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खेल पॉलिसी में फिर बदलाव की तैयारी:सीधी भर्तियों में खिलाड़ियों का 3% कोटा खत्म कर सकती है हरियाणा सरकार, स्पेशल ओलिंपिक मेडल विजेताओं के लिए पेंशन का प्रावधान

चंडीगढ़एक महीने पहलेलेखक: मनोज कुमार
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हरियाणा सरकार खेल पॉलिसी में बदलाव करने की तैयारी कर रही है, इसका प्रस्ताव तैयार कर मुख्य सचिव को भी भेजा है, सरकार की मुहर के बाद आगे की प्रक्रिया होगी। - Dainik Bhaskar
हरियाणा सरकार खेल पॉलिसी में बदलाव करने की तैयारी कर रही है, इसका प्रस्ताव तैयार कर मुख्य सचिव को भी भेजा है, सरकार की मुहर के बाद आगे की प्रक्रिया होगी।

हरियाणा सरकार खेल पॉलिसी में बदलाव करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत सीधी भर्तियों में खिलाड़ियों का 3 प्रतिशत कोटा खत्म किया जा सकता है। इसका एक प्रस्ताव तैयार कर मुख्य सचिव को भी भेजा है। सरकार की मुहर के बाद आगे की प्रक्रिया होगी। वहीं, मेडल जीतने वालों को मेडल के अनुसार तय पदों पर भर्ती देना और स्पेशल ओलिंपिक के मेडल विजेताओं को नौकरी की बजाय पेंशन का प्रावधान भी किया जा सकता है। विभाग का मानना है कि स्पेशल खिलाड़ी कोच की भूमिका ठीक से नहीं निभा सकते।

इसको लेकर खेल विभाग ने 5 अफसरों की कमेटी का गठन किया है। इसमें खिलाड़ियों को भी शामिल किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि 1993 से भर्तियों में 3 प्रतिशत कोटा खिलाड़ियों क लिए है। खेल विभाग के निदेशक पंकज नैन ने कहा, ‘कोटा खत्म करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा है।’

ये हैं पॉलिसी में बदलाव के तीन मुख्य कारण

  • खेल विभाग की जांच में करीब 2500 ग्रेडेशन सर्टिफिकेट में गड़बड़ियां मिली हैं। इसकी जांच विजिलेंस से कराने के आदेश भी दिए हैं। 2019 में हुई ग्रुप-डी के 18218 पदों की भर्ती में 1518 पद खिलाड़ियों के लिए निर्धारित थे। जांच में काफी संख्या में ग्रेडेशन सर्टिफिकेट सही नहीं मिले। इसलिए खेल विभाग के जरिए ही खिलाड़ियों की भर्ती करने की तैयारी चल रही है।
  • खेल विभाग ने इसी साल फरवरी में खिलाड़ियों की जॉब पॉलिसी से एचसीएस-एचपीएस के पद हटा दिए थे। खेल विभाग में पद तय किए थे। इसके अनुसार, ग्रुप-ए में डिप्टी डायरेक्टर के 50 ग्रुप-बी में सीनियर कोच के 100, ग्रुप-बी में काेच के 150 और ग्रुप-सी में जूनियर कोच के 250 पद निर्धारित हैं। इन पदों पर सिर्फ खिलाड़ी ही भर्ती किए जाएंगे।
  • खेल विभाग ने स्पोर्ट्स एलिजिबल पर्सन जॉब पॉलिसी में बदलाव की बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि इसमें ओलिंपियन को भी जहां सीनियर कोच की पोस्ट मिल रही है, वहीं नेशनल व अन्य गेम्स के खिलाड़ी को भी कोच का पद मिल रहा है। दोनों का नामों में ज्यादा फर्क नहीं है। इसीलिए मेडल के अनुसार ही पद व पद दिए जाएंगे।

पिछले तीन सालों में ही हुए सबसे ज्यादा संशोधन
1993 में बनाई जॉब पॉलिसी में सीधी भर्तियों में खिलाड़ियों का 3% कोटा तय किया था। 2018 में बनी नई पॉलिसी सितंबर 2018 में संशोधन किया गया। इसमें ओलिंपियन खिलाड़ियों को एचसीएस-एचपीएस की नौकरी का प्रावधान रखा। यह पॉलिसी कोर्ट में चैलेंज हो गई। मार्च 2019 व सितंबर 2019 में पॉलिसी में फिर संशोधन किया गया। फरवरी 2021 को जारी पॉलिसी में एचसीएस-एचपीएस के पद हटा दिए। सरकार फिर पॉलिसी बदलने वाली है।

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