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इन्फॉर्मेशन टु इनसाइट:एक डोज से नहीं रुकेगा कोरोना, कम से कम दो डोज लगवानी ही होंगी, जरूरत पड़ने पर तीसरी भी

संजीव महाजन | चंडीगढ़10 दिन पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • कोरोना वैक्सीन लगवाने के 72 घंटे पहले स्टाफ के मन में कई सवाल- जब ठीक हैं तो टीका क्यों लगवाएं
  • कितनी डोज लेनी होंगी ? इस पर जीएमएसएच-16 के एमएस का जवाब-

कोरोना से लड़ने के लिए शहर में पहला टीका- कोविशील्ड, 16 जनवरी को लगेगा। हर किसी में मन में इस टीके को लेकर कई तरह के सवाल, डर और आशंकाएं हैं। जिन हेल्थ वर्करों को पहले टीका लगना है, उनमें से कई विरोध में भी हैं कि पहले वही टीका क्यों लगवाएं, डॉक्टर पहले क्यों न लगवाएं या पहले आम लोगों को टीका क्यों नहीं? यह तय है कि टीका असरदार निकलेगा, तो सभी लगवाना चाहेंगे। लेकिन अभी कई शंकाए हैं।

शहर के सभी सरकारी अस्पतालों में 100-100 हेल्थ वर्कर और अन्य स्टाफ की लिस्ट बना ली गई है। इनमें टीका लगवाने वाले डॉक्टरों की संख्या बेहद कम है। इसलिए भी सवाल उठ रहे हैं। इन्हीं सवालों को विराम देने के लिए सेक्टर-16 अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉक्टर वरिंदर नागपाल ने हेल्थ वर्कर्स, सिक्योरिटी स्टाफ, एनएचएम स्टाफ के साथ बुधवार को मीटिंग की। इसमें इनकी शंकाओं काे दूर करने की कोशिश की गई और टीके के लिए अवेयर किया गया।

नतीजा निकला...
1. अब न सिर्फ हेल्थ वर्कर बल्कि डाॅक्टर भी एक समान अनुपात में कोविड वैक्सीन लगवाएंगे।
2. स्टाफ टीका लगाने पर राजी हुआ, कई डॉक्टर्स ने मौके पर ही बोला कि पहले दिन वे भी टीका लगवाएंगे ही। खुद मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉक्टर नागपाल भी पहले दिन टीका लगवाएंगे।
3. यह भी स्पष्ट किया गया कि अगर किसी को फिर भी टीका लगवाने में संकोच है तो वह चाहे तो न लगवाए। ऐन मौके पर भी मना कर सकते हैं। इसमें कोई जबरदस्ती नहीं है।

दाेनों डोज लगवाने के डेढ़ महीने बाद दिखना शुरू होगा कोरोना वैक्सीन का असर...

सवाल: हम ठीक हैं, तो टीका क्यों लगवाएं?
- डॉ.नागपाल: बाद में ऑक्सीजन लगवाने से अच्छा है पहले ही टीका लगवा लो।

सवाल: और टीका लगवाने के बाद सेहत खराब हो गई, तो क्या होगा?
- डॉ.नागपाल: इसीलिए पहले मेडिकल स्टाफ को ही टीका लगाया जा रहा है, चूंकि स्टाफ अस्पताल में तैनात है (यानी जरूरत पड़ने पर तुरंत इलाज मिल जाएगा)। दूसरा टीका बेहद सेफ है, कोई दिक्कत नहीं होगी। अगर हुई, तो हमारे यहां पूरी व्यवस्था है, किसी तरह की डरने की जरूरत नहीं। वेंटीलेटर तक मौजूद है और बेड खाली ही हैं। मैं खुद लगवा रहा हूं टीका, वह भी पहले दिन। सोच रहा हूं कि पहला टीका लगवाने का सौभाग्य ही मुझे मिले। खैर पहला टीका लगवाने वाले का नाम कम्प्यूटर ने उठाना है।

सवाल: तो टीका लगवाने के बाद हरियाणा के मंत्री अनिल विज की तबीयत क्यों खराब हो गई?
- डॉ.नागपाल: पहले टीकाकरण समझने की जरूरत है। अनिल विज साहब को टीके की पहली डोज ही लगी थी। उससे कोरोना नहीं रुकता। दो डोज कम से कम जरूरी हैं और सही असर न आने पर तीसरी डोज भी दी जा सकती है... ऐसा भी प्रावधान है। पहली डोज लगने के बाद आप निगरानी में ही रहोगे। तब भी आपको कोरोना रूल्स फॉलो करने होंगे।

