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हीराक्षी के पिता का झलका दर्द:बोले- बेटी को पूरा टाइम नहीं दे पाया, उसके जाने से घर पूरी तरह सुनसान हो गया है

बृजेन्द्र गाैड़/चंडीगढ़3 महीने पहले
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'हीराक्षी छोटी होने के चलते घर की लाडली थी। मैं काम की व्यस्तता के चलते उसके जीते जी उसे पूरा टाइम नहीं दे पाया। इस बात का सबसे ज्यादा दुख है। अब उसके जाने के बाद उसकी कमी खल रही है। काश मैंने उसे अपना समय दिया होता। हर आदमी को काम के साथ परिवार को भी समय देना चाहिए।' यह शब्द हैं 16 साल की हीराक्षी के पिता पंकज कुमार के जिन्होंने अपनी बेटी को कार्मल कॉन्वेंट हेरिटेज ट्री हादसे में खो दिया।

पंकज ने कहा कि अब उन्हें महसूस हो रहा है कि परिवार में ज्यादा से ज्यादा समय व्यतीत करना चाहिए। बच्चों की ख्वाहिशें तो पूरी हो रही थी मगर वह बच्चों को समय नहीं दे पाए। भास्कर के साथ उन्होंने अपना दुख सांझा किया। वहीं अपनी बेटी की मौत के पीछे कार्मल कॉन्वेंट स्कूल को भी जिम्मेदार ठहराया। पंकज ने कहा कि हीराक्षी छोटी बेटी के जाने से घर पूरी तरह सुनसान हो गया है। अब घर में हीराक्षी की आवाज नहीं गूंजती और सब वीरान हो गया है। स्कूल ड्रेस में ही उसका 9 जुलाई को संस्कार किया गया था।

प्रशासन के इसी हेरिटज पेड़ ने हीराक्षी की जान ली थी।
प्रशासन के इसी हेरिटज पेड़ ने हीराक्षी की जान ली थी।

इतनी फीस, फंड लेता है स्कूल, मगर लंच के लिए ढंग की जगह नहीं

हीराक्षी के पिता ने कहा कि मामले में स्कूल प्रशासन की लापरवाही तो बनती है। स्कूल को इतनी फीस देते हैं। वहीं स्कूल कई तरह के फंड भी लेता है। इसके बावजूद बच्चों को लंच के दौरान बैठने के लिए कोई शेड की व्यवस्था तक नहीं है। कोई हॉल नहीं है। इतने बड़े स्कूल में बच्चा नीचे मैदान में बैठ कर खाना खा रहा है। इससे अच्छे हालात तो सरकारी स्कूलों में हैं।

स्कूल ने बच्ची की जानकारी नहीं दी; मीडिया से पता चला

सेक्टर 35 में स्वीट शॉप चलाने वाले हीराक्षी के पिता पंकज ने बताया कि उन्हें अपनी बेटी की गंभीर हालत और मौत का पता ट्वीटर, फेसबुक, एवं अन्य खबरों तथा जानकारों से लगा। सुबह लगभग 11 बजे हुए इस हादसे की जानकारी स्कूल ने लगभग साढ़े 12 बजे जाकर दी। इस जानकारी को स्कूल प्रशासन छिपाता रहा। उन्होंने बताया कि घटना के दौरान वह शिमला था। शिमला से चंडीगढ़ तक उन्हें स्कूल प्रशासन का कोई फोन नहीं आया। उन्होंने बताया कि शिमला से आते वक्त उन्हें रास्ते में हीराक्षी के साथ हुई अनहोनी का अन्य माध्यमों से पता चल गया था। सोलन के रास्ते में उन्होंने अपनी पत्नी को यह दुख भरी जानकारी दी। पंकज ने कहा कि स्कूल कुछ खुल कर नहीं बता रहा था और सिर्फ यही कह रहा था कि अस्पताल आ जाओ।

हादसे के बाद स्कूल के बाहर परिजनों की भीड़ लग गई थी।
हादसे के बाद स्कूल के बाहर परिजनों की भीड़ लग गई थी।

पैसे का लालच नहीं था, बेटी के शरीर के साथ चीड़-फाड़ नहीं चाहते थे

पंकज कुमार ने बताया कि कुछ लोगों ने उन्हें कहा था कि बेटी का पोस्टमार्टम करवा लेना चाहिए। इससे बाद में केस मजबूत हो जाएगा। वहीं पंकज का कहना है कि हीराक्षी की मौत से परिवार में जो कमी हुई है उसे किसी भी चीज से भरा नहीं जा सकता। परिवार मासूम हीराक्षी का चीड़-फाड़ नहीं करवाना चाहता था। पैसा बच्ची की कमी पूरी नहीं कर सकता।

