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13 करोड़ के एडवर्टाइजमेंट स्कैम का मामला:सेलवेल कंपनी के डायरेक्टर और जीएम पेशी पर नहीं हुए पेश, कोर्ट ने दोनों के अरेस्ट वॉरेंट जारी किए

चंडीगढ़18 दिन पहले
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13 करोड़ रुपए के एडवर्टाइजमेंट स्कैम में आरोपी सेलवेल कंपनी के डायरेक्टर जिम्मी के सुबावाला और जनरल मैनेजर विश्वदीप दत्ता के खिलाफ सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने नॉन बेलेबल वॉरेंट ऑफ अरेस्ट जारी कर दिए हैं। ये दोनों आरोपी बुधवार को कोर्ट में पेश नहीं हुए। 7 साल पहले नगर निगम में विज्ञापन लगवाने के नाम पर करोड़ों रुपए का घोटाला उजागर हुआ था।

उस घोटाले में सीबीआई ने जांच की और नगर निगम के रिटायर्ड सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर आरसी दीवान, सेलवेल कंपनी के डायरेक्टर जिम्मी सुबावाला, जनरल मैनेजर विश्वदीप दत्ता और आउटडोर कम्युनिकेशन कंपनी के डायरेक्टर मयसा गणेश के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। लेकिन इस केस की कार्रवाई पर 2016 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्टे लगा दी थी। आरोपियों ने एफआईआर रद्द करने की याचिका दायर की थी।

लेकिन ये याचिका हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों से खारिज हो गई। जिसके बाद सीबीआई कोर्ट में लगी स्टे भी हो गई है और सीबीआई कोर्ट ने सभी आरोपियों को पेश होने के लिए समन किया था। बुधवार को बाकी आरोपी तो पेश हो गए लेकिन सुबावाला और दत्ता पेश नहीं हुए। अब मामले की सुनवाई 11 अक्टूबर को होगी।

ऐसे लगाया था नगर निगम को करोड़ों का चूना
आरोप के मुताबिक पूर्व सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर आरसी दीवान और सेलवेल-आउटडोर कंपनियों की मिलीभगत से नगर निगम को करोड़ों का चूना लगा था। जहां नगर निगम ने विज्ञापन से कमाई करनी थी, उल्टा कंपनियों को ही करोड़ों रुपए लूटा दिए। निगम ने शहर के 86 पब्लिक टॉयलेट ब्लॉक्स और 13 कनेक्टिंग पैसेज पर विज्ञापन लगाने के लिए सेलवेल व आउटडोर कम्युनिकेशन कंपनियाें काे टेंडर दिया।
नियम के मुताबिक कंपनी काे विज्ञापन लगाने के लिए नगर निगम काे एडवर्टाइजमेंट फीस और लाइसेंस फीस देनी थी जोकि करोड़ों में बनती थी। लेकिन आरोपियों की मिलीभगत से टेंडर की शर्तें बदल दी गई और नई शर्तों के मुताबिक कंपनी को एडवर्टाइजमेंट फीस और लाइसेंस फीस माफ कर दी गई। उल्टा नगर निगम ने कंपनियों को हर महीने पब्लिक टॉयलेट की मेंटीनेंस के लिए 8800 रुपए देना शुरू कर दिया। ये खेल 5 साल तक चलता रहा और नगर निगम ने कंपनियों को करोड़ों रुपए लूटा दिए।

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