आपको मास्क पहनकर रहना होगा, सोशल डिस्टेंस बनाए रखना होगा, हेल्दी डाइट लेनी होगी। 28 दिन के अंतराल के बाद आपको दूसरा टीका लगेगा। इसके बाद करीब डेढ़ महीने बाद इस टीके का ठीक से असर होगा। इसमें किसी तरह की घबराने की जरूरत नहीं। बल्कि यह खुशकिस्मती है कि पहले हम लोगों को टीका लग रहा है।

सवाल: तो क्या सिर्फ सिक्योरिटी गार्ड, सफाई वाले ही टीका लगवाएंगे?
- डॉ.नागपाल: नहीं, टीका समान अनुपात के अनुसार लगेगा। 100-100 लोगों की जो लिस्ट बनाई जा रही है। उसमें डॉक्टर्स, अस्पताल स्टाफ, फार्मासिस्ट, एएनयू कर्मी, सफाई कर्मी, सिक्योरिटी कर्मी आदि शामिल हैं। मैं खुद टीका लगवाउंगा और सभी सीनियर डॉक्टर्स पहले दिन ही टीका लगवाएं यह सुनिश्चित करूंगा।

सवाल: टीका जरूरी है क्या?
- डॉ.नागपाल: नहीं। चाहे डॉक्टर हो या सिक्योरिटी गार्ड अगर कोई टीका नहीं लगवाना चाहता तो वह मौके पर आकर भी ऐन वक्त पर मना कर सकता है। चाहे लिस्ट में उसका नाम हो या न हो। यह सवैच्छिक है, जो लगवाना चाहे वही आगे आए। जो नहीं लगवाना चाहता, न लगवाए।

सवाल: तो अस्तपाल में जो कोरोना मरीज हैं, उनको ही टीका क्यों नहीं लगाया जाता, वे ठीक भी हो जाएंगे...
- डॉ.नागपाल: नहीं, जिन्हें कोरोना है या बुखार है, उन्हें टीका नहीं दिया जा सकता। चूंकि बुखार के बाद उनके अंदर खुद-ब-खुद एंटी बॉडीज बनना शुरू हो जाता है। जिन्हें पहले कोरोना हो चुका हो, वे टीका लगवा सकते हैं। जिन्हें अब तक कोरोना नहीं हुआ, उन्हें तो टीका लगवाना ही चाहिए, यह एंटी बॉडीज बनाएगा।

सवाल: तो क्या टीका लगवाने के बाद भी हम डेढ़ महीने तक कोरोना के रिस्क में ही होंगे?
- डॉ.नागपाल: कोरोना का रिस्क तो टीका न लगवाने पर भी है। टीका लगवाने के बाद तो आप के अंदर कोरोना से लड़ने की एंटी बॉडीज डेवलप होना शुरू हो जाएंगी। वह भी पहली डोज से ही। टीका न लगवाने पर ज्यादा रिस्क है और टीका लगवाना बेहद फायदेमंद।

एक ही शक है- कहीं हम पर प्रयोग न हो रहा हो...पर डॉक्टर लगवा रहे हैं तो हम भी तैयार हैं
हमारा सवाल है कि सिर्फ हेल्थ वर्कर, सिक्योरिटी गार्ड और निचला स्टाफ ही टीका न लगाए। खुद डॉक्टर भी आगे आएं। अब पता चला है कि डॉक्टर भी टीका लगवा रहे हैं, तो हम भी तैयार हैं। हमारे ज्यादातर स्टाफ अभी शुरुआती दौर पर टीका नहीं लगवाना चाहता। ऐसा भी नहीं है कि हमें टीका लगवाने के लिए फोर्स किया जा रहा है। यह तो वैकल्पिक है।

लेकिन यह जरूर कहा जा रहा है कि अभी-अभी टीका लगवा लो, बाद में टीका लगना मुश्किल हो जाएगा। फिर मौका नहीं मिलेगा। इन बातों से शंकाएं पैदा हुईं। कल दोबारा डॉक्टरों से बात करेंगे। सिर्फ एक ही शक है, कि कहीं हम पर प्रयोग न हो रहा हो। खैर जब डॉक्टर खुद भी टीका लगवा रहे हैं, तभी संदेह खत्म होगा।
शीश पाल, प्रधान वार्ड सर्वेंट एसोसिएशन

डॉक्टरों को खुद पहल करनी होगी...
सफाई कर्मी हो या सिक्योरिटी स्टाफ बस उनका शोषण नहीं होना चाहिए। हम मेडिकल स्टाफ के साथ हंै, लेकिन डॉक्टरों को खुद पहल करनी होगी, ताकि इन लोगों में विश्वास बढ़े और ज्यादा से ज्यादा आगे आकर टीका लगवाएं। मैं खुद इस बारे में हेल्थ सेक्रेटरी से बात कर रहा हूं।
राजेश कालिया, पूर्व मेयर

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