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आज पेक की 100वीं कहानी:हिमाचल पीडब्ल्यूडी की पहली महिला इंजीनियर इन चीफ अर्चना ने यहीं से की पढ़ाई, कहा -3 कॉलेजों की लड़कियों के लिए सिर्फ एक हॉस्टल था

चंडीगढ़एक महीने पहलेलेखक: ननु जोगिंदर सिंह
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अर्चना ठाकुर - Dainik Bhaskar
अर्चना ठाकुर

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी के 100 साल नवंबर 2021 को पूरे होने जा रहे हैं। 100 हफ्ते तक दैनिक भास्कर में पेक के सफर की कहानी। इसमें हमसफर बने एल्युम्नाइज की दास्तां, किस्से और कहानियां। एल्युम्नाइज कैनेडा, ऑस्ट्रेलिया, यूएसए से पेक आते हैं। यादें ताजा करने के लिए...

तीन कॉलेजों की लड़कियों के लिए सिर्फ एक हॉस्टल हुआ करता था। आर्किटेक्चर कॉलेज, पेक और फाइन आर्ट्स कॉलेज की लड़कियों के लिए वर्किंग विमन हॉस्टल के पीछे छोटा सा एक हॉस्टल सेक्टर-11 में था। इसमें 50 लड़कियां रहती थीं। उस समय तक कॉलेज में लड़कियों का हॉस्टल नहीं था। ये बताती हैं हिमाचल प्रदेश पीडब्ल्यूडी की पहली महिला इंजीनियर इन चीफ अर्चना ठाकुर। उनका नाम पेक में अर्चना पवार के नाम से दर्ज है। वे पेक से 1987 की पास आउट हैं।

अर्चना बताती हैं कि उनके पिता भी इंजीनियर थे, इसलिए इंजीनियरिंग उनके लिए कोई नई चीज नहीं थी। वे इसी कॉलेज से पढ़ना चाहती थी, इसीलिए चंडीगढ़ के पीजीजीसी-11 में उन्होंने प्री-इंजीनियरिंग में एडमिशन लिया। पिता इंजीनियर बनाना चाहते थे, लेकिन हिचक भी रहे थे, क्योंकि उन दिनों पंजाब का माहौल खराब था। उसका असर हिमाचल में भी था। कम्युनिकेशन के साधन बहुत कम थे और आने-जाने के लिए बसें ही उपयुक्त साधन थी। सिविल इंजीनियरिंग में एडमिशन लिया तो मेरे साथ दो लड़कियां और थी।

इनमें से एक नवनीत आजकल यूएसए में है। क्योंकि कॉलेज में लड़कियों की संख्या कम थी, इसलिए ज्यादातर आइसोलेट ही रहती थी। जिस तरह से अब लड़कियों की संख्या लगभग बराबर है तो सभी खुलकर एक साथ रहते हैं वैसा माहौल नहीं था। संख्या कम थी इसलिए इवेंट्स में भी उनकी पार्टिसिपेशन उसी हिसाब से थी।

कॉलेज से पासआउट होने के बाद पीडब्ल्यूडी में मिली नौकरी
अर्चना ठाकुर बताती हैं कि पेक कैंपस के हॉस्टल्स में तो प्रोग्राम होते रहते थे, लेकिन लड़कियों के लिए इवेंट नहीं होते थे। सिविल इंजीनियरिंग में सर्वे के लिए रूटीन क्लासेज कॉलेज में ही लग जाती थी। उनका कैंप पालमपुर में लगा था। उस समय तक उनके पिता पीडब्ल्यूडी छोड़कर पालमपुर यूनिवर्सिटी में एक्सईएन के तौर पर जॉइन कर चुके थे। घर वहीं पर था, इसलिए हम तीनों लड़कियां घर पर ही रुकीं।
लड़कों के लिए यूनिवर्सिटी में इंतजाम था। अर्चना ठाकुर ने बताया कि कॉलेज से पासआउट होने के अगले साल ही पीडब्ल्यूडी में जॉइन कर लिया। डिपार्टमेंट जॉइन करने के बाद वे अपने दिल के करीब गेयटी थिएटर शिमला के प्रोजेक्ट को मानती हैं। इसकी इमारत को असुरक्षित करार दे दिया गया था। इसे बचाने के लिए हेरिटेज एक्सपर्ट की मदद ली गई, लेकिन डिजाइन विंग में रहते हुए उन्होंने थिएटर को दो मंजिला करने में एक सुरक्षित सॉल्यूशन दिया और अब यह तीन मंजिला है।

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