मदर्स डे स्पेशल:मैं कैसे बची... इसका जवाब मुझे अपने मां होने में ही मिलता है, गर्भ में ट्विन्स हैं

चंडीगढ़2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
पेट में पल रहे बच्चे बच गए... अचरज होता है - Dainik Bhaskar
पेट में पल रहे बच्चे बच गए... अचरज होता है

सेक्टर-97 मोहाली में रहने वाली सुजाता को मर्चेंट नेवी में काम करने वाले उसके पति ने 8 जनवरी को पेट्रोल डालकर जला दिया। वह 40 फीसदी झुलस गई। पति के खिलाफ लालड़ू पुलिस थाने ने अटेम्प्ट टु मर्डर की धारा-307 के तहत एफआईआर दर्ज की, लेकिन उसे आज तक गिरफ्तार नहीं किया है।

पहले से ही एक बेटे की मां सुजाता इस हादसे के वक्त प्रेग्नेंट थी। जिस्म के उसके घाव अभी पूरी तरह भरे नहीं हैं, मन पर जो असर पड़ा है वो शायद सारी जिंदगी न मिटे, लेकिन वह जी उठी है गर्भ में पल रहे ट्विन्स के लिए। एक मां की फाइटिंग स्पिरिट की कहानी उसी की जुबानी-

पेट में पल रहे बच्चे बच गए... अचरज होता है

मेरी जिंदगी खुशहाल थी। 2011 में शादी अच्छे घर में हुई, एक बेटा भी हो गया। छह साल बाद पता चला मैं दोबारा प्रेग्नेंट हूं... इस बार ट्विन्स थे।लेकिन इसी बीच पता चला कि पति का कहीं अफेयर चल रहा है। जॉइंट फैमिली थी, तो मेरा साथ कोई क्या देता, उल्टे मुझे ही तंग किया जाने लगा। सारे परिवार का खाना एक साथ बनता, मेरा अलग। शादी के 11 साल बाद ये सब सहना मुश्किल था। 8 जनवरी की रात मैंने पति से इसी मुद्दे पर बात करनी चाही तो उसने गुस्से में मुझे गले से पकड़ा और सिर पर पेट्रोल से भरी बोतल उड़ेलकर आग लगा दी। मैं चिल्लाते हुए बाहर की तरफ दौड़ी, लेकिन फर्श पर पेट के बल गिर पड़ी। पति ने बचा हुआ पेट्रोल भी मुझ पर डाल दिया। इसके बाद क्या हुआ मुझे नहीं पता। एंबुलेंस में जब भाई की झलक दिखी तो तसल्ली हुई।
13 अप्रैल को बैसाखी के दिन पापा की बरसी थी, उसी दिन मैं हॉस्पिटल से अपने भाई के घर लौटी। हॉस्पिटल में अपना जला हुआ चेहरा, पूरा शरीर देखकर डरती रहती। ये देखकर मुझे खुद अचरज होता कि कैसे सिर्फ मेरा पेट और उसमें पल रहे बच्चे बचे रह गए। डॉक्टर्स ने तो इलाज के दौरान एक बार कह दिया था- बचना मुश्किल है, घरवाले जल्दी आकर मिल लें। मैं कैसे बची रही? इसका जवाब मुझे अपने मां होने में ही मिलता है।

अंबाला में पुश्तैनी बिजनेस, लालडू ओमेक्स फ्लैट में लगाई आग

भाई योगेश ने बताया कि आरोपियों का अंबाला कैंट में पुश्तैनी बिजनेस है, ऐसी नीयत होगी पता नहीं था। आरोपी 6 महीने नेवी में​​​ रहता और उसके बाद घर। उसने लालड़ू में फ्लैट लिया और वहां अकेले इस घटना को अंजाम दिया। मोहाली पुलिस ने 307 का केस दर्ज किया लेकिन आज तक सुजाता के बयान लेने नहीं आए। 6 बार एसएसपी से लेकर एसएचओ व आईओ को आरोपी की गिरफ्तारी के लिए मिल चुके हैं, लेकिन काेई फायदा नहीं। वो अब भी खुला घूम रहा है और समझौते का दबाव बना रहा है।

उसे देखकर मुझे हौसला मिलता है

सुजाता की मां प्रेम खुल्लर होशियारपुर से रिटायर्ड वाइस प्रिंसिपल हैं। वह कहती हैं- मैंने झांसी की रानी के बारे में किताबों में पढ़ा है, सुजाता को देखकर लगाता है वह जीती जागती लक्ष्मीबाई है। इतना दर्द सहने के बाद भी अपने बच्चों के लिए जिंदा है। मुझे सुजाता को देखकर हौसला आता है और फिर उसके पास बैठकर उससे बातें करती हूं।