सेक्टर-17 में शॉप्स का किराया न बढ़ाने से नुकसान:चंडीगढ़ एस्टेट ऑफिस पर उठे सवाल; CAG की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

चंडीगढ़7 दिन पहले
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कॉम्पट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) की रिपोर्ट में चंडीगढ़ प्रशासन के अहम डिपार्टमेंट्स से जुड़ी बड़ी लापरवाहियां और घपले सामने आ रहे हैं। CAG ने अपनी रिपोर्ट में एस्टेट ऑफिस की कारगुज़ारी पर भी सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि एस्टेट ऑफिस तय प्रक्रिया के तहत सेक्टर 17-ई में शॉप्स का किराया बढ़ाने में नाकाम रहे।

ऐसे में वर्ष 1922-2022 के बीच किराए का मूल्यांकन कम रहा जिससे 9.37 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। CAG ने हाल ही में यह रिपोर्ट चंडीगढ़ के प्रशासक बीएल पुरोहित को सौंपी थी। ऑडिट में कहा गया कि एस्टेट ऑफिस ने स्कीम के प्रावधानों की पालना नहीं की और आकलन के दौरान राजस्व में नुकसान की बात सामने आई।

इस ऑडिट के जवाब में विभाग ने किराया तय करने को लेकर कमियों को स्वीकार किया। 18 SCOs और 5 बूथों का मार्च, 1992 से मई, 2022 तक विस्तृत रिव्यू किया गया था। एस्टेट ऑफिस से ऑडिट के बाद मई, 2022 में आउटस्टेंडिंग ड्यू को लेकर 3 किराएदारों को डिमांड नोटिस जारी किया था। वहीं बाकियों को भी यह नोटिस जारी किए जाने की बात कही गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ऑर्डर के बाद नियम तय हुए
रिपोर्ट में कहा गया कि प्रशासन ने सेक्टर 17-ई में सरकारी दुकानें (SCOs)/बूथ पांच सालों के लिए लीज पर दिए थे। इस लीज को हर पांच साल बाद आगे बढ़ाया गया था वहीं 20 प्रतिशत किराया बढ़ाया गया था। वर्ष 1992 में SCOs का यह किराया 14 हजार रुपए था। वहीं पांच बूथों का किराया तीन SCOs में से निकाला गया था जो प्रो राटा आधार पर तय किया गया था। हालांकि इसे दुकानदारों ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 1999 में आदेश दिया था कि SCO/बूथों का किराया बिना नियम तय किए नहीं बढ़ाया जाएगा।

14 हजार रुपए किराया कर दिया था
कोर्ट के आदेशों के बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने लीजिंग आउट ऑफ गवर्नमेंट बिल्ट-अप शॉप्स/बूथ ऑन मंथली रेंट बेसिस इन चंडीगढ़ स्कीम, 2000 के नाम से नियम तय किए। इसके बाद 1 मार्च, 1992 से किराया तय किया जाना था। ऐसे में SCOs का किराया 14 हजार रुपए प्रति माह कर दिया गया।

निर्देशों की उल्लंघना कर तय किया रेंट
एस्टेट ऑफिस के वर्ष 2018-19 के रिकॉर्ड्स की छंटनी के दौरान ऑडिट में सामने आया कि 18 शॉप्स और 5 बूथों के संबंध में जब किराए का पुन: मूल्यांकन किया गया था तो एस्टेट ऑफिस ने शॉप्स और बूथों का किराया स्कीम के क्लॉज 9 और 10 में दिए गए निर्देशों की उल्लंघना कर तय किया। इसमें किराया बढ़ाने के तय स्तरों को नजरअंदाज किया गया। वहीं लीज रेंट सीधे तौर पर बेस रेंट(14 हजार रुपए) में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर संशोधित कर दिया गया।