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नशे को तंदरुस्ती से हराने का संदेश:चंडीगढ़ के साइक्लिस्ट्स ने डेढ़ दिन में किया 260 किमी का सफर तय; 11 साल का बच्चा भी रहा कैंपेन का हिस्सा

चंडीगढ़17 दिन पहले
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चंडीगढ़ से फागू की दूरी 130 किलोमीटर है, जो 8000 फीट पर स्थित है। 25 मेंबर्स में तीन महिलाएं शामिल थी। सबसे छोटा राइडर 11 साल का तन्मय और सबसे बड़े राइडर नितेन्द्र ढिल्लों शामिल हुए। - Dainik Bhaskar
चंडीगढ़ से फागू की दूरी 130 किलोमीटर है, जो 8000 फीट पर स्थित है। 25 मेंबर्स में तीन महिलाएं शामिल थी। सबसे छोटा राइडर 11 साल का तन्मय और सबसे बड़े राइडर नितेन्द्र ढिल्लों शामिल हुए।
  • साइकिल वक्र्स कम्युनिटी के 25 मेंबर्स 3 अप्रैल को साइकिल राइड के लिए निकले थे,उनके वापस आने पर हमने उनके अनुभव जानें

साइकिल राइड से अगर ऐसी जगह जाना हो, जहां का मौसम भी अलग हो और रास्ता भी ऊंचाई वाला हो, तो चैलेंज आते ही हैं। ऐसे रास्ते पर जरूरत से ज्यादा ताकत लगाने से थकान भी महसूस होती है। जब बात दूसरों को प्रेरणा देने व जागरूक करने की आती है तो ध्यान सिर्फ लक्ष्य को पूरा करने में होता है। ऐसा ही अनुभव रहा साइकिल वक्र्स कम्युनिटी के 25 मेंबर्स का। जो 3 अप्रैल को सेक्टर-7 चंडीगढ़ से फागू के लिए निकले और रविवार देर रात 1 बजे वापस आए।

यह साइकिल राइड सिर्फ खुद की फिटनेस के लिए नहीं बल्कि सोशल कॉज को जोड़कर हुई। यह इनिशिएटिव लिया था विक्रांत शर्मा ने। जो कम्युनिटी के फाउंडर मेंबस भी हैं। राइड के जरिए लोगों को नशे से दूर रहने का संदेश दिया गया। इसमें ट्राईसिटी के 25 लोग शामिल हुए। बता दें कि चंडीगढ़ से फागू की दूरी 130 किलोमीटर है, जो 8000 फीट पर स्थित है। 25 मेंबर्स में तीन महिलाएं शामिल थी।

सबसे छोटा राइडर 11 साल का तन्मय और सबसे बड़े राइडर नितेन्द्र ढिल्लों शामिल हुए। उनकी उम्र 58 साल है। चंडीगढ़ से 3 अप्रैल को सुबह 3 बजे सभी रवाना हुए। हर 20 किलोमीटर की दूरी पर ब्रेक लिया। आगे के लिए खुद को तैयार कर पाएं। धर्मपुर, सोलन, कंडाघाट, शिमला होते हुए फागू पहुंचे। रास्ते में सभी को मोटिवेट किया। फागू पहुंचकर वहां के साइक्लिंग क्लब ठियोग पैडल्स के साथ बातचीत की। आते समय भी साइक्लिंग करते हुए ही वापस आए।

ताकत और इच्छा शक्ति खुद से ही मिली

48 वर्षीय डॉ.विजीता बताती हैं कि हिल एरिया में साइक्लिंग करना मुश्किल ताे है ही। लेकिन हम दूसरे लोगों को जागरूक करने के लिए निकले थे और रास्ते में लोग हमें भी मोटिवेट कर रहे थे ऐसे में ताकत और इच्छा शक्ति बढ़ती गई। माैसम एेसा था कि दिन में गरमी तो रात में हल्की ठंड हाे जाती थी। कोविड- 19 की वजह से यह माहौल देखा कि लोग नियमों का पालन कर रहे थे। मैं पांच साल से रूटीन में साइक्लिंग कर रही हूं।

फागू तक पहुंचने से कुछ समय पहले थकान हुई

11 साल के तन्मय रावत के मुताबिक शुरुआत में ताे थकान नहीं हुई, लेकिन फागू तक पहुंचने से कुछ समय पहले थकान हुई तो सोचा कि जब इतना दूर आ चुके हैं तो लक्ष्य तक पहुंचना ही है और लोगों को प्रेरित करना है। वहीं ग्रुप के मेंबर्स ने भी मुझे मोटिवेट किया। लोगों को नशे से दूर रहने के अलावा इस बात के लिए भी प्रेरित करना चाहता हूं कि जब हम इतनी दूर आ सकते हैं तो लोगों को होना चाहिए कि वो घर का सामान लेने या अन्य काम के लिए भी साइकिल का इस्तेमाल करें।

रास्ते में कई मेंबर्स की साइकिल भी खराब हुई

37 वर्षीय विक्रांत शर्मा ने बताया- हिल एरिया में साइक्लिंग करते हुए जब ऊंचाई की ओर बढ़ते हैं तो मुश्किल होती ही है, लेकिन जब वापिस नीचे की तरफ आना हाेना है ताे खुद ही तेजी से उतरते हैं। रास्ते में कई मेंबर्स की साइकिल खराब भी हुई। क्योंकि सड़क पर कई लोगों ने कांच की बोतल फेंकी हुई थी। एक मेंबर की साइकिल टूट गई, पर हमारे पास एक्सट्रा साइकिल और साथ में एक मैकनिक भी था। इसके बावजूद सभी आगे बढ़े और जागरूकता अभियान पूरा किया और वापसी भी साइक्लिंग के जरिए की।

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