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विकास योजनाओं पर हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान:पूछा- क्या नए पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम की जरूरत नहीं है ट्राईसिटी को; केंद्र सरकार व चंडीगढ़ प्रशासन को नोटिस जारी

चंडीगढ़4 महीने पहले
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हाईकोर्ट ने कहा कि चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश है। यहां अधिकारी डेपुटेशन पर आते हैं और अपना कार्यकाल पूरा कर चले जाते हैं। शहर को भविष्य के लिहाज से तैयार करने के लिए अच्छी योजनाओं की जरूरत है, जिसके लिए समय लगता है। - Dainik Bhaskar
हाईकोर्ट ने कहा कि चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश है। यहां अधिकारी डेपुटेशन पर आते हैं और अपना कार्यकाल पूरा कर चले जाते हैं। शहर को भविष्य के लिहाज से तैयार करने के लिए अच्छी योजनाओं की जरूरत है, जिसके लिए समय लगता है।

चंडीगढ़ पांच लाख की आबादी को ध्यान में रखकर बनाया गया शहर है, लेकिन अब पंचकूला, मोहाली और चंडीगढ़ (ट्राईसिटी) को देखें तो जनसंख्या 30 से 40 लाख है। बदले समय के साथ शहर को बदलाव की जरूरत है। चंडीगढ़ की विकास योजनाओं पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया ने संज्ञान लेते हुए कहा कि लगभग 60 किलोमीटर की दूरी तय कर चंडीगढ़ में रोजाना लोग नौकरी के लिए आते हैं। इसका नतीजा यह है कि शहर पर ट्रैफिक का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में क्या शहर को नए पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम की जरूरत नहीं। विकल्प के तौर पर मोनो रेल या मेट्रो पर विचार किया जा सकता है।

हाईवे से ट्रैफिक का दबाव कम करने की जरूरत

हाईकोर्ट ने कहा कि चंडीगढ़ के नाॅर्थ में कालका-परवाणू, नाॅर्थ ईस्ट में यमुनानगर, साउथ में अंबाला, साउथ वेस्ट में पटियाला, वेस्ट में सरहिंद, फतेहगढ़ साहिब और खरड़ और नाॅर्थ वेस्ट में नवांशहर और रोपड़ से चंडीगढ़ रोजाना लोग नौकरी के लिए आते हैं। ऐसे में चंडीगढ़ और इसके चारों तरफ ट्रैफिक के दबाव को समझने की जरूरत है। इस दबाव को कम करने के लिए नए पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम की तरफ जाना होगा, जो हाईवे से ट्रैफिक का दबाव कम करेगा।

शहर को भविष्य के लिहाज से तैयार करने की जरूरत

हाईकोर्ट ने कहा कि चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश है। यहां अधिकारी डेपुटेशन पर आते हैं और अपना कार्यकाल पूरा कर चले जाते हैं। शहर को भविष्य के लिहाज से तैयार करने के लिए अच्छी योजनाओं की जरूरत है, जिसके लिए समय लगता है। अधिकारियों को यह समय ही नहीं मिल पाता, जिसके कारण अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। हाईकोर्ट ने इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन से 40 साल पहले और वर्तमान की काडर स्ट्रेंथ से जुड़ी जानकारी तलब की है। कोर्ट ने कहा कि यह जानना जरूरी है कि विकास के लिए प्रशासन के पास पर्याप्त मैन पावर है या नहीं।

हाईकोर्ट ने पूछे ये सवाल

  • राजेंद्र पार्क को फॉरेस्ट एरिया में विकसित क्यों नहीं किया जा रहा?
  • प्रशासन की नाक के नीचे खुड्डा अली शेर में कुड़े के ढेर क्यों लगे हैं?
  • सुखना से पेक की ओर जाने वाले उत्तर मार्ग को बंद क्यों किया गया है?
  • बीते पांच सालों में कम हुए ग्रीन एरिया को भरपाई के लिए क्या कदम उठाए गए?
  • दीमक लगे पेड़ों की जगह नए लगाने के लिए वन विभाग, PWD और नगर निगम ने क्या कार्रवाई की?
  • शहर में कितने पेड़ हैं, क्या इनका कोई आंकड़ा तैयार किया गया है?
  • ग्रीन बेल्ट और नालों खास तौर पर एन चौ में मलबा गिराया जा रहा है, इस पर रोक के लिए क्या कदम उठाए गए?
  • साइकिल ट्रैक पर वर्षों से खर्च हो रहा है तो इन ट्रैक में क्या विस्तार किया गया?
  • कितनी स्ट्रीट लाइट वर्किंग कंडीशन में हैं। साइकिल ट्रैक और वाॅकिंग ट्रैक पर कितनी प्रतिशत लाइट काम कर रही है?
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