पांच मैंबरी कमेटी गठित / निगम के पास काम करवाने के लिए नहीं फंड, रेवेन्यू जनरेट के लिए बनाई मेयर ने कमेटी

सोमवार को नगर निगम में ऑनलाइन मीटिंग करते हुए मेयर राजबाला मलिक व अन्य। सोमवार को नगर निगम में ऑनलाइन मीटिंग करते हुए मेयर राजबाला मलिक व अन्य।
X
सोमवार को नगर निगम में ऑनलाइन मीटिंग करते हुए मेयर राजबाला मलिक व अन्य।सोमवार को नगर निगम में ऑनलाइन मीटिंग करते हुए मेयर राजबाला मलिक व अन्य।

  • शहर में काम करवाने के लिए केवल 67 करोड़ रुपए, इसमें देनदारियां भी हैं, ऐसे में अब प्रोजेक्ट के काम करवाने में हो रही मुश्किल

दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 08:33 AM IST

चंडीगढ़. नगर निगम के पास शहर में काम करवाने के लिए केवल 67 करोड़ रुपए हैं। इनकी देनदारियां भी हैं। ऐसे में इन कामों को पूरा करना भी मुश्किल हो गया है। इन प्रोजेक्ट की प्रशासन को डिटेल देनी होगी। तभी इस पैसे से काम करवा सकेंगे। नए काम के लिए एमसी के पास कोई बजट नहीं है, बल्कि बजट 581 करोड़ है, जबकि जरूरी खर्चे ही 597 करोड़ के हैं। इसके अलावा मेंटेनेंस वर्क के 17 करोड़ के अलग से खर्च होते हैं। ऐसे में एमसी इस साल 33 करोड़ माइनस में है। एमसी की सभी कमेटियों ने 121 करोड़ के एजेंडा पास किए हुए हैं। इन पर काम नहीं हो सकेगा, क्योंकि फंड नहीं है।
इसको देखते हुए निगम कमिश्नर केके यादव ने हाउस में कहा कि रेवेन्यू के सोर्स जेनरेट करें। लेकिन सत्तापक्ष और विपक्ष के काउंसलर एक दूसरे पर आरोप -प्रत्यारोप ही लगाते रहे। रेवेन्यू जनरेट करने के लिए कोई सुझाव नहीं आया। ऐसे में कमिश्नर के कहने पर मेयर राजबाला मलिक ने कहा कि पांच मैंबरी कमेटी गठित की जाएगी। कमेटी अपने सुझाव देगी जिसे अगली हाउस मीटिंग में रखा जाएगा।

सपेसिफिक वर्क होंगे जिन डेडिकेट वर्क के लिए प्रशासन से मिला है पैसा

निगम कमिश्नर केके यादव ने हाउस में बताया कि डेडिकेट वर्क होंगे जिनके लिए प्रशासन से पैसा मिला है। इनमें एक दिन की वाॅटर सप्लाई के लिए 39 करोड़ रुपए, रोड रिकार्पेटिंग के लिए 63 करोड़, डॉर्क स्पॉट के 19.5 करोड़ में से 9.5 करोड़ बचे हैं। इसके अलावा 9 गांव के डवलपमेंट के लिए आए 25 करोड़ में से 12.5   करोड़ बचे हैं। इन पर काम होगा।

बजट पहले 1472 करोड़ मंजूर 581 करोड़, जरूरी खर्च 597 करोड़ रुपए
नगर निगम कमिश्नर केके यादव ने हाउस में जानकारी दी कि एमसी ने साल 2020-21 का बजट 1472 करोड़ पास किया था, इसमें एमसी ने प्रशासन से ग्रांट इन ऐड के  दिल्ली फोर्थ फाइनेंस कमीशन की रिपोर्ट अनुसार 1073 करोड़ मांगा था। मगर प्रशासन ने ग्रांट इन ऐड का 425 करोड़ मंजूर किए।  इसमें से भी  20 फीसदी मिनिस्टरी ऑफ फाइनेंस की नोटिफिकेशन पर कटौती लगा दी। ऐसे में ग्रांट इन ऐड के 340 करोड़ रह गए। एमसी ने अपने संसाधनों से  402 करोड़ 5 लाख जुटाने थे लेकिन कोविड 19 की वजह से अब एमसी के अपने संसाधनों से 321 करोड़ 51 लाख ही रेवन्यू आ सकेगा।

