शहीद ब्रिगेडियर लिद्दड़ के परिवार को राहत:50 लाख आर्थिक सहायता और एक सदस्य को नौकरी देगी हरियाणा सरकार, जनरल रावत के साथ हेलिकॉप्टर क्रैश में गई थी जान

चंडीगढ़4 महीने पहले
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तमिलनाडु में हुए हेलिकॉप्टर क्रैश हादसे में देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत के साथ हरियाणा के पंचकूला निवासी ब्रिगेडियर लखविंदर सिंह लिद्दड़ भी शहीद हुए थे। अब हरियाणा सरकार उनके परिवार को 50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता राशि देकर मदद करेगी। इसके साथ ही शहीद ब्रिगेडियर के परिवार से किसी एक आश्रित को क्लास-2 की सरकारी नौकरी भी दी जाएगी। प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इसके लिए अनुमति दे दी है।

ब्रिगेडियर लिद्दड़ के पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई देते समय उनकी पत्नी व बेटी।
ब्रिगेडियर लिद्दड़ के पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई देते समय उनकी पत्नी व बेटी।

सीएम ने कहा कि ब्रिगेडियर लखविंदर का निधन उनके परिवार और प्रदेश के लिए अपूरणीय क्षति है। सैनिक और अर्धसैनिक बल की एक्सग्रेसिया पॉलिसी के तहत शहीद होने वाले सैनिक के परिवार को आर्थिक सहायता के साथ-साथ सरकारी नौकरी दिए जाने का प्रावधान है। इस नीति के तहत हेलिकॉप्टर क्रैश हादसे में जान गंवाने वाले ब्रिगेडियर लखविंदर सिंह की मौत को अस्थाई लड़ाई दुर्घटना मानते हुए विशेष आर्थिक सहायता व नौकरी देने की घोषणा की गई है।

8 दिसंबर को हेलिकॉप्टर क्रैश में हो गई थी मौत
तमिलनाडु के कुन्नूर जिले में 8 दिसंबर को CDS जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी और ब्रिगेडियर लखविंदर सिंह लिद्दड़ समेत सेना के कई जवानों की हेलिकॉप्टर हादसे में जान चली गई थी। दिल्ली में उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम सस्कार किया गया गया था। लखविंदर सिंह पंचकूला के रहने वाले थे। छुट्टी के दिनों में वे पंचकूला अपने घर पर आते थे। उनकी बहन कसौली में रहती हैं। जबकि एक बड़ा भाई विदेश में रहता है। शहीद बिग्रेडियर के परिवार में उनकी मां, पत्नी और एक बेटी है।

ब्रिगेडियर लिद्दड़ को उनकी बेटी ने मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई दी थी।
ब्रिगेडियर लिद्दड़ को उनकी बेटी ने मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई दी थी।

पिता भी आर्मी से हुए थे कर्नल के तौर पर रिटायर
एलएस लिद्दड़ के पिता महंगा सिंह आर्मी में कर्नल थे, जो अब रिटायर हो चुके हैं। उनकी माता का नाम महेंद्र कौर था। करीब 1990-91 के आसपास ब्रिगेडियर लिद्दड़ सेना में भर्ती हुए थे। अंतिम बार जून 2021 में एलएल लिद्दड़ पंचकूला में आए थे।