चंडीगढ़ नगर निगम में किसका मेयर?:कांग्रेस पार्षद हरप्रीत कौर के शामिल होने से BJP के 13 कौंसलर हुए; सांसद को मिला AAP-भाजपा के वोट बराबर

चंडीगढ़5 महीने पहले
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बबला दंपति का भाजपा में स्वागत - Dainik Bhaskar
बबला दंपति का भाजपा में स्वागत

चंडीगढ़ नगर निगम में मेयर पद को लेकर दिलचस्प स्थिति हो गई है। कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीती पार्षद हरप्रीत कौर बबला ने भाजपा जॉइन कर ली है। जिसके बाद MP किरन खेर को मिलाकर भाजपा के पास भी 14 वोट हो गए हैं। इससे पहले चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी 14 सीटें जीती है।

जिसके बाद भाजपा दावा कर रही है कि अब डिप्टी मेयर से लेकर सीनियर डिप्टी मेयर और मेयर भी उन्हीं की पार्टी का बनेगा। चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में प्रचार करने वाले हरियाणा के CM मनोहर लाल खट्‌टर ने कहा कि अब यहां मेयर भाजपा का ही बनेगा।

सांसद किरन खेर ने पार्षद हरप्रीत कौर के शामिल होने का स्वागत किया
सांसद किरन खेर ने पार्षद हरप्रीत कौर के शामिल होने का स्वागत किया

पति को कांग्रेस से निकाला तो भाजपा में गई पार्षद

शनिवार को शपथ ग्रहण के दौरान पार्षद हरप्रीत कौर के पति देविंदर बबला की चंडीगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष सुभाष चावला से विवाद हो गया। बबला ने पार्टी अध्यक्ष चावला को हार के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया क्योंकि कांग्रेस ने सिर्फ 8 ही सीटें जीती थी। जिसके बाद चंडीगढ़ कांग्रेस इंचार्ज हरीश चौधरी ने कांग्रेस के उपाध्यक्ष देविंदर बबला को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया। निष्कासन की देर थी कि देवेंद्र बबला पार्षद पत्नी हरप्रीत कौर के साथ भाजपा में शामिल हो गए।

पार्टी छोड़ने पर नहीं जाता पद

चंडीगढ़ नगर निगम में अहम स्थिति यह भी है कि अगर कोई पार्षद पार्टी बदल लेता है तो उन पर कोई रोक नहीं है। विधानसभा स्तर पर पार्टी बदलने पर दलबदलू कानून के तहत विधायक पद खोना पड़ता है। हालांकि चंडीगढ़ नगर निगम में ऐसा नहीं है। कोई एक पार्टी की टिकट पर जीतकर दूसरी पार्टी में चला जाए तो वह तय वक्त के लिए पार्षद बना रहेगा।

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जोड़तोड़ के आगे फीकी पड़ी AAP की धमाकेदार एंट्री

चंडीगढ़ नगर निगम के 35 वार्डों के चुनाव में आम आदमी पार्टी ने धमाकेदार एंट्री की थी। पहली बार चुनाव लड़ी AAP ने 14 सीटें जीत ली। भाजपा के मौजूदा मेयर रविकांत शर्मा समेत दिग्गज भाजपाई आप के नए उम्मीदवारों से हार गए। आप निगम में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। आप की इस जीत को नेताओं ने खूब भुनाया। यहां तक कि इसे पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव की झांकी तक करार दे दिया। हालांकि अब हरप्रीत कौर बबला के भाजपा में जाने के बाद आप के लिए चिंता पैदा होनी तय है। वह अपने पार्षदों को भाजपा में जाने से रोक रहे थे लेकिन अब कांग्रेसी पार्षदों के जाने से आप को झटका लगा है।

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