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वाह रे नगर निगम:गोलमाल: महीने में दो घंटे जाती है बिजली, लेकिन एमसी जेनरेटर चलाने में खर्च कर रहा है 4800 लीटर डीजल

मनीमाजरा4 महीने पहले
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  • मनीमाजरा के दो वॉटर वर्क्स को बिजली न होने की स्थिति में चलाने के लिए लगाए हैं दो जेनरेटर

(मंजीत सहदेव) नगर निगम के मनीमाजरा स्थित दो वॉटर वर्क्स में डीजल को लेकर बड़ा गोलमाल हो रहा है। यहां पर नगर निगम ने दो वॉटर वर्क्स को बिजली न होने की स्थिति में चलाने के लिए दो जेनरेटर लगाए गए हैं। हैरानी की बात है कि यहां महीने में करीब दो घंटे ही बिजली जाती है, इसके बावजूद दोनों जेनरेटर में एक महीने में 48 लीटर डीजल खर्च हो रहा है। बिजली कम जाने के बावजूद इतना डीजल कहां खर्च हो रहा है, इसको लेकर नगर निगम के अफसरों के पास स्पष्ट जवाब नहीं है।

कभी कोई बहाना लगाते हैं तो कभी कुछ कहते हैं। भास्कर ने मामले में पड़ताल की तो हैरान करने वाले तथ्य सामने आए हैं। नगर निगम हर चार दिन बाद ट्यूबल चलाने के लिए 200 लीटर डीजल खरीदता है ताकि यदि बिजली सप्लाई बंद हो तो जेनरेटर चलाए जा सके। सामने आया है कि मनीमाजरा एरिया में बिजली सप्लाई महीने में दो घंटे से अधिक बंद नहीं रहती, फिर इतनी मात्रा में चौथे दिन 200 लीटर डीजल की जरूरत क्यों पड़ रही है।  निगम का पब्लिक हेल्थ विंग मनीमाजरा में हर महीने दोनों वॉटर वर्क्स पर 4800 लीटर डीजल की खपत दिखा रहा है। सवाल यह है कि जब बिजली जाती नहीं तो इतना डीजल कहां खर्च होता है। पब्लिक हेल्थ विंग के एक्सईएन सुरेश गिल कहते हैं कि उन्हें जानकारी नहीं है कि हर महीने दोनों वॉटर वर्क्स के लिए कितना डीजल खरीदा जाता है। जबकि एक्सईएन ही डीजल खरीदने और उनका भुगतान करने के आदेश जारी करते हैं। जब इस मामले में एसडीओ राजेंद्र सिंह से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इमरजेंसी के लिए तेल खरीदा जाता है।

उन्होंने बताया कि टेस्टिंग में डीजल खर्च होता है। इधर, मनीमाजरा बिजली विभाग के एसडीओ कीर्ति लाल का कहना है कि मनीमाजरा में बिजली सप्लाई यदा कदा बंद होती है। ऐसे में उन्हें नहीं लगता की पब्लिक हेल्थ विंग के कर्मचारियों को जेनरेटर चलाने की जरूरत पड़ती होगी। वहीं, यह भी बताया गया है कि पानी की सप्लाई केवल दिन में दो बार ही होती है। इसलिए बिजली सप्लाई इसी समय बंद होना भी जरूरी नहीं है। 

200 लीटर डीजल गायब, एसडीओ बोले लीक हो गया

कुछ दिन पहले बिजली चली गई थी। लाइट जाने पर पब्लिक हेल्थ विंग पानी की सप्लाई नहीं कर पाया। अफसरों ने वॉटर वर्क्स में तैनात कर्मचारियों से पूछा तो पता चला कि जनरेटर चलाने के लिए लाया 200 लीटर डीजल गायब हो गया। डीजल किसने चुराया, इसके बारे में अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया। हालांकि, मामले में यह भी अंदेशा जताया जा रहा है कि डीजल बेचा तो नहीं गया है। एसडीओ राजेंद्र का कहना है कि डीजल लीक हो गया, लेकिन 200 लीटर डीजल ड्रम से कैसे लीक हो गया, इसके बारे में उनके पास जवाब ही नहीं है। 

जेनरेटर 192 घंटे चले तो खर्च होगा 4800 लीटर 

पंजाब पब्लिक हेल्थ से रिटायर्ड इंजीनियर अमर सिंह का कहना है कि वॉटर वर्क्स पर एक घंटे में 25 लीटर डीजल की खपत होती है। इस हिसाब से नगर निगम पब्लिक हेल्थ विंग अगर 192 घंटे जेनरेटर चलाए तो 4800 लीटर डीजल की खपत होगी। महीने में एक दो घंटे ही लाइट गई है तो उस हिसाब से दोनों जेनरेटर में डीजल की इतनी खपत नहीं होनी चाहिए। 

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