इसमें से 20 करोड़ कोविड सेस और 60 करोड़ पेट्रोल पंप के लिए पेट्रोल एवं डीजल खरीदने के निकाले जाएं तो रेवन्यू 241  करोड़ 51 लाख ही आएगा। इसमें  एमसी  के इम्पलाइज की सेलरी 402 करोड़  पेंशन 50 करोड़ ,120 करोड़ बिजली बिलों और 25 करोड़ के काम चल रहे शामिल हैं। यानि यह राशि 597 करोड़ पहुंचती है। इसके अलावा 17 करोड़ मेंटेनेंस पर भी खर्च होता है। 

फंड जुटाने के लिए सुझावों में ही आपस में उलझे काउंसलर
हाउस मीटिंग में भाजपा काउंसलर अरुण सूद ने सुझाव दिया कि एमसी रेवेन्यू जेनरेट करने के लिए कंसल्टेंट नियुक्त करे, एनर्जी ऑडिट, एस्टेबिलिशमेंट के खर्चे कम हों अनिल दुबे ने कहा कि एमसी की मौलीजागरां में मार्केट बनी पड़ी है और सेक्टर-17 में दुकाने हैं इन्हें सेल करके पैसा जुटाया जाए। प्रशासन से फ्री होल्ड की पॉलिसी पर चर्चा की जाए। कांग्रेस के हाउस में नेता देवेंद्र सिंह बबला ने कहा कि एमसी के पास काम करवाने के लिए पैसा नहीं हैं। जब से बीजेपी शासित एमसी बनी है तभी से बजट नहीं होने से फेल हुई है।

चंडीगढ़ में ऐसा कुछ नहीं छोड़ा जहां टैक्स नहीं लगाया हो। निगम कंगाली की हाल में पहुंच गई है।  इसे भंग किया जाए। इसपर अरुण सूद ने कहा कि कांग्रेस के कार्यकाल में तो एमसी ने एक रुपए का रेवन्यू जनरेट नहीं किया। देवेंद्र बबला को मेयर बना देते है, बबला ड्राफ्ट लेकर आएंगे। इसपर गुरप्रीत सिंह ढिल्लों ने कहा कि क्या कांग्रेस चाइना से पैसा लेकर आएंगी। राजीव गांधी फाउंडेशन के लिए भी तो कांग्रेस ने  चाइना से पैसा लिया था। इसी को लेकर दोनों पार्टियों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरु हो गया। इसलिए रेवेन्यू जनरेशन तक कोई नहीं पहुंचा।

बजट में 402 करोड़ दिखाया अब  321 करोड़ ही होगा 
एमसी ने बजट में रेवेन्यू 402 दिखाया था। लेकिन कोविड 19 के बाद उसमें बदलाव किया गया। वाॅटर बिलों से 150 करोड़ के बजाए 100 करोड़ आएगा, बुकिंग और कम्युनिटी सेंटर से 10 करोड़ 93 लाख के बजाए 6 करोड़ 43 लाख, पार्किंग लॉट से लाइसेंस फीस के 10 करोड़ 50 लाख के बजाए 6 करोड़ आएंगे। दो पेट्रेाल पंप से 95 करोड़ 26 लाख के बजाए 63 करोड़ ही मिलेंगे। इसमें भी 60 करोड़ का पेट्रोल और डीजल खरीदा जाएगा। जिसे 3 करोड़ रेवेन्यू मिलेगा। दूसरे विभागाें से 63 करोड़ 58 लाख और कोविड सेस से 20 करोड़ आएगा।
321 करोड़ नहीं असल में 241 करोड़ ही मिलेगा
असल में एमसी को इस साल रेवेन्यू 321 करोड़ के बजाए 241 करोड़ ही मिलेगा। क्योंकि 60 करोड़ से पेट्रोल पंप के लिए पेट्रोल- डीजल खरीदना है। उससे रेवेन्यू 3 करोड़ मिलेगा। वहीं कोविड सैस से मिलने वाला 20 करोड़ का पता नहीं है कि एमसी को मिलेगा या केंद्र के कंसोलिडेटेड फंड में जाएगा। इसलिए इसे रेवेन्यू में अभी जोड़ना उचित नहीं है। यह खुद नगर निगम कमिश्नर केके यादव में हाउस में माना है।

