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चंडीगढ़ के व्यापारियों के हक में आईं सांसद खेर:डीसी को लिखा पत्र; कैपिटल ऑफ पंजाब एक्ट में संशोधन का मुद्दा उठाया

चंडीगढ़10 महीने पहले
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चंडीगढ़ की सांसद किरण खेर। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
चंडीगढ़ की सांसद किरण खेर। (फाइल फोटो)

बिल्डिंग वॉयलेशन पेनाल्टी बढ़ाने के लिए कैपिटल ऑफ पंजाब एक्ट 1952 में संशोधन की कार्रवाई के विरोध में सांसद किरण खेर भी आ गई हैं। किरण खेर ने चंडीगढ़ के डिप्टी कमिश्नर विनय प्रताप सिंह को पत्र लिखकर कैपिटल ऑफ पंजाब (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1952 में किए जाने वाले संशोधन का मुद्दा उठाया है।

किरण खेर ने पत्र में लिखा कि उन्हें उद्योग व्यापार मंडल के प्रधान कैलाश चंद जैन का मांगपत्र मिला है। उन्होंने एक्ट में संशोधन का विरोध किया है। वहीं जैन ने कहा है कि एक्ट में संशोधन को लेकर चंडीगढ़ प्रशासन का अधिकार क्षेत्र नहीं है। यह संसद के विचार का क्षेत्र है। वहीं संशोधन को जनहित के खिलाफ बताया है। ऐसे में यह संशोधन रद्द करने की मांग की गई है। किरण खेर ने डीसी को कहा है कि सकारात्मक कार्रवाई के लिए इस पर विचार करेंगे तो वह उनकी धन्यवादी होंगी।

सांसद खेर का डीसी को लिखा पत्र।
सांसद खेर का डीसी को लिखा पत्र।

व्यापारियों में रोष

इस मुद्दे पर शहर के व्यापारी प्रशासन के साथ आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। इससे पहले सोमवार को व्यापार मंडल (सीबीएम) ने इस संशोधन के खिलाफ प्रशासन को आपत्तियां दर्ज करवाई थी। प्रिमाइसिस (जगह) के दुरुपयोग और बिल्डिंग वॉयलेशन पर पेनाल्टी कई गुणा बढ़ाने का व्यापारी विरोध कर रहे हैं। वहीं भाजपा नेताओं का भी प्रशासन पर दबाव है। केंद्र में भाजपा की सरकार है। व्यापारियों को सांसद खेर का भी साथ मिल गया है। ऐसे में अब प्रशासन के अफसरों के लिए संशोधन की कार्रवाई आसान नहीं रहेगी।

यह मांग की है सीबीएम ने

इससे पहले सीबीएम के प्रैजिडेंट चरणजीव सिंह की अगुवाई में प्रशासन को सौंपे मांगपत्र में मांग रखी है कि एक कमेटी का गठन किया जाए। यह बायलॉज को देखे और किसी पेनाल्टी में वृद्धि से पहले बदलाव की जरूरत पर विचार करे। सीबीएम ने कहा कि पेनाल्टी लगाने की बजाय सरकार को शहर के व्यापार को बढ़ाने की ओर सोचना चाहिए। सीबीएम के बिल्डिंग बॉयलॉज कमेटी के प्रतिनिधिमंडल ने प्रस्तावित संशोधन के खिलाफ अपनी आपत्तियां/सुझाव जॉइंट सेक्रेटरी, एस्टेट सौरभ जोशी और चंडीगढ़ कोऑर्डिनेशन कमेटी के मेंबर्स को दिए थे।

पेनाल्टी को राजस्व का ज़रिया नहीं समझना चाहिए

व्यापारियों ने कहा था कि पेनाल्टी को राजस्व का ज़रिया नहीं समझना चाहिए। एक्ट की धारा 15 में प्रस्तावित संशोधन से एस्टेट ऑफिस को असीमित शक्ति मिल जाएगी। ऐसे में कई तय नियमों की उल्लंघना हो सकती है। प्रतिदिन के हिसाब से उल्लंघन में वृद्धि नहीं होनी चाहिए। सीबीएम ने कुछ सुझाव दिए थे कि मामले में प्रशासन एक कमेटी बनाए। इसमें यह देखा जाना चाहिए कि व्यापार के हिसाब से किस प्रकार के आवश्यक बदलावों की जरूरत है।

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