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अच्छर सिंह का बुरा काम:5 साल सजा होने के बाद भी सीएचबी में 25 साल करता रहा नौकरी, अब डिसमिस

चंडीगढ़4 महीने पहलेलेखक: योगराज सिंह
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  • 11 मई 2021 को दैनिक भास्कर में छपी खबर के बाद सीएचबी को पता चला

चंडीगढ़ साल 1996, तारीख 23 फरवरी। जगह हिमाचल प्रदेश के जोगिंद्र नगर तहसील में आता गांव खिल। यहां पर शादी समारोह के दौरान झगड़ा हुआ और इस दौरान एक महिला की हत्या हो गई, जबकि उसके पति बेली राम को गंभीर चोटें आई। इस मामले में आरोपी अच्छर सिंह को बाद में हाईकोर्ट से सजा हो गई, लेकिन अच्छर सिंह पिछले 25 साल से चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड में बतौर जूनियर टेक्नीशियन नौकरी करता रहा।

इस बात का पता जब सीएचबी के अफसरों को लगा तो अच्छर सिंह को तुरंत प्रभाव से डिसमिस कर दिया। हत्या के 25 साल पुराने मामले की एक खबर दैनिक भास्कर में 11 मई को प्रकाशित हुई थी। यह खबर पढ़कर ही सीएचबी के अफसरों को पता चला कि उनके कर्मचारी अच्छर सिंह को हत्या के केस में सजा हुई है।

नौकरी से निकालने के अलावा सीएचबी ने इस जूनियर टेक्नीशियन की ग्रेजुएटी और लीव इनकैशमेंट को भी नहीं देने का फैसला किया है। सूत्रों के अनुसार दोषी को पिछले सालों में दी गई सैलरी की भी रिकवरी हो सकती है।

डेलिवेजेज के तौर पर हुआ था नियुक्त

11 सितंबर 1987 को अच्छर सिंह डेलिवेजेज के तौर पर नियुक्त हुआ था। 28 मई 1997 को उसे वर्क चार्ज के तौर पर जूनियर टेक्निशयन के तौर पर लगाया गया। इसके बाद 1 मार्च 2019 को उसकी सर्विसेज को इसी पोस्ट पर रेगुलराइज कर दिया गया।

आरोप-कुल्हाड़ी मार एक को किया था जख्मी 25 साल पहले हिमाचल के जोगिंदर नगर तहसील में आते गांव खिल में शादी के दौरान झगड़ा हुआ था। मारपीट में महिला स्वरी देवी की मौत हो गई थी, जबकि उसके पति बेली राम गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे।

आरोप थे अच्छर सिंह ने ही बेली राम पर कुल्हाड़ी से हमला किया था। 12 मई 2010 को शिमला हाईकोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाया, जिसमें अच्छर सिंह को धारा 452, 326 और 323 के तहत दोषी पाया गया। उसे 5 साल की सजा सुनाई गई। इसके बाद 7 मई 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा।

सुनवाई का दिया मौका, लिखित में नहीं दिया जवाब

11 मई को सस्पेंड करते हुए सीएचबी ने अच्छर सिंह को शोकाॅज नोटिस जारी किया था। अच्छर सिंह ने 19 मई को कहा कि उसे गलत तरीके से मामले में फंसाया गया है। वह शादी में शामिल हुआ था, लेकिन इस अपराध के वक्त मौके पर नहीं था। सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन भी फाइल की गई है, लेकिन वह अभी पेंडिंग है।

उसने यह जवाब नहीं दिया कि उसने 25 साल से इस क्रिमिनल केस के बारे में सीएचबी को जानकारी क्यों नहीं दी। उसे लिखित में जवाब देने के लिए कहा गया, लेकिन उसने 27 मई तक का समय मांगा। लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए बोर्ड के सीईओ ने उसे नौकरी से तुरंत प्रभाव से डिसमिस करने के निर्देश जारी कर दिए।

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