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कोरोना इफेक्ट:बुक्स की सेल 25 से 50% तक घटी, वजह-पुरानी किताबें एक्सचेंज कर रहे पेरेंट्स

चंडीगढ़9 दिन पहलेलेखक: रजनी शर्मा
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  • स्कूलों में नया सेशन शुरू, लेकिन पेरेंट्स बच्चों के लिए नई किताबें नहीं ले रहे, ऑनलाइन स्टडी के कारण किताबें ज्यादा यूज ही नहीं हुईं

स्कूलों में नया सेशन शुरू होते ही कई पेरेंट्स ने बच्चों के लिए नई बुक्स लेने से तौबा कर ली है। दो वजह हैं एक किताबों का महंगा होना और दूसरी बड़ी वजह यह है कि कोरोनाकाल में ऑनलाइन क्लासेज चलने से किताबों का कुछ बिगड़ा ही नहीं। ज्यादातर बच्चों की किताबें ज्यों की त्यों पड़ी हैं। इसलिए कई पेरेंट्स ने उन बच्चों से किताबें लेनी शुरू कर दी हैं, जो सीनियर क्लास में प्रमोट हो रहे हैं।

लगभग अब हर स्कूल में ऑनलाइन क्लासेज शुरू हो गई है। पेरेंट्स ने अपने लेवल पर सोशल मीडिया ग्रुप्स में स्कूल बुक्स का एक्सचेंज ऑफर शुरू किया। ट्राईसिटी में यह ट्रेंड बहुत तेजी से बढ़ रहा है। पेरेंट्स का कहना है कि किताबें एक्सचेंज करके पढ़ना कोई बुरी बात नहीं है। शिवानी का बेटा क्लास-4 से क्लास-5 में गया है। उनका कहना है कि हमारा सोशल मीडिया ग्रुप बना हुआ है।

पेरेंट्स ने पहल की कि क्यों न स्कूल बुक्स एक्सचेंज की जाएं। तो ग्रुप चैट में मैसेज डालना शुरू किया। रिस्पॉन्स अच्छा आया। वहीं, रिया का कहना है कि बेटी जूनियर से सीनियर क्लास में गई तो मैंने उसकी टीचर्स को पुरानी बुक्स के लिए अप्रोच किया। उन्होंने कुछ पेरेंट्स के मोबाइल नंबर दिए। कोविड की वजह से हमें इन खर्चों को बचाना चाहिए। बेटी ने शुरू में थोड़ा ना की, लेकिन जब मैंने उसे शेयर किया कि उसके स्कूल मेट्स भी ऐसा कर रहे हैं तो वह मान गई।

किताबें बदलने का ऑफर चल निकला : रीना

मानव मंगल स्मार्ट वर्ल्ड स्कूल में पढ़ने वाले अश्मित कम्बोज की मां रीना बताती हैं कि सोशल मीडिया ग्रुप के जरिए पेरेंट्स ने बुक्स एक्सचेंज करने का इनिशिएटिव लिया। पिछला साल कोरोना की वजह से ऐसे ही गुजर गया और अब भी यही हाल है।

ऑनलाइन क्लासेज की वजह से बच्चों ने किताबों पर कुछ लिखा ही नहीं है। वातावरण के नजरिए से देखा जाए तो यह बहुत ही अच्छा इनिशिएटिव है। अगर लंबे समय तक सिलेबस न बदले तो यह सिलसिला यूं ही जारी रहना चाहिए।

बहुत अच्छा आइडिया

अनु का कहना है कि मेरा बेटा उज्जवल राय मानव मंगल स्मार्ट वर्ल्ड स्कूल में पढ़ता है। हमने भी न्यू सेशन की बुक्स एक्सचेंज की हैं। यह कोई बुरा आइडिया नहीं है। बेटे की बुक्स मैंने भी आगे पासऑन कर दी। किसी के काम ही आएंगी।

बच्चों में भी कनेक्ट बढ़ रहा है: पसरीजा

टीचर अनु पसरीजा का कहना है बुक्स एक्सचेंज करना बहुत ही अच्छी बात है। जब हम छोटे थे तो एक-दूसरे से किताबें लेकर पढ़ते थे। इससे बच्चों में भी कनेक्ट बन रहा है। पेपर भी वेस्ट नहीं हाे रहा और किताबें तो कभी खराब ही होती ही नहीं।

ड्रेस और किताबों का कारोबार मंदा: मनचंदा

बुक्स और स्कूल ड्रेस की सेल इस बार 50 फीसदी कम है। लॉकडाउन के दौरान स्कूली बच्चों के पेरेंट्स का एक-दूसरे से कॉन्टैक्ट बढ़ा है। वे अपनी पुरानी किताबों को एक्सचेंज कर रहे हैं। स्कूल ड्रेस तो बिक ही नहीं रही। पिछले साल भी कम बिकी थी। इस बार भी स्कूल खुलने की अभी संभावना नहीं लग रही, जिस वजह से ड्रेस का बिजनेस ठंडा है।

वैभव मनचंदा, मालिक, मनचंदा बुक शॉप, सेक्टर-16, पंचकूला

किताबों की सेल में 40 फीसदी तक की गिरावट आई है। स्टूडेंट्स पुरानी किताबों से ही काम चला रहे हैं। ऑनलाइन स्टडी की वजह से किताबों की कंडीशन ठीक है, इसलिए स्टूडेंट्स इन्हें एक्सचेंज कर रहे हैं। इस वजह से नई किताबें कम बिक रही हैं।

सुनील अरोड़ा, पॉपुलर बुक डिपो, सेक्टर-22, चंडीगढ़

इस बार कम किताबें बिकीं: जगोता

इस बार किताबों की बिक्री 25 से 30 परसेंट कम है। पेरेंट्स ने सोशल मीडिया पर ग्रुप बनाए हुए हैं। स्कूलों ने भी इस बार किताबों में बदलाव नहीं किया है। अगर किसी स्कूल ने एक-दो किताबें बदली हैं तो वही बिक रही हैं। स्टेशनरी भी नहीं बिक रही। नए सेशन शुरू होने पर काफी स्टेशनरी बेचने के लिए लाए थे, लेकिन दुकान में ऐसे ही ढेर लगे हैं।
राकेश जगोता, सुशील बुक डिपो, सेक्टर-11, पंचकूला

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