वाॅटर कैपेसिटी एक दिन की करने का डिजाइन पास, जमकर हुई राजनीति
सेक्टर-39 वाॅटर वर्क्स में अभी आधे दिन के लिए 48 एमजीडी (2184 लाख लीटर) स्टोरेज कैपेसिटी है। इसे एक दिन की 92 एमजीडी(4186 लाख लीटर )करने के लिए यूजीआर के दोबारा 
बनाए डिजाइन की शोर शराबे के बीच पास किया गया। निगम कमिश्नर केके यादव ने कहा कि शहर में  पानी की लीकेज और मिस्यूज को रोकने के लिए एमसी लोगों को अवेयर करेगा और इसमें काउंसलर को 
भी शामिल किया जाएगा।
निगम कमिश्नर केके यादव ने बताया कि एक दिन की वाॅटर स्टोरेज कैपेसिटी करने के लिए प्रशासन से स्पेसिफिक प्रोजेक्ट के लिए 27 करोड़ 86 लाख रुपया मिला है। बाकी का 11 करोड़ से ज्यादा पैसा स्मार्ट सिटी द्वारा दिया जाएगा। इसके लिए एमसी द्वारा कुछ नहीं खर्च किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट का पैसा बबला जी कह रहे हैं कि दूसरे कामों में लगाया जाए। ऐसा नहीं हो सकता है। जो पैसा प्रशासन से जिस प्रोजेक्ट के लिए मिला है उसी में यूज होगा। निगम कमिश्नर के कहने पर चीफ इंजीनियर ने प्रोजेक्ट के डिजाइन बारे हाउस को जानकारी दी। पहले डिजाइन से अबका काफी अच्छा है।
निगम के चीफ इंजीनियर शैलेंद्र सिंह ने हाउस को बताया सेक्टर-39 वाॅटर वर्क्स में कजौली की छह लाइनों से भाखड़ा नहर का रॉ वाॅटर आता है। अभी सेक्टर-39 वाॅटर वर्क्स में रा वॉटर की 8 यूजीआर से स्टोरेज कैपेसिटी 48 एमजीडी (2184 लाख लीटर) है। अब एक नया यूजीआर नहीं बनाना पड़ेगा। यूजीआर नंबर 6 की हाइट रेज नहीं की जाएगी।

वहीं यूजीआर नंबर 2, 7 और 8 की हाइट बढ़ाई जाएगी, जबकि यूजीआर नंबर 1, 3, 4 और 5 की हाइट और साइड का एरिया भी बढ़ाया जाएगा। इससे जमीन की बचत होगी और प्रोजेक्ट भी बेहतर होगा। कांग्रेस काउंसलर देवेंद्र सिंह बबला ने कहा कि जब एमसी के पास काम करवाने के लिए फंड नहीं है तो एक दिन की वाटर कैपेसिटी के प्रोजेक्ट को करने की क्या जरूरत है। शहर में जो काम चल रहे थे उन्हें रोक दिया गया।

गर्मियों में पानी की खपत 116 एमजीडी है...भाजपा काउंसलर अरुण सूद ने कहा कि वहां आठ यूजीआर हैं, पहले बने डिजाइन और अब बने में क्या अंतर है। एक दिन की वाॅटर कैपेसिटी करना जरूरी है, क्योंकि अभी आधे दिन की है। अभी चंडीगढ़ में 107 एमजीडी पानी है। जबकि गर्मियों में पानी की खपत 116 एमजीडी तक पहुंच जाती है। बावजूद इसके चंडीगढ़ में देश भर में सबसे ज्यादा प्रति व्यक्ति रोज 245 लीटर पानी मिलता है, जबकि नेशनल लेवल पर 135 लीटर है। यह प्रोजेक्ट पास होना चाहिए। शहर में पानी की लीकेज और मिस्यूज को रोकने के लिए जन जगारण अभियान चलाकर एमसी लोगों को अवेयर करे।
वॉटर की स्टोरेज कैपेसिटी एक दिन की जाए...भाजपा काउंसलर गुरप्रीत सिंह ढिल्लों ने कहा कि शहर में फेज पांच छह से 29 एमजीडी और पानी आने लगा है। वाॅटर की स्टोरेज कैपेसिटी एक दिन की किए जाने से लो प्रेशर सप्लाई की प्रॉबलम्स दूर हो जाएगी। इस बड़े प्रोजेक्ट को जरूर बनाना चाहिए। अभी सेक्टर 32 में लो प्रेशर की प्रॉब्लम्स रहती है। कांग्रेसी काउंसलर माहौल खराब करने लगे हैं, प्रोजेक्ट को बंद करवाकर झूले और पार्कों में जिम लगवाना चाहते हैं।
प्रोजेक्ट के लिए फंड है भी यह तो बताएं...कांग्रेस के सतीश कैंथ ने कहा कि प्रोजेक्ट को तो पास कर दिया, लेकिन यह तो बताया जाए कि इसके लिए 39 करोड़ 10 लाख फंड है भी। इसमें से प्रशासन से कितना मिला है और स्मार्ट सिटी कितने करोड़ देगी इसके अलावा एमसी कितना खर्च करेगा।

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना