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लाल किला हिंसा के बाद किसान आंदोलन:राजेवाल बोले- बार्डर पर क्या हो रहा है ये कैप्टन जानें; पर लाल किले पर हुई हिंसा की जिम्मेदार केंद्र सरकार, भाजपा और RSS

चंडीगढ़3 महीने पहले
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राजेवाल ने बताया कि दिल्ली बॉर्डर्स पर वहां सरकारों ने इंटरनेट बंद कर दिया है व बाकी व्यवस्था भी बंद की जा रही है। सरकार वहां से गलत संदेश भेजने में लगी हुई है। इसलिए हम सभी देशवासियों को निवेदन करेंगे कि लोग गलत बातों पर ध्यान न दें। - Dainik Bhaskar
राजेवाल ने बताया कि दिल्ली बॉर्डर्स पर वहां सरकारों ने इंटरनेट बंद कर दिया है व बाकी व्यवस्था भी बंद की जा रही है। सरकार वहां से गलत संदेश भेजने में लगी हुई है। इसलिए हम सभी देशवासियों को निवेदन करेंगे कि लोग गलत बातों पर ध्यान न दें।
  • भारतीय किसान यूनियन के प्रेजिडेंट बलबीर सिंह राजेवाल शनिवार को चंडीगढ़ के किसान भवन पहुंचे, यहां उन्होंने मीडिया से बात की

(आरती एम अग्निहोत्री). पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शुक्रवार को एक बयान जारी किया है। इसमें उन्होंने कहा था कि जो कुछ हो रहा, ऐसा सब कुछ ही है जो पाकिस्तान चाहता है।’ वे बोले थे कि मैं लंबे समय से कह रहे हैं कि पाकिस्तान, पंजाब की अमन-शांति भंग करने के लिए इस मौके को बरतने की कोशिश करेगा। यही मैंने केंद्रीय गृह मंत्री के साथ साझा किया था कि पाकिस्तान से हथियार, नशे आदि ड्रोन के द्वारा आ रहे हैं और इनमें से बहुत से पकड़े भी गए और कुछ पार भी हो गए होंगे। लेकिन, इस मीटिंग के बाद हो-हल्ला मच गया था।

कैप्टन ने कहा था कि केंद्रीय एजेंसियों को किसान आंदोलन के दौरान हुई ताजा गड़बड़ और हिंसा में पाकिस्तान की संभावित भूमिका की जांच करनी चाहिए। इस बाबत जब भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष से बात की तो उन्होंने कहा- बार्डर पर क्या हो रहा है ये कैप्टन जानें। लेकिन, लाल किले पर जो हिंसा हुई है उसके लिए सीधे तौर पर केंद्र सरकार, भाजपा और RSS जिम्मेदार है। बाकी अपने टिकरी बार्डर पर हर ट्रॉली में दो लोग ठीकरी पैरा लगाते हैं ताकि कोई असामाजिक तत्व आए तो उसे तुरंत रोका जाए। बलबीर सिंह राजेवाल शनिवार को चंडीगढ़ के किसान भवन पहुंचे। यहां उन्होंने मीडिया से बात की।

बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि किसान आंदोलन लंबे समय से चल रहा है और अब आम लोग भी इसमें शामिल हो चुके हैं। ये आंदोलन अब जन आंदोलन होने के साथ-साथ विश्व का सबसे बड़ा आंदोलन बन गया है। 26 नवंबर से लगातार दिल्ली बॉर्डर पर शांतिमय ढंग से बैठे हैं। 26 जनवरी को जो मंदभागी घटना हुई उससे एक-दो दिन झटका जरूर लगा लेकिन उसके बावजूद फिर से आंदोलन बड़े स्तर पर है और बाकी राज्य के लोगों की बड़ी भूमिका है जहां से लोग बड़ी संख्या में पहुंचे हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी के नोटिस पर राजेवाल ने कहा कि केंद्र सरकार नोटिस के जरिए किसान नेताओं पर दवाब बनाना चाहती है। किसानों पर कार्रवाई के बाद किसानों को नोटिस प्राप्त हुए। खैर, अब किसान नेता नोटिस का जवाब देंगे। दीप सिद्धू के सवाल पर उन्होंने कहा कि उसने जो करना था कर दिया। अब इस पर बात करना बेमानी होगा।

सरकार समझे जनता की भावनाएं

राजेवाल ने बताया कि दिल्ली बॉर्डर्स पर वहां सरकारों ने इंटरनेट बंद कर दिया है व बाकी व्यवस्था भी बंद की जा रही है। सरकार वहां से गलत संदेश भेजने में लगी हुई है। इसलिए हम सभी देशवासियों को निवेदन करेंगे कि लोग गलत बातों पर ध्यान न दें। आज पूरी दुनिया इस आंदोलन को देख रही है जिसमें एक बार फिर से किसान इस आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। हम जोश और होश दोनों में हैं। जिस तरह से हरियाणा व यूपी की खाप ने बड़े फैसले लिए हैं तो सरकार से हमारा निवेदन है कि लोगों की भावनाओं को समझना चाहिए और तीनों कानूनों को अब वापिस लेने का फैसला लेना चाहिए। उन्होंने कहा- किसान विवाद को सुलझाने में विश्वास रखते हैं, यदि कृषि कानूनों को लेकर सरकार किसान यूनियनों को बुलाती है तो वह भी बातचीत के लिए तैयार हैं। शर्त सिर्फ यही होगी कि किसान विरोधी कृषि कानूनों का सरकार स्थायी समाधान करे।

भाजपा और RSS के लोग कर रहे प्रवोक

राजेवाल ने किा कि गाजीपुर बार्डर पर भाजपा के दो विधायक और कुछ वर्कर्स ने आकर किसानों को प्रवोक करने की कोशिश की है। लेकिन, हमने सभी से कहा है कि किसी के भी प्रवोक करने से प्रवोक नहीं होना है। हमने किसानों से भी अपील की है कि हमारा अपना देश है। यहां किसी तरह की हिंसा नही करनी। अगर कोई जोर जबर होता है तो उसे सहन करना है।

टिकैत की की सराहना

राजेवाल ने राकेश टिकैत की सराहना करते हुए कहा कि टिकैत ने स्थिति को बिगड़ने से संभाल लिया। इसलिए यूपी और हरियाणा के किसान एक बार फिर बड़ी तादाद में रुख कर रहे हैं। किसान यूनियनों को उन्हे सम्मानित करना चाहिए, जल्द ही भारतीय किसान यूनियन टिकैत का सम्मान करेगी।उन्होंने कहा कि 26 जनवरी के दिन खुद पुलिस ने ट्रैक्टरों का रुख लाल किले की ओर किया था। हम भी जब रिंग रोड से इंडस्ट्रियल एरिया की ओर पहुंचे तो वहां हमें भी उस ओर भेजने की कोशिश की गई। सादे कपड़ों में कुछ लोग ये भी कह रहे थे कि जो लाल किले की ओर नहीं जाएगा वो गद्दार है। लेकिन, हम वहां नहीं गए। जब हमें पता चला कि हालात खराब हैं तो हमने ट्रैक्टर रैली को वहीं रोक दिया। जो रैली 72 घंटे तक चलनी थी वह रुक गई।

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