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पंजाब के पूर्व DGP के पीए गिरफ्तार:चंडीगढ़ पुलिस आज कोर्ट में करेगी पेश; सिद्धार्थ चटोपाध्याय के फर्जी दस्तखत करके पुलिसकर्मियों को प्रमोशन देने का मामला

चंडीगढ़5 महीने पहले
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पुलिस की गिरफ्त में फर्जीवाड़ा करने वाले आरोपी। - Dainik Bhaskar
पुलिस की गिरफ्त में फर्जीवाड़ा करने वाले आरोपी।

पंजाब के पूर्व डीजीपी सिद्धार्थ चटोपाध्याय के फर्जी दस्तखत करके पुलिसकर्मियों को फर्जी प्रमोशन देने के मामले में एक और गिरफ्तारी हुई है। मामले में पूर्व डीजीपी के पर्सनल असिस्टेंट (पीए) कुलविंदर सिंह को गिरफ्तार किया गया है। उसे सेक्टर 3 थाना पुलिस शनिवार को कोर्ट में पेश करके रिमांड की मांग करेगी। इससे पहले 5 आरोपी पुलिस के रिमांड पर चल रहे हैं।

यह रोल निकल कर आ रहा सामने

सूत्रों की मानें तो इस फर्जीवाड़े के बारे में कुलविंदर को सारी जानकारी थी। उसने मामले में आरोपियों द्वारा अंजाम दी गई इस घपलेबाजी में मदद भी की थी। उसने मामले में अहम आरोपी हरविंदर सिंह का फर्जी प्रमोशन आदेश जारी करने में उसकी सहायता की थी। हालांकि फर्जीवाड़े में उसकी भूमिका का खुलासा पुलिस रिमांड के दौरान होगा। फिलहाल पुलिस इस बारे में कुछ कहने को तैयार नहीं है। चटोपाध्याय से पूर्व डीजीपी रहे इकबाल प्रीत सिंह सहोता के पीए के रुप में कुलविंदर ने अपनी सेवाएं दी थीं। इसके बाद जब चटोपाध्याय को डीजीपी बनाया गया तो वह उनके साथ अटैच हो गया था।

सीनियर पुलिस अफसर का भी रोल आ रहा सामने

हालांकि इस हाई प्रोफाइल मामले में पुलिस संवेदनशील जानकारी सांझा करने से बच रही है। फिर भी सूत्र बता रहे हैं कि मामले में एक सीनियर पुलिस अफसर का रोल भी सामने आ रहा है। वहीं मामले में आरोपी भी बड़े आईपीएस अफसर के साथ अपने अच्छे संबंधों की बात कह चुका है। ऐसे में और गिरफ्तारियां होने की भी संभावना है। एसएसपी कुलदीप सिंह चहल भी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केस को बारीकी से देख रहे हैं।

कुछ और लाभार्थियों का नाम आ सकता है सामने

पुलिस सूत्रों की मानें तो शुक्रवार को एसआईटी ने आरोपी सतवंत के सेक्टर 51 स्थित घर से एक लैपटॉप भी बरामद किया है। वहीं कुछ डॉक्यूमेंट भी यहां से मिले हैं। आरोपियों ने रिमांड के दौरान काफी कुछ बताया है, जिसे लेकर पुलिस के सामने कुछ और लाभार्थियों के नाम का भी खुलासा हो सकता है। मामले में एक एसआई हरविंद्र सिंह का नाम भी सामने आ रहा है। उसकी तलाश में पुलिस की छापामारी लगातार जारी है।

पांचों आरोपियों की भूमिका

मामले में अब तक पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जो इस फर्जीवाड़े में सक्रिय रूप से शामिल थे। इनमें फेज 6 का संदीप कुमार(55) है, जो पंजाब पुलिस की जीपी फंड ब्रांच में सुपरिंटेंडेंट था। उसने सह आरोपी मनी कटोच के साथ मिल कर लैपटॉप से फर्जी आदेश जारी किए थे। वह वर्ष 2010 में भ्रष्टाचार के एक मामले में आरोपी रह चुका है। एक आरोपी 52 वर्षीय बहादुर सिंह पुलिस विभाग में सुपरिंटेंडेंट था। उसने अपनी ब्रांच में डिस्पैच रजिस्टर में एंट्री की थी। तीसरा आरोपी मनी कटोच (33) फेज 6 मोहाली में रहता है और उसने सह आरोपी संदीप कुमार के साथ मिल कर उसके कहने पर फर्जी ऑर्डर तैयार किए थे।

चौथा आरोपी पंजाब पुलिस से बर्खास्त सब इंस्पेक्टर मोहाली फेज 3बी2 निवासी सर्बजीत सिंह (47) है। उसने दावा किया है कि उसके पूर्व डीजीपी के साथ अच्छे संबंध थे। उसके खिलाफ ड्रग का एक केस दर्ज किया गया था। वहीं पांचवा आरोपी फाजिल्का का 48 वर्षीय सतवंत सिंह है, जो मोहाली में साइबर सेल में इंस्पेक्टर है। उसने सर्बजीत सिंह के साथ मिल कर संदीप कुमार और हवलदार मनी कटोच की मदद से फर्जी ऑर्डर तैयार करवाए थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से फर्जी ऑर्डर, संदीप कुमार का लैपटॉप, मोबाइल फोन, डिस्पैच रजिस्टर और कार बरामद की थी।

पूर्व डीजीपी से अच्छे संबंधों की बात कह चुके हैं आरोपी

सतवंत सिंह और सर्बजीत सिंह ने पुलिस के सामने कबूला था कि उनके पूर्व डीजीपी के साथ अच्छे संबंध थे। उन्होंने लाभार्थी पुलिसकर्मियों को आश्वासन दिया था कि उनके प्रमोशन ऑर्डर जारी करवा देगें। इसके बाद यह दोनों सर्बजीत के स्थान पर मीटिंग किया करते थे और जीपी ब्रांच के सुपरिंटेंडेंट संदीप कुमार के सहयोग से जाली ऑर्डर संदीप कुमार के लैपटॉप पर तैयार करवाए। हवलदार मनी कटोच ने यह टाइप किए थे। संदीप कुमार ने यह फर्जी ऑर्डर सतवंत सिंह को दिए जो पूर्व डीजीपी के फर्जी दस्तखत करवाने में सफल रहा। इसके बाद संदीप कुमार ने बहादुर सिंह की मदद से डिस्पैच रजिस्टर में एंट्री करवाई और उसे सर्कुलेट कर दिया।

4 फर्जी प्रमोशन ऑर्डर मिलने पर करवाया था केस दर्ज

धोखाधडी़, जालसाजी और आपराधिक साजिश रचने की धाराओं में सेक्टर 3 थाने में केस दर्ज किया गया था। मामले में शिकायतकर्ता पीपीएस अधिकारी विभोर कुमार हैं, जो पूर्व डीजीपी चटोपाध्याय के स्टाफ अफसर थे। इस पीपीएस अफसर को ही शुरुआत में यह 4 फर्जी ऑर्डर मिले थे। इन ऑर्डर के आधार पर पंजाब पुलिस के कुछ कर्मियों को प्रमोशन/भर्ती दी गई थी। एसपी(सिटी) केतन बंसल की अगुवाई में चंडीगढ़ पुलिस ने एसआईटी गठित की थी।

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