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आवास आवंटन को रद्द करने का फैसला:चंडीगढ़ प्रशासक के पूर्व सलाहकार मनोज परिदा को हाइकोर्ट से मिली राहत, कार्रवाई की मांग वाली अर्जी खारिज

चंडीगढ़3 महीने पहले
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चंडीगढ़ प्रशासक के पूर्व सलाहकार मनोज परिदा। - Dainik Bhaskar
चंडीगढ़ प्रशासक के पूर्व सलाहकार मनोज परिदा।

चंडीगढ़ के प्रशासक बीपी सिंह बदनौर के पूर्व सलाहकार मनोज परिदा को हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। पंजाब के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव व वर्तमान में फूड कमीशन के चेयरमैन डीपी रेड्डी द्वारा मनोज परीदा व हाऊस अलॉटमेंट कमेटी के सचिव विनोद पी कावले के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली अर्जी को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए रेड्डी ने सेक्टर-7 स्थित उनके आवास के आवंटन को रद्द करने के फैसले को चुनौती दी थी।

याचिका में बताया गया कि 2018 में उन्होंने पंजाब के अतिरिक्त मुख्य सचिव पद से समय से पहले सेवानिवृत्ति ले ली थी। इसके बाद उन्होंने पंजाब फूड कमीशन में चेयरमैन के तौर पर ज्वाइन किया था। नियुक्ति के बाद उन्होंने प्रशासन को रिप्रेजेंटेशन देते हुए जिस मकान में रह रहे हैं उसी को उन्हें आवंटित किए जाने की मांग की थी। प्रशासन की कमेटी ने उनकी मांग को खारिज कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने दोबारा रिप्रेजेंटेशन दी जिसे फिर से खारिज कर दिया गया।

इस दौरान उन्हें नोटिस देते हुए प्रशासन की कमेटी ने कहा कि पहले वह पुराना आवास खाली करें फिर नए सिरे से आवेदन करें। चंडीगढ़ प्रशासन ने कहा था कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति के नियम के अनुसार वह सरकारी आवास के लिए नहीं बल्कि उनके मूल वेतन के 30 प्रतिशत राशि के मकान भत्ते के हकदार हैं। उच्च न्यायालय ने सभी पक्षों को सुनने के बाद याची द्वारा दी गई रिप्रेजेंटेशन को कमेटी के समक्ष रखने और अगले एक माह में उन्हें उनके वर्तमान आवास को पुन: आवंटित करने या फिर उनकी श्रेणी के अनुरूप उच्च श्रेणी का मकान अलॉट करने पर 1 माह के भीतर निर्णय लेने के आदेश दिए थे।

अब उन्होंने अर्जी दाखिल कर बताया कि 4 मई 2021 को हाऊस अलॉटमेंट कमेटी ने 23,16,298 रुपये की देनदारी दिखा दी है। याची ने कहा कि हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि जब तक कमेटी उनके मांग पत्र पर निर्णय नहीं लेती है तब तक यथा स्थिति रहेगी, लेकिन इस प्रकार का निर्णय कोर्ट के फैसले के खिलाफ जाकर लिया गया है। ऐसे में परीदा और कावले पर कार्रवाई होनी चाहिए। हाईकोर्ट ने अर्जी को खारिज करते हुए कहा कि यदि याची चाहे तो वह इस देनदारी के आदेश को नई याचिका के माध्यम से चुनौती दे सकते हैं।

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