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बेहतरीन काम के लिए रिकग्निशन:PGI के डॉक्टर पिनाकी दत्ता को मिला प्रेस्टिजियस सुभाष मुखर्जी ओरेशन अवॉर्ड

चंडीगढ़6 दिन पहले
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डॉ. पिनाकी दत्ता PGI में दूसरी फैकल्टी हैं जिन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। - Dainik Bhaskar
डॉ. पिनाकी दत्ता PGI में दूसरी फैकल्टी हैं जिन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
  • एंडोक्राइन सोसायटी ऑफ इंडिया ने इन्हें इस सम्मान से नवाजा है
  • डाॅ. सुभाष मुखर्जी ने भारत में पहली टेस्ट ट्यूब बेबी का जन्म कराया था

PGI में एंडोक्रिनोलाॅजी विभाग में प्रोफेसर पिनाकी दत्ता को 2020 के लिए प्रेस्टिजियस सुभाष मुखर्जी ओरेशन से नवाजा गया है। यह सम्मान इन्हें अप्लाइड एंडोक्रिनोलॉजी के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए एंडोक्राइन सोसायटी ऑफ इंडिया द्वारा दिया गया है। भारत में पहले टेस्ट ट्यूब बेबी के पायनियर डॉ. सुभाष मुखर्जी की याद में एंडोक्राइन सोसायटी ऑफ इंडिया ने इस सम्मान को संस्थापित किया था। साल 1990 में तपन सिन्हा द्वारा निर्देशित बॉलीवुड फिल्म, ‘एक डॉक्टर की मौत’ डा. सुभाष मुखर्जी के जीवन से प्रेरित फिल्म है। इस फिल्म को कई नेशनल अवॉर्ड मिल चुके हैं।

डॉ. पिनाकी दत्ता PGI में दूसरी फैकल्टी हैं जिन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इससे पहले, एंडोक्रिनोलॉजी विभाग के पूर्व हेड प्रो. आरजे डैश को इस विशिष्ट सम्मान से सम्मानित किया गया था। नेशनल और इंटरनेशनल जर्न्लस में डॉ. पिनाकी दत्ता के 250 से अधिक प्रकाशन हैं। इससे पहले इन्हें यंग इन्वेस्टिगेटर अवार्ड 2005- पिट्यूटरी कांग्रेस-सैन डाइगो (US) और DST-UKIERI अवार्ड 2014 मिल चुके हैं।

पिट्यूटरी और थायराइड के क्षेत्र में अहम दिलचस्पी होने के बाद डॉ. पिनाकी ने बेरहामपुर मेडिकल कॉलेज से MBBS करने के बाद 1998 में PGI में रेजिडेंट डॉक्टर के तौर पर जॉइन किया था। इसके बाद वे 2004 में फैकल्टी बन गए और इन्हें एंडोक्रिनोलॉजी में 20 साल के अधिक का टीचिंग एक्सपीरियंस है।

डॉ. सुभाष मुखर्जी।
डॉ. सुभाष मुखर्जी।

टेस्ट ट्यूब बेबी की नई तकनीक बताई थी डाॅ. सुभाष मुखर्जी ने

झारखंड के हजारीबाग में जन्मे डाॅ. सुभाष मुखर्जी की कहानी एक प्रतिभा के अवसान की है। लेकिन प्रतिभा कभी दीर्घकाल के लिए विस्मृत नहीं हो सकती है और न ही प्रतिभा को अंधेरे में कैद किया जा सकता है। डाॅ. सुभाष ने अपने सहयोगियों के साथ तीन अक्टूबर 1978 को भारत के कोलकाता में IVF प्रणाली से पहली टेस्ट ट्यूब बेबी दुर्गा जिसका दूसरा नाम कनुप्रिया अग्रवाल है को जन्म कराया। डाॅ. सुभाष ने मानव भ्रूण को बचाने के लिए क्रियोप्रेशरेशन नामक एक विधि का उपयोग किया था उनकी यह विधि वर्तमान में दुनियाभर में चिकित्सकीय सहायता प्रजनन की पसंदीदा तकनीक है।

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