सरकार ने नगर निगम की भांति ही नगर परिषद व नगर पालिकाओं के अध्यक्ष का चुनाव भी सीधे ही करवाने का फैसला लिया हुआ है। इस संबंध में सभी नगर परिषद व नगर पालिकाओं के चेयरमैन और वार्ड आरक्षण का डॉ भी निकाल दिया है। यह ड्रॉ करीब 6 महीने पहले निकाला जा चुका है।

शहरी मतदाताओं में भाजपा की अच्छी पैठ

प्रदेश में पंचायती चुनावों का मामला अभी पंजाब और हरियाणा हाइकोर्ट में लंबित है। शहरी मतदाताओं में भाजपा की अच्छी पैठ है। ऐसे में सरकार पंचायती चुनावों से पहले शहरी निकाय के चुनाव करवा सकती है। ताकि पंचायती चुनावों से पहले माहौल अपने पक्ष में बनाया जा सके।

किसान आंदोलन के कारण गांवों में भाजपा का विरोध

कृषि कानूनों के कारण गांवों में भाजपा का विरोध है। इस विरोध के बीच बीते माह अक्टूबर में ऐलनाबाद में उपचुनाव हुए, जिसमें इनेलो ने दोबारा जीत हासिल की। वहीं भाजपा उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहा। शहर में भाजपा का पहले की तरह ही प्रदर्शन बेहतर था। ऐसे में अब जब कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा हो चुकी है तो पार्टी को अब किसानों के विरोध की संभावनाएं कम नजर आ रही हैं। इसलिए भाजपा ने नगर परिषद व नगर पालिका के चुनाव करवाने के लिए पार्टी पदाधिकारियों से फीडबैक लेना शुरू कर दी है।

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