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16 लाख केसों में से 9 लाख का निपटारा:कोरोना काल में दाखिल मामलों में से HC ने 66%, पंजाब ने 61%, चंडीगढ़ ने 70%, और हरियाणा ने 53% याचिकाओं पर सुनाया फैसला

चंडीगढ़10 दिन पहले
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कोरोना के मुश्किल दौर में भी न्याय की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को इंसाफ देने के लिए न्यायधीशों ने ज्यादातर मामलों का निपटारा कर दिया। न्यायालय में लंबित मामलों की संख्या को बहुत अधिक बढ़ने से रोका जा सका और वर्तमान में हाईकोर्ट में कुल लंबित मामलों की संख्या साढ़े 4 लाख है। हाईकोर्ट की ओर से दी गई जानकारी में बताया गया कि कोरोना काल आरंभ होने के बाद 24 मार्च 2020 से 31 अगस्त 2021 तक हाईकोर्ट में 137101 केस दाखिल किए गए, जिनमें से न्यायालय ने 90543 मामलों का निपटारा कर दिया जो लगभग 66 प्रतिशत है।

पंजाब की अदालतों में इस दौरान 723041 केस दाखिल हुए, जिनमें से 442693 का निपटारा कर दिया गया जो 61 प्रतिशत है। हरियाणा की अदालतों में 737718 मामले दाखिल हुए, जिनमें से 393831 मामलों का निपटारा कर दिया गया, जो कि कुल मामलों का 53 प्रतिशत है। यूटी में 39595 केस दाखिल किए गए और चंडीगढ़ के जजों ने 70 प्रतिशत यानि 27767 मामलों का निपटारा कर दिया।

पाबंदियों और चुनौतियों के बीच डटे हैं न्यायधीश
पाबंदियों के दौर में सीमित साधनों के बीच भी न्यायधीशों ने लगन से कार्य किया और लोगों की न्यायपालिका से आस को टूटने नहीं दिया। कोरोना के दौर में अपनी सेवाएं देते हुए कई जज, वकील और न्यायालय के कर्मचारियों को कोरोना ने अपनी चपेट में लिया। इसके बावजूद न्याय प्रदान करने का क्रम नहीं रुका और ज्यादातर मामलों का निपटारा कर दिया गया। हाईकोर्ट ने कहा कि अब फिजिकल सुनवाई का क्रम आरंभ कर दिया गया है और 12 न्यायालय में हाईकोर्ट में फिजिकल सुनवाई आरंभ हो चुकी है। हालात बेहतर होंगे तो कोर्ट की संख्या बढ़ाई जाएगी और लंबित मामलों का और अधिक तेजी से निपटारा हो सकेगा।

7 लाख लंबित मामलों की खबरों का खंडन
हाईकोर्ट पीआरओ ने बताया यह जानकारी गलत है कि हाईकोर्ट में लंबित मामलों की संख्या 7 लाख है। यह आंकड़ा सही नहीं है और ऐसा आंकड़ा कुछ तकनीकी कारणों से नेशनल ग्रिड पर दिखाई दे रहा है जबकि लंबित मामलों की असल संख्या 4.5 लाख है

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