पता नहीं क्या बनना चाहती थी, चिटि्ठयों में दिखी हीराक्षी

पंकज कुमार ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि हीराक्षी के मन में क्या था और बड़े होकर वह क्या बनना चाहती थी। दोनों बहने आपस में खेलती और पढ़ती रहती थी। कभी दोनों आपस में पायलट की बातें करती तो कभी इंजीनियर की। वहीं हीराक्षी की मौत के बाद कार्मल कॉन्वेंट स्कूल के बाहर उसे श्रद्धांजलि देते हुए उसे जानने वाले बच्चे उसके नाम की लेटर्स भी लिख कर जा रहे हैं। एक-दो लेटर्स का हवाला देते हुए हीराक्षी के पिता ने कहा कि उसमें लिखा था कि हीराक्षी हमारा सपना अधूरा रह गया। हीराक्षी की याद में स्कूल के बाहर कैंडल भी बच्चों ने जलाई थी।

हीराक्षी की मौत के बाद स्कूल के बाहर उसे श्रद्धांजलि दी जा रही है।
हीराक्षी की मौत के बाद स्कूल के बाहर उसे श्रद्धांजलि दी जा रही है।

हीराक्षी का कजन स्कूल के बाहर अपनी बहन के बारे में लिखी कुछ लेटर्स की पिक्चर्स भी खींच लाया था। उनको पढ़ हीराक्षी को याद कर परिवार रोया भी था। पंकज ने कहा कि बच्चों ने लेटर्स कुछ इस ढंग से लिखी कि लगता है कि हीराक्षी उनके पास ही है।

शोक सभा में वह भी आए जिन्हें जानता नहीं था परिवार

हीराक्षी के पिता ने कहा कि बेटी की बीते 11 जुलाई को सेक्टर 19 शोक सभा में शहर के कई सेक्टरों से लोग आए। कई को तो वह जानते भी नहीं थे। सब हीराक्षी की मौत से दुखी थे। वहीं घर पर भी एक काफी बुजुर्ग भी हीराक्षी का शोक मनाने आया जो मुश्किल से ही घर की सीढ़ियां चढ़ पा रहा था।

स्कूल की लापरवाही भी लेटर में जुड़वाई

हीराक्षी के पिता ने कहा कि वह बेटी का पोस्टमार्टम नहीं करवाना चाहते थे। ऐसे में उन्हें कहा गया कि एक लेटर लिख कर दे दें। जो लेटर पहले लिखी गई थी उसमें हादसे की जानकारी और हीराक्षी की मौत के बारे में लिखा हुआ था। इसमें हीराक्षी के पिता ने कार्मल कॉन्वेंट स्कूल की लापरवाही की लाइन जुड़वाई थी। वहीं बीती 12 जुलाई को सेक्टर 3 थाना पुलिस ने हीराक्षी के पिता के बयान दर्ज करवाए थे।

कार्मल कान्वेंट स्कूल, सेक्टर 9 की प्रिंसिपल सिस्टर सुप्रीतो
कार्मल कान्वेंट स्कूल, सेक्टर 9 की प्रिंसिपल सिस्टर सुप्रीतो

पुलिस में इंसानियत गायब; मार्चरी की जगह सुखना लेक बुलाया

हीराक्षी के पिता ने बताया कि जब वह 8 जुलाई को शिमला से वापस आए तो पीजीआई पहुंचने पर बेटी की लाश पीजीआई की मोर्चरी में ही पाई। परिवार ने कहा था कि वह पोस्टमार्टम नहीं चाहते और बॉडी सुबह 10 बजे ले जाएगें। सुबह 11 बजे हीराक्षी का शव घर लाने और 12 बजे संस्कार का समय था।

हीराक्षी के पिता ने कहा कि बेटी का शव पीजीआई से लेने के लिए पुलिस ने सुबह 8 बजे कागजी कार्रवाई के लिए सुखना लेक बुलाया। 15 मिनट बाद कैब में महिला पुलिसकर्मी वहां पहुंची। उसके लगभग 15 मिनट बाद एक पुलिसकर्मी आया और उसने लेटर लिखी। लगभग 40 मिनट वहां पुलिस ने खराब किए। इसके बाद पुलिस ने कहा कि डीएसपी से दस्तखत करवा कर आ रहे हैं। इसके बाद उन्हें सेक्टर 17 थाने डीएसपी ऑफिस बुलाया गया।

बच्ची का खून दर्दनाक हादसे की गवाही दे रहा है।
बच्ची का खून दर्दनाक हादसे की गवाही दे रहा है।

