थर्ड वेव से डरना नहीं, पर सावधानी जरूरी:एक्सपर्ट बोले- सीरो सर्वे में 60% से ज्यादा इम्युनिटी आई; ओमिक्राॅन वेरिएंट सिर्फ गले तक सीमित

चंडीगढ़16 दिन पहले
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‘चंडीगढ़ के लाेग काेविड के इस दाैर में सबसे सुरक्षित हैं। पहले स्तर पर वह लाेग सुरक्षित हैं जिनकाे पहले नैचुरल इंफेक्शन हाे चुका है और दूसरे स्तर पर वह लाेग हैं जिनका वैक्सीनेशन पूरा हाे गया है। सीवियरिटी और डेथ, दाेनाें से ही वह ओमिक्रॉन के इस दाैर में सुरक्षित माने जाएंगे।’ यह कहना है ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) में सेंटर फॉर कम्युनिटी मेडिसिन के डॉ. संजय के राय का। वह उस टीम को लीड कर रहे थे जिन्होंने देश में वैक्सीन का ट्रायल करके रिलीज कराया।

डॉ. राय कहते हैं- अब तक हुई रिसर्च के अनुसार वैक्सीन सीवियरिटी और डेथ को रोकने में कायमाब हैं, लेकिन इंफेक्शन रोकने में बिल्कुल भी कारगर नहीं हैं। लेकिन नैचुरल इंफेक्शन के बाद इंफेक्शन कम होता है। यदि रीइंफेक्शन होता है, तो भी सीवियर यानी गंभीर नहीं होता। मई तक का डाटा यूके ने रिलीज किया था कि 40 लाख लोगों को इंफेक्शन हुआ था, जिसमें से 53 को रीइंफेक्शन हुआ, इनमें कोई भी सीवियर नहीं था।

यादि नैचुरल इम्युनिटी सबसे बेहतर है, जो बाकी कई स्टडीज में भी साबित हुई है। फुली वैक्सीनेटेड को इन्फेक्शन के यूके में अब 40 हजार तक के केस हैं लेकिन इनमें सीवियरिटी और डेथ नहीं है। इस समय चंडीगढ़ में भी केस बढ़ेंगे लेकिन अब हाई लेवल ऑफ हॉस्पिटल एडमिशन या डेथ का खतरा नहीं है। सब बंद करने का फैसला तभी लें जब स्थिति गंभीर हो।

सिर्फ उन्हीं को बीमार या इंफेक्शियस समझें जिनको सिम्टम हैं
मेजॉरिटी लोगों को इंफेक्शन होगा। डेल्टा के जरिए मिली स्ट्रॉन्ग इम्युनिटी के कारण हम वायरस के मौजूदा स्वरूप को झेल रहे हैं। चंडीगढ़ में सीरो सर्वे के नतीजे में 60 फीसदी से ज्यादा इम्युनिटी आई थी, इसलिए यहां पर नुकसान नहीं होगा। अभी तक ओमिक्रॉन में ऐसा खतरा सामने नहीं आया है। बार-बार हाथ धोने के लिए इसीलिए कहा जाता है क्योंकि हाथ से इंफेक्शन अंदर ना जाए। इंफेक्शन तो इस समय सब जगह होगा और जितनी टेस्टिंग होगी, उतने ही पॉजिटिव होंगे, बहुत से एसिम्टोमैटिक होंगे। सिर्फ उन्हीं को बीमार या इंफेक्शियस समझें जिनको सिम्टम हैं, बाकी आरटीपीसीआर में तो डेड वायरस भी पकड़ में आ जाता है।

चेस्ट तक असर नहीं करता वायरस
‘शहर में थर्ड वेव के साथ ही जाे मरीज आ रहे हैं जिस रफ्तार से केसाें में इजाफा हाे रहा है, उससे साफ है कि यह ओमिक्राॅन ही है। इससे पहले सेकंड वेव में डेल्टा वेरिएंट से पीड़ित 1 मरीज के संपर्क में आए दाे-तीन मरीज संक्रमित हाे रहे थे। ओमिक्राॅन वेरिएंट का ट्रांसमिशन रेट ज्यादा है। इसमें एक संक्रमित मरीज के संपर्क में आने वाले 8 से 10 लाेग संक्रमित हाे रहे हैं। हालांकि इस वेरिएंट में मरीज जल्दी ठीक हाे रहे हैं।

हाेम आइसोलेशन भी घटाकर सात दिन कर दिया गया है।’ यह कहना है पीजीआई के डिपार्टमेंट ऑफ इम्यूनाेपैथाेलाॅजी के प्राे. सुनील अराेड़ा का। उन्होंने बताया- ओमिक्रॉन वेरिएंट का कैरेक्टर अलग है। वह फेफड़ाें के सेल्स काे ज्यादा प्रभावित नहीं करता। इसलिए इस वेरिएंट से पीड़ित मरीज गंभीर रूप से बीमार नहीं हाेते। यह ज्यादातर गले में या अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक में रहता है।

यह नाक, गले और सांस की नली तक ही सीमित रहता है। सेकंड वेव में यह वायरस लंग्स काे ज्यादा असर कर रहा था। उससे फेफड़ाें में साइटाेकाइन स्टाॅर्म जेनरेट हाेता था, जिससे लंग्स में इंफ्लेमेशन बढ़ जाती थी। सांस लेने में दिक्कत ज्यादा हाे रही थी। इसलिए लाेग ज्यादा गंभीर रूप से बीमार हाेते थे, ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती थी। ओमिक्राॅन वेरिएंट से संक्रमित मरीज ज्यादा गंभीर रूप से बीमार नहीं हाेते लेकिन संक्रमण का फैलाव ज्यादा है। ज्यादा खतरा पहले से बीमार लाेगाें काे है।

भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें
इस वेरिएंट में यह बात देखने में आ रही है जाे फुली वैक्सीनेटेड लाेग हैं उन्हें हॉस्पिटल जाने की जरूरत कम पड़ रही है। जाे हाॅस्पिटल में एडमिट भी हैं उन्हें भी माइल्ड सिम्टम हैं। अगर किसी काे संक्रमण हाे भी रहा है ताे उसे घबराने की जरूरत नहीं है। डाॅक्टर की सलाह के अनुसार इलाज कराएं। अभी तक के जाे मरीज आ रहे हैं।
वह 4 से 5 दिन में ठीक हाे रहे हैं। अगर मामूली सिम्टम नजर आते हैं ताे अपने आपकाे आइसोलेट कर लें। वैक्सीन के अलावा काेविड प्राेटाेकाॅल का पालन जरूर करें। मास्क जरूर पहनकर रखें। भीड़भाड़ वाली जगहों से बचें। अगर जाना भी पड़े ताे मास्क जरूर पहनकर रखें। किसी से हाथ न मिलाएं।

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