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  • Dr. Uttam Said Do Not Suffer Silently While Having BPH, The Most Common Prostate Problem Is BPH (without Prostatic Hyperplasia).

स्वास्थ्य:डाॅ. उत्तम ने कहा -बीपीएच होने पर चुपचाप कष्ट न सहें, प्रोस्टेट से जुड़ी सबसे आम समस्या बीपीएच (बिनाईन प्रोस्टेटिक हाईपरप्लेसिया) है

चंडीगढ़8 महीने पहले
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बिनाईन प्रोस्टेटिक हाईपरप्लेसिया - Dainik Bhaskar
बिनाईन प्रोस्टेटिक हाईपरप्लेसिया

बीपीएच (बिनाईन प्रोस्टेटिक हाईपरप्लेसिया) उम्र बढऩे के साथ प्रोस्टेट ग्रंथि में होने वाली नॉन-कैंसरस वृद्धि है, जिससे पेशाब का बहाव रुक सकता है और काफी पीड़ादायक लक्षण उत्पन्न होते हैं। किफायती एवं सुरक्षित दवाई तथा सर्जिकल की तकनीकों की उपलब्धता से देश के कोने-कोने में लाखों मरीजों के लिए बीपीएच का इलाज बहुत आसान व सुलभ हो गया है।

शुरू में सामान्य होने वाले ये लक्षण समय के साथ बढ़ जाते हैं और रात में बार बार पेशाब आने, पेशाब को न रोक पाने या फिर पेशाब करने की इच्छा और टॉयलेट पहुंचने से पहले ही पेशाब निकल जाने जैसे गंभीर लक्षणों में परिवर्तित हो काफी कष्टदायक हो जाते हैं। समय पर इलाज एवं तत्काल इलाज व्यक्ति और समाज को बीपीएच से जुड़े रोगों से आराम देने के प्रमाणित तरीके हैं और बीपीएच के लक्षणों व जटिलताओं की गंभीरता एवं आवृत्ति में कमी लाते हैं।

40 से अधिक उम्र के 60% से ज्यादा पुरुषों को सामान्य से गंभीर लक्षण तक...

डाॅ. उत्तम मेटे, यूरोलॉजी डिपार्टमेंट, पीजीआई ने बीपीएच के बारे में बताते हुए कहा है कि प्रोस्टेट से जुड़ी सबसे आम समस्या बीपीएच (बिनाईन प्रोस्टेटिक हाईपरप्लेसिया) है। 40 साल या उससे अधिक उम्र के 60 फीसदी से ज्यादा पुरुषों को बीपीएच के सामान्य से लेकर गंभीर लक्षण तक होते हैं।

इस बीमारी के मुख्य लक्षण हैं दिन में बार-बार पेशाब आना, रात में पेशाब करने के लिए बार-बार उठना, या सोते हुए पेशाब निकल जाना, पेशाब करने में मुश्किल होना तथा पेशाब करने के बाद भी ब्लेडर पूरी तरह से खाली न महसूस होना।

मरीजों की क्वालिटी लाइफ पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है...

मरीज इन लक्षणों का इलाज स्वयं करने की कोशिश करता है, जैसे वह पानी या अन्य तरल चीजें लेना कम करता है, लंबी आउटडोर यात्रा पर जाने से पहले आदतन पेशाब करता है या सोते समय पेशाब लगने के संकेतों के लिए अत्यधिक सचेत रहने लगता है और जहां कहीं भी वह जाए, सबसे पहले टॉयलेट तलाशता है।

इन सभी से जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है। पेशाब रोकने में होने वाली परेशानियों, पेशाब की नली में संक्रमण या पथरी और दुर्लभ स्थिति में दोनों किडनी के खराब होने से मरीजों की क्वालिटी लाइफ पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है।

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