वहीं एक पुलिसकर्मी द्वारा काफी असंवेदनशील रवैये से बात की गई उससे भी हीराक्षी के पिता को काफी दुख हुआ। हीराक्षी के पिता ने कहा कि पुलिस को सुबह दस्तावेज तैयार रखने चाहिए थे। उन्हें ऐसे हालात में भी पुलिस के चक्कर काटने पड़े। सुबह 8 बजे से पुलिस कार्रवाई में लगे रहने के बाद सुबह पौने 11 बजे के लगभग बॉडी उन्हें मिली। उन्होंने कहा कि पुलिस का कम से कम ऐसे समय में इंसानियत दिखानी चाहिए थी। पुलिस को ऐसे हालात में सीधा मार्चरी में बुला कर यह कागजी कार्रवाई करवानी चाहिए थी।

पेड़ की फेंसिंग कर सकते थे; पेड़ के पास लंच क्यों?

हीराक्षी के पिता ने कहा कि कार्मल कॉन्वेंट इतना बड़ा स्कूल है मगर बच्चों के बैठ कर लंच करने की व्यवस्था नहीं है। पहले भी स्कूल में इसी हेरिटेज ट्री का कुछ हिस्सा गिर गया था। पेड़ की उचित रुप से फेंसिंग होनी चाहिए थी। बच्चों को पेड़ के पास नहीं भेजना चाहिए था। उन्होंने कहा कि जो उनकी बेटी के साथ हुआ है वह किसी और के बच्चे के साथ न हो। कम से कम अब स्कूल प्रबंधन और प्रशासन को उचित कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी बच्ची की जान जाने से प्रशासन और स्कूल को सबक लेना चाहिए।

हाथ गंवाने वाली इशिता का परिवार भी स्कूल पर भड़का

वहीं घटना में अपना एक हाथ गंवाने वाली दसवीं की इशिता (15) के चाचा अंकुश शर्मा ने कहा कि स्कूल कई तरह के फंड लेता है। इतना बड़ा स्कूल है और बच्चों के लिए लंच करने के लिए कोई स्पेस नहीं है। तेज गर्मी में बच्चों को टिफिन पकड़ नीचे आना पड़ता है। पहले भी इस हेरिटेज पेड़ की शाखा गिर चुकी है। इसकी फेंसिंग की जानी चाहिए थी। बच्चों को ऐसे पुराने और खतरनाक पेड़ के पास क्यों जाने दिया जाता था। जब टीचर्स बिल्डिंग में खाना खा सकती थी तो बच्चों को मैदान में लंच के लिए क्यों भेजा जाता था। उन्होंने कहा कि परिवार स्कूल की इस लापरवाही को इतनी आसानी से नहीं जाने देगा।

स्कूल और चंडीगढ़ प्रशासन पेड़ की इस दीमक को नहीं देख पाया
स्कूल और चंडीगढ़ प्रशासन पेड़ की इस दीमक को नहीं देख पाया

उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी भी चंडीगढ़ के एक गवर्नमेंट स्कूल में प्रिंसिपल हैं। शहर के सेक्टर 18 गवर्नमेंट मॉडल स्कूल में भी ऐसा हेरिटेज ट्री है जिसकी फेंसिंग की जाती है। बच्चों को इसके पास नहीं जाने दिया जाता। टीचर्स खुद बच्चों की ग्रांउड में देखरेख करती हैं।

कार्मल के मालियों को क्या पेड़ की जानकारी नहीं?

इशिता के परिवार ने कहा कि कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में 20 के लगभग माली हैं। क्या मालियों को इतनी जानकारी नहीं की पेड़ की हालत कैसी है। बच्चों को क्यों इतने विशाल पेड़ के पास भेजा जाता था। स्कूल अपनी लापरवाही से भाग नहीं सकता।

शीला पीजीआई में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही है।
शीला पीजीआई में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही है।

मामले में पीजीआई के वैंटिलेटर पर जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही शीला की बेटी और मामा-मामी पीजीआई में उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना कर रहे हैं। शीला का बेटा दसवीं में है और स्कूल जाता है। वह बार-बार अपनी बहन से मां का हाल-चाल पूछ रहा है। वहीं परिवार के मुताबिक वह अच्छे से खा-पी भी नहीं रहा। वह मां के काफी नजदीक है। शीला अपने परिवार के साथ किशनगढ़ रहती है। उनका पति कई साल पहले अलग हो चुका है। जानकारी के मुताबिक स्कूल प्रबंधन शीला के इलाज का खर्च उठा रहा है। वहीं शीला की फ्रेंड अटेंडेंट्स भी उसका हाल-चाल जानने पीजीआई पहुंच रही हैं।