78 हजार का रिक्लाइनिंग सोफा खराब:कंपनी सेवा में कोताही बरतने की दोषी करार; रकम लौटाएगी, हर्जाना भरेगी, अदालती खर्च भी देगी

चंडीगढ़3 महीने पहले
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चंडीगढ़ सेक्टर-10 निवासी रुचिका खन्ना ने पंचकूला से 78 हजार रुपए का रिक्लाइनिंग सोफा खरीदा। 5 वर्ष की वारंटी भी थी, मगर पहले ही साल यह खराब हो गया। कंपनी ने सर्विस नहीं दी और न ही खराब सोफा रिप्लेस किया। इस पर चंडीगढ़ कंज्यूमर कमीशन ने सख्ती बरती है। कमीशन ने कंपनी को सेवा में कोताही बरतने का दोषी पाया।

शिकायतकर्ता को मानसिक पीड़ा और शोषण के चलते पंचकूला के इंडस्ट्रियल एरिया फेज 1 स्थित ड्यूरेन इंडस्ट्रीज लिमिटेड और इंटरग्रुप को 5 हजार रुपए हर्जाना भरने के आदेश दिए। आदेश दिए गए हैं कि शिकायतकर्ता को सोफे के 78 हजार रुपए 9 प्रतिशत ब्याज सहित वापस किए जाएं। 5 हजार रुपए अदालती खर्च के भरने के आदेश भी हैं।

नोटिस भेजने के बावजूद प्रतिवादी पक्ष के पेश न होने पर एक्स-पार्टी घोषित कर दिया गया। कमीशन ने कहा कि प्रतिवादी पक्ष का पेश न होना दर्शाता है कि उन्हें अपने बचाव में कुछ नहीं कहना। प्रतिवादी ने शिकायतकर्ता की वास्तविक शिकायत का निवारण नहीं किया। कमीशन ने रिकॉर्ड देख कर कहा कि शिकायतकर्ता ने कंपनी और इसके स्थानीय ऑफिस को कई मैसेज किए।

इसके बावजूद समस्या का हल नहीं हुआ और शिकायतकर्ता को खराब सोफा इस्तेमाल करना पड़ा। प्रतिवादी पक्ष द्वारा उचित सर्विस मुहैया न करवाना, व्यवसायिकता की कमी, अनुचित और बिना कारण बताए देरी, तालमेल की कमी, खुद के द्वारा दी गई वारंटी शर्तों की पालना न करना एवं सुनवाई के दौरान पेश न होना सेवा में कोताही और गलत व्यापारिक गतिविधियों में शामिल होना दर्शाता है।

रिक्लाइनिंग और रिक्वाइलिंग बंद हो गई थी

17 अक्तूबर 2019 को शिकायतकर्ता ने पीटर/ग्लाइडर/2, 2 स्टार एप्पा एयर लैदर, ग्लाइडर रिक्लाइनर सोफा (रिक्लाइनर सोफा) का ऑर्डर दिया था और इसकी 78 हजार रुपए की पेमेंट की थी। इस सोफे की 5 साल की वारंटी थी, जिसमें 1 वर्ष की कंप्रिहेंसिव वारंटी तथा 4 वर्ष की ऑनसाइट सर्विस थी, लेकिन खरीदने के एक वर्ष के भीतर ही सोफा दिक्कत देने लगा।

यह फंस जाता था और पूरी तरह रिक्लाइनिंग और रिक्वाइलिंग करनी बंद कर दी। कई बार शिकायत करने के बाद प्रतिवादी पक्ष ने 5 सितंबर 2020 को टेक्निशियन भेजा। उसने इसे रिपेअर नहीं किया और कहा कि सोफा खराब है और रिप्लेस किया जाना बनता है। इसके बाद शिकायतकर्ता के कई बार आग्रह करने के बावजूद कुछ नहीं बना तो शिकायत दायर की गई।