वर्ल्ड डांस डे:कोविड-19 ने रुझान कम किया तो ऑनलाइन ऑप्शन ने संभाला; वर्ल्ड डांस-डे के मौके पिछले साल भी लॉकडाउन था और अब भी हालात खराब हैं

चंडीगढ़6 महीने पहले
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सिटी बेस्ड सीनियर कथक डांसर और प्राचीन कला केंद्र की रजिस्ट्रार डॉ. शोभा कौसर बताती हैं कि जो नए स्टूडेंट्स जुड़ने थे उनकी चाहत का अंदाज़ा इस बात से लगा सकते हैं अनलॉक के बाद जब सेंटर में डांस शुरू हुआ तो उस समय बहुत लोग जुड़े। - Dainik Bhaskar
सिटी बेस्ड सीनियर कथक डांसर और प्राचीन कला केंद्र की रजिस्ट्रार डॉ. शोभा कौसर बताती हैं कि जो नए स्टूडेंट्स जुड़ने थे उनकी चाहत का अंदाज़ा इस बात से लगा सकते हैं अनलॉक के बाद जब सेंटर में डांस शुरू हुआ तो उस समय बहुत लोग जुड़े।

डांस का मतलब है सतत अभ्यास। लगातार प्रैक्टिस करते रहने से ही इसमें अपना मुकाम बनाया जा सकता है। लेकिन कोविड-19 की वजह से पिछले साल इसे सीखने वालों ने मुश्किलों का सामना किया और इस साल फिर से हालात वैसे ही बन गए हैं, जो लोग पहले से सीखते रहे हैं उनके लिए तो ऑनलाइन क्लास एक माध्यम है इसमें आगे बढ़ने का, लेकिन जो बच्चे अभी इस ओर पहला कदम रखने वाले थे वे न केवल लेट हो रहे हैं बल्कि इस बात से परेशान भी कि कहीं वे क्लासिकल डांस के प्रति अपने उत्साह को धीमा न कर लें।

इस डेढ़ साल में क्या चुनौतियां आईं, किस तरह से स्टूडेंट्स ने अपने पिछले छूटे हुए काम को आगे बढ़ाया और आज उनके हालात क्या हैं ? इस पर हमने बात की शहर के कुछ ऐसे लोगों से जो अपने फन के माहिर हैं और इस कला को ट्रेनिंग के जरिए आगे बढ़ा रहे हैं...

नए-पुराने स्टूडेंट्स सीख रहे हैं

कथक और भरतनाट्यम डांसर राहुल गुप्ता ने बताया- मुझे क्लासिकल डांस सिखाते हुए 17 साल हो गए हैं। मैंने देखा है कि कुछ ही स्टूडेंट्स लगातार सीखते हैं और कुछ महीने। ऐसे में नए स्टूडेंट्स आते, लेकिन पुराने चले जाते। पिछले साल से लेकर अब तक जिन नए स्टूडेंट्स ने जुड़ना था वो जुड़े। लेकिन लॉकडाउन से पहले की तुलना की जाए तो ज़्यादा जुड़े।

जितने पूछते हैं सीखने के लिए, उतने नहीं आते

भरतनाट्यम डांसर वरुण खन्ना के मुताबिक पहले जहां जितने नए लोग सीखने के लिए पूछते थे, उतने आ जाते थे। पिछले साल से लेकर अब तक की बात करूं तो अगर 25 नए लोगों ने पूछताछ की, उसमें से 15 ही जुड़े। जिन्हें मैं ऑनलाइन सिखा रहा हूं। अनुभव के आधार पर यही कह सकता हूं कि कोविड में लगने वाली पाबंदियां की वजह से रूझान कम हुआ है। वहीं यह देखने को मिला कि जो कलाकारों का बहुत नाम है, उनसे सीखने की चाहत बहुत लोगों में है। ऐसे में बीच में कोई परेशानी आए तो वह उसे दरकिनार कर देते हैं।

सबमें सीखने की चाहत बहुत बढ़ी है

इसी तरह सिटी बेस्ड सीनियर कथक डांसर और प्राचीन कला केंद्र की रजिस्ट्रार डॉ. शोभा कौसर बताती हैं कि जो नए स्टूडेंट्स जुड़ने थे उनकी चाहत का अंदाज़ा इस बात से लगा सकते हैं अनलॉक के बाद जब सेंटर में डांस शुरू हुआ तो उस समय बहुत लोग जुड़े। फिर से हालात ख़राब हुए तो ऑनलाइन सीखने लगे। चाहे नए हों या पुराने। उनका रूझान कम नहीं हुआ, बल्कि उनकी सीखने की चाहत बढ़ी। क्योंकि यह विजुअल आर्ट है, तो ज़ाहिर है कि आमने-सामने सीखा व सिखाया जाए तो अच्छा रहता है। इमरजेंसी में कुछ समय के लिए ऑनलाइन सही है, पर हमेशा के लिए नहीं।

फिर भी सीखना-सिखाना नहीं छोड़ा

भरतनाट्यम डांसर सुचित्रा मित्रा कहती हैं- पिछले साल लॉकडाउन से लेकर अब तक कई नए स्टूडेंट्स जुड़े, और जो पुराने हैं उन्होंने भी कोविड की वजह से सीखना छोड़ा नहीं है। इसके अलावा जो दूर रहते थे और मेरे पास चाहकर भी सीखने नहीं आ पाते थे, उन्हाेंने भी ऑनलाइन सीखना शुरू किया। यानी रूझान कम नहीं हुआ बढ़ा है। ऑनलाइन मुश्किल लगा पर कुछ समय की ही बात है। फिर तो रूबरू ही सिखाना है।