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कृषि कानूनों के विरोध का 16वां दिन:सरकार की अपील मालगाड़ियां जाने दें, सरकार बात के लिए तारीख बताए, हम सशर्त मालगाड़ियां चलने देने को तैयार: जत्थेबंदियां

चंडीगढ़2 महीने पहले
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  • कहा- सलाहकार नहीं, सीएम या मंत्री करें बात, लेकिन कृषि कानूनों के रद्द होने तक धरना रहेगा जारी
  • कई जिलों में किसानों ने 2 से 3 घंटे हाईवे किए जाम, आप ने विस सत्र बुलाने की मांग की

कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का प्रदर्शन शुक्रवार को 16वें दिन में प्रवेश कर गया। माेगा, संगरूर, बरनाला, फिरोजपुर समेत कई जिलों में किसानों ने रेलवे ट्रैक और हाइवेे 2 से 3 घंटे जाम कर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। किसानों के आंदोलन के चलते मालगाड़ियों के न आने से कोयला, यूरिया, डीएपी, खाद्य पदार्थों आिद की सप्लाई पर असर पड़ रहा है।

इसके चलते सरकार ने किसानों से अपील की है कि वह मालगाडियों को जाने दें। किसान जत्थेबंदियां इस अपील पर सशर्त मालगाड़ियाें काे छूट देने काे तैयार हो गई हैं। बठिंडा में भाकियू उगराहां के प्रांतीय सचिव शिंगारा सिंह मान ने कहा कि शनिवार को सरकार द्वारा मालगाड़ियों को क्रास सहित कई अन्य मामलों पर जत्थेबंदियां विचार कर सकती हैं।

अगर सरकार चाहती है कि जरूरी वस्तुओं की सप्लाई राज्य में हो तो इसके लिए सीएम या कैबिनेट मंत्रियों की कमेटी आकर बात करें। तारीख बता दें, उसी के अनुसार मालगाड़ियाें काे निकालने पर विचार करेंगे। खाद, डाई व बारदाना से संबंधित मालगाड़ियां को ही अाने पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा, वे किसी अफसर या अफसरों की विशेष कमेटी से इस संबंध में कोई चर्चा नहीं करेंगे। भाकियू नेता हरमीत सिंह कादियां ने कहा कि राज्य में जरूरी वस्तुओं का स्टॉक दिन-प्रतिदिन घट रहा है। यह सब रेल रोको आंदोलन के कारण हो रहा है।

जब जरूरी वस्तुओं की कमी होगी तो ही सरकार को किसान आंदोलन का सही ढंग से पता लगेगा। किसान नेताअों का कहना है कि 30 जत्थेबंदियों ने फैसला किया है वे पीएम या ग्रुप अॉफ मिनिस्टर से कम किसी से भी बात नही करेंगे। उधर, आप विधायकों ने पंजाब विस के समक्ष धरना-प्रदर्शन करते सीएम से मांग की है कि वह तुरंत सर्वदलीय बैठक बुला 31 किसान जत्थेबंदियों के अध्यक्षों को मीटिंग में शामिल करें व 15 से पहले विस सत्र बुलाएं।

असर: धान खरीद में बारदाने, गेहूं बिजाई में खाद की कमी आएगी

गेहूं बिजाई 25 से
सूबे में 25 अक्टूबर से लेकर 15 नवंबर तक गेहूं बिजाई का समय है। राज्य में हर साल 25 लाख टन यूरिया अन्य राज्यों से आता है।

डीएपी... माैजूदा समय में 6 लाख मीट्रिक टन की जरूरत, अभी 4.6 लाख मीट्रिक टन ही उपलब्ध। यूरिया... मौजूदा समय मे 13.5 लाख टन की जरूरत। अभी 1.7 लाख मीट्रिक टन ही उपलब्ध।

कोयला: 9 दिन का ही स्टाॅक

एनपीएल के पास 6.05 दिनों के लिए 1.05 लाख मीट्रिक टन, टीएसपीएल के पास 2.79 दिनों के लिए 93,949 मीट्रिक टन और जीवीके के पास 0.62 दिनों के लिए 4341 मीट्रिक टन काेयले का स्टाक है। थर्मल पावर प्लांट में काेयले की स्थिति लगातार घट रही है। अगर आंदोलन जारी रहा तो सूबे में बिजली के कट लग सकते हैं।

3. धान ढुलाई में गिरावट आई
राज्य में धान की खरीद शुरू हो चुकी है। लेकिन मालगाड़ियां न चलने से जहां बारदाने में कमी आई है, वहीं गोदाम खाली करने की परेशानी आ रही है। क्योंकि पहले से पड़े धान और आने वाले धान की लगातार ढुलाई नहीं हो पा रही है।

4. गेहूं की सप्लाई रुकी, बिगड़े हालात
राज्य में एजेंसियों के पास 115 लाख मीट्रिक टन व एफसीआई के 25 लाख टन गेहूं के भंडार है। दिल्ली और मुरादाबाद की 24 हजार 480 गनी बलस अटकी हुई है। इन गाठों के न मिलने से तरनतारन, मानसा, फिरोजपुर व फाजिल्का में स्थिति प्रभावित हो रही है।

समझदारी: एंबुलेंस फंसी तो लाडोवाल टोल प्लाजा पर किसानों ने 45 मिनट में धरना हटाया

कृषि कानूनों के खिलाफ लाडोवाल टोल प्लाजा पर तीसरे दिन भी धरना जारी रहा। शुक्रवार को टोल प्लाजा पर 2 घंटे के लिए लगाए धरने के दौरान एंबुलेंस और 2 डेड बॉडी को लेकर जा रहे वाहनों के फंसने के चलते धरना 45 मिनट में खत्म कर दिया। किसानों का कहना था कि हड़ताल से पहले इंसानियत जरूरी है। हम नहीं चाहते हमारी तरह अन्य लोग भी परेशान हों। लाडोवाल टोल प्लाजा के मैनेजर चंचल सिंह राठौर ने बताया कि अब तक धरनों से 1 करोड़ से नुकसान हो चुका है।

बात कर समस्या का हल निकाले पीएम: सुखबीर
जब एनडीए के साथ थे तब क्यो नहीं बोले : सीएम

शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने पीएम मोदी से अपील की है कि वे किसान संगठनों के साथ बातचीत कर किसानाें की शिकायतों का हल करें। पीएम को समझना चाहिए कि पंजाब और हरियाणा में किसान महामारी में आंदोलन के रास्ते पर चल रहे हैं क्योंकि उन्हें विश्वास है कि हाल ही बनाए कृषि कानून उनकी भावी पीढ़ियों को खत्म कर देंगे। ऐसी स्थिति में खुद पीएम को हस्तक्षेप करना चाहिए। वहीं, इस पर सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि सुखबीर को कृ़षि कानूनों पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए।

कहा, उन्हें सूबा सरकार और सीएम से कृ़षि कानूनों को लेकर सवाल करने का अधिकार किसने दिया। सुखबीर पहले पूछे गए 3 सवालों के जवाब दें। शिअद अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए आंदोलन को हाईजेक करने की कोशिश कर रही है। सीएम ने पूछा कि जब पीएम के साथ काम कर रहे थे तब उन्हें किसानों के प्रति जिम्मेदारी की याद क्यों नहीं दिलाई। सुखबीर से पूछा कि क्या वह मानते हैं कि किसानों के प्रति जिम्मेदारी नहीं है।

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