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ट्राईसिटी में किताबों के लिए जद्दोजहद:चंडीगढ़ में प्राइवेट स्कूलों के स्टूडेंट की किताबों के लिए परिजन को लगानी पड़ रही कोरोना दौर में लंबी लाइनें

चंडीगढ़10 दिन पहले
ट्राईसिटी के प्राइवेट स्कूलों की किताबें शहर के एक बुक शॉप पर मिलती है। जिससे लाेगों को लाइनें लगाकर खरीदनी पड़ती है। फोटो लखवंत सिंह
  • परिजनों का कहना- हर साल स्कूल वाले ऐसी किताबें लाने को कहते है जो केवल एक दुकान पर ही मिलती है
  • ट्राईसिटी के स्कूल वाले चंडीगढ़ की सेक्टर-18 में एक दुकान पर भेजते किताब लाने के लिए

(लखवंत सिंह). ट्राईसिटी में एक बार फिर स्टूडेंट के परिजन अपने बच्चों की किताबों को लेकर परेशान हो रहे है। किताब खरीदने आए परिजनों का कहना है कि स्कूल वालों की ओर से हर साल ऐसी किताबें सिलेबस में पढ़ाई जाती है जो केवल एक दुकान पर ही मिलती है। जिस कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। किताबों को लेने के लिए शहर की एक बुक शॉप पर लंबी लाइन लगी हुई है।

शहर की एक दुकान पर किताब खरीदने वालों की लाइन
शहर की एक दुकान पर किताब खरीदने वालों की लाइन

परिजन ने कहा एक दुकान पर मिलती किताबें

परिजन का कहना है कि कोरोना महामारी के बीच लंबी लाइन के बीच घंटों खड़े होकर किताबें लेने के समय किसी को भी संक्रमण हो सकता है। एक परिजन ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश है कि स्कूलों की किताबें किसी भी दुकान से खरीद सकते है लेकिन स्कूलों की ओर से जानबूझ कर ऐसी किताबों की लिस्ट थमाई जाती है जो शहर की एक दुकान पर ही उपलब्ध होती है। इस कारण ट्राईसिटी के एक कोने से चल कर चंडीगढ़ के सेक्टर-18 की इस दुकान पर आकर लेनी पड़ती है।

लोगों ने कहा स्कूल वाले जानबूझ कर एक वेंडर रखते है जहां किताबें मिलती है
लोगों ने कहा स्कूल वाले जानबूझ कर एक वेंडर रखते है जहां किताबें मिलती है

कोरोना संक्रमण में लंबी लाइनें

किताबें लेने आए सुमित सहित कई लाेगाें ने कहा कि हर साल स्कूल की ओर से एक ही वेंडर रखा जाता है, जहां से आकर किताबें खरीदनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि संक्रमण के इस काल में हम कैसे सोशल डिस्टेंसिंग कायम रख सकते है। उन्होंने कहा कि किताबें लेने के लिए एक-एक व्यक्ति को दो घंटे से अधिक लग रहे है। उन्होंने कहा कि प्रशासन सोशल डिस्टेंसिंग रखने के लिए कह रहा है लेकिन इस बुक शॉप पर लोगों की लाइन लगी हुई है।

दुकान के सामने किताब खरीदने वालों की लाइन
दुकान के सामने किताब खरीदने वालों की लाइन

ट्राईसिटी के स्कूलों की किताबें चंडीगढ़ से लेनी पड़ रही

ट्राईसिटी के नामी गिरामी प्राइवेट स्कूलों की ओर से वैसी किताबों की लिस्ट परिजनों को थमाई जाती है जो उनके इलाके की बुक शॉप पर नहीं मिलती । उन्हें समय निकाल कर सेक्टर-18 की मनचंदा बुक शॉप पर आकर लेनी पड़ती है।ट्राईसिटी के नामी स्कूलों में हजारों की संख्या में बच्चे पढ़ते है ऐसे में सैकड़ों की संख्या में परिजन बुक शॉप पर पहुंचते है जिन्हें काफी समय किताबें खरीदने में लगाना पड़ता है।

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