पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

सर्वाधिक पेटेंट:चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी 336 पेटेंट करवाने वाला देश का पहला संस्थान बना: संधू

चंडीगढ़8 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • वाइस चांसलर बोले- रिसर्च वर्क को आगे बढ़ाने के लिए सरकार बनाए संयुक्त मंच

राज्य के सरकारी एवं गैर सरकारी शिक्षण संस्थाओं को रिसर्च वर्क के लिए एक मंच पर आना चाहिए। रिसर्च वर्क को आगे बढ़ाने के लिए सरकार को संयुक्त मंच के साथ इन्फ्रास्ट्रक्चर भी उपलब्ध करवाना चाहिए। यह बातें चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी घड़ुआं के चांसलर सतनाम सिंह संधू ने कहीं।

कहा कि किसी भी देश का विकास उस देश की रिसर्च तथा नई तकनीकों पर ही आधारित होता है। उन्होंने खुशी जताई कि चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने अब तक 336 पेटेंट दर्ज करवाए हैं जबकि देश की 27 आईआईटी की ओर से संयुक्त रूप से 557 पेटेंट करवाए गए हैं। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी देश का पहला ऐसा संस्थान बन गया है जिसने सभी संस्थानों को पेटेंट के मामले में पीछे छोड़कर देश में एक नंबर बना है। पेटेंट जर्नल कंट्रोलर विभाग की ओर से जारी की वार्षिक रिपोर्ट में पंजाब की रैंकिंग जो पहले 12वीं थी अब सुधर कर आठवें स्थान पर हो गई है।

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी और सीजीसी लांडरां ने 67.6 प्रतिशत की पेटेंट की भागीदारी से यह संभव हो सका है। मिशन इनोवेटिव पंजाब के तहत राज्य इनोवेशन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यूनिवर्सिटी की ओर से अब तक आईटी क्षेत्र में 148, ऑटोमेशन सेक्टर में 85, स्वास्थ्य क्षेत्र में 27, कृषि क्षेत्र में 31, सुरक्षा क्षेत्र में 95, मैन्युफेक्चरिंग क्षेत्र में 203 और डोमेस्टिक सेक्टर में 113, पानी संबन्धी 20 और अन्य क्षेत्रों में 57 पेटेंट दर्ज किए जा चुके हैं।

500 किलो तक वजन उठा सकती है इलेक्ट्रिकल व्हीकल

सीयू के कम्प्यूटर साइंस इंजीनियर के छात्र जय चरचढ़ा ने बताया कि वह टैक्सी से यूनिवर्सिटी के बाहर उतरता था और उसके आगे पैदल जाना पड़ता था। उसके दिमाग में आया कि क्यों ना इस एरिया में जाने के लिए कोई ऐसा वाहन बनाया जाए जिससे चलने का काम कम हो जाए।

उसने इलेक्ट्रिकल व्हीकल तैयार किया जो फोन ओके बाय मेट्रिक से स्टार्ट हो जाता है। मोटर मोटर का संतुलन तैयार किया गया क्योंकि इलेक्ट्रिकल व्हीकल में बैटरी हम होती है। यह 500 किलोग्राम तक का वजन उठा सकता है और इसके साथ ही इस पर ट्रैकिंग डिवाइस होगा जिससे आप पता कर सकते हैं कि कहां-कहां जा रहा है।

ऑटोमेटिक इरिगेशन सिस्टम को मिली सहायता...बाॅयोमेट्रिक की छात्रा अनु शर्मा ने बताया कि उनके द्वारा जो पेटेंट करवाया गया है उसका एग्रीकल्चर में बहुत मतलब होगा और किसानों को फायदा मिलेगा।

उसने बताया कि उन्होंने जो ऑटोमेटिक इरिगेशन सिस्टम तैयार किया है, वह मिट्टी की नमी के बारे में भी जानकारी देगा। मिट्‌टी में क्या-क्या खामी हैं और कितना पानी चाहिए यह सब आपके मोबाइल फोन पर डिस्प्ले होगा।

खबरें और भी हैं...